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जमीन पर बिछे सपने, किसान मायूस
ब्यूरो/अमर उजाला,सिरसा
Updated Sat, 12 Mar 2016 11:26 PM IST
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किसानों के सपनों पर ओलावृष्टि
- फोटो : bureau
जिले में शुक्रवार रात और शनिवार को हुई बरसात, ओलावृष्टि से फसलों को भारी नुकसान हुआ है। कई क्षेत्रों में ओलावृष्टि से फसलें तबाह हो गई हैं। पिछले दिनों कपास और ग्वार की नष्ट हुई फसलों का अभी तक मुआवजा भी नहीं मिला था कि अब फसलों को ओलावृष्टि से भारी नुकसान हुआ है।
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इसके अलावा बरसात के साथ चली तेज हवा से फसलें बिछ गई हैं। किसानों का कहना है कि लगातार तीसरी फसल को प्राकृतिक नुकसान हुआ है। अब मुआवजे की मांग उठना स्वाभाविक है। नुकसान के बाद किसानों के चेहरों पर चिंता की लकीरें देखी जा रही हैं। किसानों की सपनों की फसल तबाह हो गई हैं।
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शुक्रवार रात को जिलेभर में बरसात आरंभ हो गई। रातभर रुक-रुककर बरसात होती रही। यह सिलसिला सुबह तक जारी रहा। बरसात के दौरान ओलावृष्टि भी हुई। तेज हवाएं चलने से फसलें बिछ गई हैं। गांव दड़बा के किसान ओमप्रकाश सुथार ने बताया कि बरसात का असर उत्पादन पर पड़ेगा।
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गांव हंजीरा के किसान मोहन लाल पूनिया ने बताया कि ओलावृष्टि से सरसों की फसलों को बहुत नुकसान हुआ है। पकी हुई फसल पर ओलावृष्टि होने से फलियां झड़ गई हैं। कालांवाली के किसान जसकरण सिंह किंगरा ने बताया कि गेहूं की फसल अभी पकाव पर थी, ऐसे में बरसात के बाद तेज हवा चलने से फसल गिर गई है।
गिरी हुई फसल का उत्पादन तो कम होगा ही साथ में कटाई में भी खर्च अधिक करना पड़ेगा। इसी प्रकार गांव ओटू के किसान पदम सिंह राठौड़ ने बताया कि बरसात से फसलों को भारी नुकसान हुआ है। हरियाणा किसान मंच के प्रदेशाध्यक्ष प्रह्लाद सिंह भारूखेड़ा ने कहा कि बरसात और ओलावृष्टि से हुए नुकसान की गिरदावरी तुरंत करवाई जाए और किसानों को नुकसान की भरपाई के लिए मुआवजा दिया जाए। उन्होंने कहा कि कपास और ग्वार की नष्ट हुई फसल का मुआवजा भी तुरंत मिले।
उल्लेखनीय है कि जिले में तीन लाख हेक्टेयर में गेहूं, 55 हजार हेक्टेयर में सरसों, 10 हजार हेक्टेयर में जौ, पांच हजार हेक्टेयर में चना की बिजाई हुई है और ये सभी फसलें पकाव पर हैं। ऐसे में बरसात और ओलावृष्टि से उत्पादन पर असर पड़ेगा।
कहां कितनी बरसात
सिरसा- 6 एमएम
ओटू- 4 एमएम
कालांवाली- 2 एमएम
खुईयां - 8 एमएम
अबूबशहर- 7 एमएम