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रावी में हादसे वाली जगह से 600 मीटर दूर लगा था सायरन
ब्यूरो, अमर उजाला, (चंबा)
Updated Fri, 18 Mar 2016 03:48 PM IST
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हर वक्त दुश्मनों की टोह लेने वाले वायु सैनिकों के कान सायरन का शोर नहीं सुन पाए या उसकी आवाज कमजोर थी जो सायरन वाली जगह से करीब छह सौ मीटर दूरी पर बैठे पांच जवानों में से किसी एक को भी सुनाई नहीं दी।
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एनएचपीसी प्रबंधन ने बालू पुल में सायरन लगे होने का दावा किया है जबकि हादसा शीतला पुल के पास से हुआ। इसी मामले को लेकर अब प्रशासन ने जांच बैठा दी है। अतिरिक्त दंडाधिकारी चंबा को पंद्रह दिन में रिपोर्ट सौंपने के निर्देश दिए गए हैं। जांच में पानी छोड़ने के समय, हादसे वाली जगह पर सायरन का प्रबंध और बोर्ड लगाने जैसी व्यवस्थाओं की छानबीन की जाएगी। नदी में अचानक पानी छोड़ने और उसके बाद हुई मौत का यह पहला मामला नहीं है बल्कि इससे पूर्व भी ऐसी कई घटनाएं हो चुकी हैं। जिनसे सबक लेते हुए सरकार व प्रशासन ने परियोजना प्रबंधकों को सायरन और बोर्ड लगाने के निर्देश दिए थे। जिसके बाद चंबा में रावी नदी के तट पर सायरन तो लगाए गए हैं लेकिन इनके मध्य के अंतराल में ज्यादा दूरी होने की वजह से अभी भी कई संवेदनशील प्वाइंट ऐसे हैं जहां सायरन की आवाज सुनाई नहीं देती है। एनएचपीसी ने चंबा में रावी तट पर बालू पुल के पास सायरन लगाया है।
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यह सायरन पानी छोड़ने से आधा घंटा पहले बजाया जाता है। ताकि नदी तट पर पहुंचे लोग बाहर निकल जाएं। शनिवार को वायु सेना के जवान शीतला पुल के पास रावी तट में मौजूद थे और यहां से बालू पुल की दूरी करीब छह सौ मीटर है और इस बीच रावी के बहाव की आवाज भी यहां तेजी से सुनाई देती है। शीतला पुल से ऊपर रावी नदी का काफी हिस्सा चंबा-पठानकोट हाइवे से जुड़ा है और कोई भी व्यक्ति आसानी से नदी तक पहुंच सकता है। लेकिन यहां सायरन नहीं लगाया गया है। यही वजह रही जो शनिवार को रावी तट पर पहुंचे वायु सेना के जवान आधे घंटे पहले बजे सायरन की आवाज को नहीं सुन पाए। फिलहाल, प्रशासनिक जांच की रिपोर्ट के बाद ही इस बात का खुलासा होगा कि बालू में लगाए गए सायरन की आवाज कितनी दूर तक गूंजती है। लेकिन नदी में घुसे लोगों की जान बचाने के प्रयास यहां कमजोर नजर आ रहे हैं।
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