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अवैध खनन पर कार्रवाई से कतरा रहे अधिकारी
संजय भारद्वाज/अमर उजाला, बिलासपुर
Updated Tue, 08 Mar 2016 09:21 AM IST
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अवैध खनन को रोकने के लिए अधिकारियों को शक्तियां मिली है। बावजूद इसके खनन माफिया बेखौफ काम कर रहा है।
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बेशक प्रदेश सरकार ने जिला में अवैध खनन को रोकने के लिए कई विभागों के अधिकारियों को शक्तियां मिली है। बावजूद इसके बिलासपुर की खड्डों और अन्य स्थानों पर खनन माफिया बेखौफ काम कर रहा है। इसकी वजह यह है कि पुलिस और खनन विभाग के अलावा ज्यादातर विभाग अवैध खनन करने वालों पर कार्रवाई करने से कतरा रहे हैं।
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ऐसे में जिला में खनन का काला खेल बदस्तूर जारी है। हालत यह हो चुके हैं खनन से जिला की ज्यादातर खड्डों का अस्तित्व खतरे में पड़ चुका है। अगर इसी तरह से खनन माफिया जिला की खड्डों में खनन करता रहा तो वह दिन दूर नहीं जब लाखों लोगों को पेयजल और सिंचाई के लिए पानी मुहैया करवाने वाली योजनाएं ठप पड़ जाएंगी।
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अप्रैल 2015 से जनवरी 2016 तक वसूली इतनी राशि
बिलासपुर जिले की शुक्र खड्ड, रौहल खड्ड, ध्रुव खड्ड, बेला खड्ड, मांडवा खड्ड, सरयाली, बम्म खड्ड, अली खड्ड, गंभर खड्ड, समलैण खड्ड के साथ ही सीर खड्ड में भी बड़े पैमाने पर अवैध खनन किया जा रहा है। वर्ष 2014 में जिला में माइनिंग विभाग ने 72 चालान करके 3.17 लाख रुपये, पुलिस ने 53 चालान काटे और इससे 2.50 लाख जुर्माना वसूल किया।
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39 वर्गों के अफसरों को हैं चालान की शक्तियां
सरकार ने विभिन्न विभागों के 39 वर्गों के तहत आने वाले अधिकारियों और कर्मचारियों को चालान की शक्तियां दी है। इसमें बीडीओ, वन विभाग, आईपीएच, लोनिवि, प्रशासनिक अधिकारी, खनन विभाग और राजस्व विभाग शामिल हैं। लेकिन, खनन और पुलिस विभाग के अलावा कोई भी विभाग कार्रवाई करने के लिए आगे नहीं आ रहा है।
इन विभागों ने एक चालान भी नहीं काटा
जिला में खनन माफिया के लिए सरकार द्वारा अधिकृत कई विभागों की हालत यह है कि एक वर्ष में उन्होंने अवैध खनन करने वालों का एक चालान भी नहीं काटा है। इसमें राजस्व, आईपीएच और लोनिवि शामिल है। जबकि कई अन्य विभागों और अधिकारियों की कार्रवाई भी नाममात्र है। ऐसे में बिलासपुर में खनन का खेल बदस्तूर जारी है। प्रतिबंधित होने के बावजूद कई खड्डों से रेत-पत्थर और बजरी निकाली जा रही है।
खतरे में पेयजल और सिंचाई योजनाएं
जिला में अवैध खनन इस कदर अपने पैर पसार चुका है कि इसका सीधा असर लोगों के जीवन पर पड़ने लगा है। अवैध खनन के कारण खड्डों का अस्तित्व खतरे में पड़ने से दर्जनों पेयजल और सिंचाई योजनाएं भी प्रभावित हो रही हैं। लेकिन, खनन के कार्य में जुटे लोग बेपरवाह खनन को अंजाम दे रहे हैं।
विशेषज्ञ एवं पर्यावरण विशेषज्ञों के अनुसार अगर समय रहते अवैध खनन पर लगाम नही लगाई गई तो नदियों और खड्डों के किनारे बसे गांव के लोगों को इसका खामियाजा भुगतना पड़ेगा। यह नदी नाले बरसात में अपना रुख मोड़कर तबाही ला सकते हैं।