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Health: दुनिया में 1.3 अरब लोगों को उच्च रक्तचाप, तनाव-धूम्रपान और निष्क्रय जीवनशैली ही अधिक बीमारियों की वजह
Thu, 21 Sep 2023 05:40 AM IST
जलज मिश्रा
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली
Published by: जलज मिश्रा
Updated Thu, 21 Sep 2023 05:40 AM IST
सार
उच्च रक्तचाप से पीड़ित हर पांच में से चार को उचित इलाज नहीं मिलता। दुनिया भर में तीन में से एक वयस्क इससे प्रभावित है। उच्च रक्तचाप सामान्य तकलीफों के साथ स्ट्रोक, दिल का दौरा, हार्ट फेल सहित अन्य समस्याओं के लिए जिम्मेदार है।
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- फोटो : istock
विस्तार
दुनिया भर में 1.3 अरब लोगों को उच्च रक्तचाप की शिकायत है। इनमें तीन-चौथाई से अधिक मध्यम आय वाले देश और परिवारों से हैं। एक रिपोर्ट के मुताबिक यदि वक्त पर प्रभावी इलाज शुरू कर दिया जाए तो 2050 तक 7.6 करोड़ मौतों, 12 करोड़ स्ट्रोक, 7.9 करोड़ दिल के दौरे और हृदय गति रुकने के 1.7 करोड़ मामलों को रोका जा सकता है। जिन लोगों में उच्च रक्तचाप की वंशानुगत प्रवृत्ति होती है उनमें मोटापा, निष्क्रिय जीवनशैली, तनाव, धूम्रपान, अल्कोहल और आहार में सोडियम (नमक) की अत्यधिक मात्रा, मर्ज को बढ़ाते हैं। अधिकांश लोगों में कोई लक्षण दिखाई नहीं देते। विश्व स्वास्थ्य संगठन (डब्ल्यूएचओ) ने उच्च रक्तचाप के विनाशकारी प्रभाव पर पहली बार रिपोर्ट जारी की है।
पांच में से चार को नहीं मिलता सही इलाज
रिपोर्ट के अनुसार, उच्च रक्तचाप से पीड़ित हर पांच में से चार को उचित इलाज नहीं मिलता। दुनिया भर में तीन में से एक वयस्क इससे प्रभावित है। उच्च रक्तचाप सामान्य तकलीफों के साथ स्ट्रोक, दिल का दौरा, हार्ट फेल सहित अन्य समस्याओं के लिए जिम्मेदार है। उच्च रक्तचाप के पीड़ित लोगों की संख्या 1990 से 2019 के बीच दोगुनी हो गई है। 1990 में दुनिया भर में उच्च रक्त चाप से पीड़ित लोगों की संख्या 65 करोड़ थी जो 2019 तक 1.3 अरब पहुंच गई।
अधिक नमक वाला भोजन भी हानिकारक
अधिक नमक वाला भोजन, शारीरिक रूप से सक्रिय न होना और बहुत अधिक शराब पीने, और नींद की कमी जैसे कारण भी उच्च रक्तचाप के खतरे को बढ़ा सकते हैं। जीवनशैली में बदलाव जैसे स्वस्थ आहार, तंबाकू छोड़ना और अधिक सक्रिय रहना रक्तचाप को कम करने में मदद कर सकता है। कुछ लोगों को उच्च रक्तचाप को नियंत्रित करने के लिए दवाओं की आवश्यकता पड़ सकती है।
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ये हैं सामान्य लक्षण
कुछ ऐसे संकेत हैं जिनके द्वारा उच्च रक्तचाप की समस्या को पहचाना जा सकता है। जैसे सर में अत्यधिक दर्द, छाती में दर्द या दबाव, स्पष्ट दिखाई न देना, बेचैनी या घबराहट होना, सांस फूलना, अचानक शरीर का तापमान बढ़ जाना, कभी कभी मूत्र में रक्त आना, थकान महसूस होना और भ्रम या इलुजन की स्थिति पैदा होना। ऐसे कई मामले देखे गए हैं जिनमें उच्च रक्तचाप की समस्या तब पकड़ में आई जब वह खतरनाक स्थिति पर पहुंच गई। ज्यादातर लोगों को इस बीमारी के बारे में पता नहीं चलता है।
पांच में एक ही कर पाता है नियंत्रित
रक्तचाप की दो स्थितियां होती हैं। उच्च रक्तचाप और निम्न रक्तचाप। जब रक्त का दबाव अत्यधिक बिंदु पर होता है तो उसे सिस्टोलिक ब्लड प्रेशर कहा जाता है। ठीक वहीं जब रक्त का दबाव या रक्तचाप सबसे निम्न बिंदु पर होता है तो उसे लोवेस्ट ब्लड प्रेशर या डिस्टोलिक ब्लड प्रेशर कहा जाता है। इसको सामान्य और किफायती दवा के साथ प्रभावी ढंग से नियंत्रित किया जा सकता है। इसके बावजूद पांच में से केवल एक व्यक्ति ने ही इसे नियंत्रित किया है।
नियंत्रण कार्यक्रम बहुत कम
डब्ल्यूएचओ के महानिदेशक डॉ. टेड्रोस एडनोम घेब्रेयेसस के अनुसार उच्च रक्तचाप नियंत्रण कार्यक्रम उपेक्षित, कम प्राथमिकता वाले और बेहद कम वित्त पोषित हैं। दुनिया के देशों में यदि उच्च रक्तचाप का इलाज प्रभावी ढंग से किया जाए तो न सिर्फ मरीजों की बढ़ती हुई संख्या को रोका जा सकता है बल्कि इसको नियंत्रित करने में भी काफी मदद मिलेगी।
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पांच में से चार को नहीं मिलता सही इलाज
रिपोर्ट के अनुसार, उच्च रक्तचाप से पीड़ित हर पांच में से चार को उचित इलाज नहीं मिलता। दुनिया भर में तीन में से एक वयस्क इससे प्रभावित है। उच्च रक्तचाप सामान्य तकलीफों के साथ स्ट्रोक, दिल का दौरा, हार्ट फेल सहित अन्य समस्याओं के लिए जिम्मेदार है। उच्च रक्तचाप के पीड़ित लोगों की संख्या 1990 से 2019 के बीच दोगुनी हो गई है। 1990 में दुनिया भर में उच्च रक्त चाप से पीड़ित लोगों की संख्या 65 करोड़ थी जो 2019 तक 1.3 अरब पहुंच गई।
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अधिक नमक वाला भोजन भी हानिकारक
अधिक नमक वाला भोजन, शारीरिक रूप से सक्रिय न होना और बहुत अधिक शराब पीने, और नींद की कमी जैसे कारण भी उच्च रक्तचाप के खतरे को बढ़ा सकते हैं। जीवनशैली में बदलाव जैसे स्वस्थ आहार, तंबाकू छोड़ना और अधिक सक्रिय रहना रक्तचाप को कम करने में मदद कर सकता है। कुछ लोगों को उच्च रक्तचाप को नियंत्रित करने के लिए दवाओं की आवश्यकता पड़ सकती है।
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ये हैं सामान्य लक्षण
कुछ ऐसे संकेत हैं जिनके द्वारा उच्च रक्तचाप की समस्या को पहचाना जा सकता है। जैसे सर में अत्यधिक दर्द, छाती में दर्द या दबाव, स्पष्ट दिखाई न देना, बेचैनी या घबराहट होना, सांस फूलना, अचानक शरीर का तापमान बढ़ जाना, कभी कभी मूत्र में रक्त आना, थकान महसूस होना और भ्रम या इलुजन की स्थिति पैदा होना। ऐसे कई मामले देखे गए हैं जिनमें उच्च रक्तचाप की समस्या तब पकड़ में आई जब वह खतरनाक स्थिति पर पहुंच गई। ज्यादातर लोगों को इस बीमारी के बारे में पता नहीं चलता है।
पांच में एक ही कर पाता है नियंत्रित
रक्तचाप की दो स्थितियां होती हैं। उच्च रक्तचाप और निम्न रक्तचाप। जब रक्त का दबाव अत्यधिक बिंदु पर होता है तो उसे सिस्टोलिक ब्लड प्रेशर कहा जाता है। ठीक वहीं जब रक्त का दबाव या रक्तचाप सबसे निम्न बिंदु पर होता है तो उसे लोवेस्ट ब्लड प्रेशर या डिस्टोलिक ब्लड प्रेशर कहा जाता है। इसको सामान्य और किफायती दवा के साथ प्रभावी ढंग से नियंत्रित किया जा सकता है। इसके बावजूद पांच में से केवल एक व्यक्ति ने ही इसे नियंत्रित किया है।
नियंत्रण कार्यक्रम बहुत कम
डब्ल्यूएचओ के महानिदेशक डॉ. टेड्रोस एडनोम घेब्रेयेसस के अनुसार उच्च रक्तचाप नियंत्रण कार्यक्रम उपेक्षित, कम प्राथमिकता वाले और बेहद कम वित्त पोषित हैं। दुनिया के देशों में यदि उच्च रक्तचाप का इलाज प्रभावी ढंग से किया जाए तो न सिर्फ मरीजों की बढ़ती हुई संख्या को रोका जा सकता है बल्कि इसको नियंत्रित करने में भी काफी मदद मिलेगी।