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पटवारी को फटा पुराना कुर्ता दिखाते हुए किसान बोला
ब्यूरो/अमर उजाला, सिरसा
Updated Mon, 14 Mar 2016 12:08 AM IST
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किसान
- फोटो : Bureau
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पिछले साल नरमा नी होएया। हुण सरों खत्म हो गई ए। कनक वी पंजाह प्रतिशत दे लगभग खत्म वरगी है। पटवारी साहब! आ, मेरा फट्टेया कुर्ता देक्खो। वी लख रुपये दा कर्जा सर चड्ढ गया ए। जमीन वेच के कर्जा लाऊणा सी, एक एकड़ पीछे छह लख दा पा लगएया। तुसीं दसों, हुण मैं की करां। गांव लखुआना के किसान मलकीत सिंह ने अपनी व्यथा ओलावृष्टि के कारण हुए नुकसान का आकलन करने आए पटवारी लक्ष्मण को सुनाई। पटवारी ने जवाब दिया कि आपकी पीड़ा जानने के लिए सरकार ने ही उसे भेजा है।
मलकीत सिंह, निर्मल सिंह, झिलमन सिंह और कुलदीप सिंह चार भाई हैं। चारों के पास 28 एकड़ जमीन है। गेहूं और सरसों की बिजाई की थी। सरसों पककर तैयार थी कि ओलावृष्टि ने सब कुछ तहस नहस कर दिया। गेहूं को भी करीब 50 फीसदी नुकसान हुआ है। नुकसान देखने गए पटवारी के समक्ष मलकीत सिंह रो दिया। उसने ठेठ पंजाबी में कहा कि बैंक, सोसायटी दे अट्ठ लख रुपये देने आ। कुज समां पहलां आढ़ती तो 12 लख रुपये उधार फड के कुडी दा ब्याह कित्ता सी। कर्ज दी रकम 20 लख रुपये हो हो गई है। पिछले साल नरमें दी फसल नी होई। हुण सरों खत्म हो गई।
कनक दी हालत वी माडी ए। इक वार विच कर्जा लौण लई, मैं तां हिस्से विच आऊंदे सात किल्लेयां चों एक किल्ला नीलाम कर दित्ता सी। उम्मीद तां सी 25-30 लख रुपया मिल जाऊ। जमीन दा मुल्ल ही चार-पंज लख लगेया। मैं, जमीन नहीं वेच्ची। पटवारी साहब नरमें दी फसल दा मुआवजा कदों मिलूगा दसो। मुआवजे नाल कर्जा उतारणा। किसानी करणा हुण बहोत ओक्खा। तुसीं सही रिपोर्ट करियो। मलकीत सिंह पटवारी को अपने खेतों में ले गया।
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पड़ोसी खेत मालिक सतपाल पूनियां ने पंद्रह एकड़ में लगी सरसों की फसल दिखाई। जो ओलावृष्टि के कारण पूरी तरह से समाप्त हो चुकी थी। पूनियां ने बैंक से करीब 13 लाख रुपये का लोन ले रखा है। पूनियां के अनुसार किसानी घाटे का सौदा साबित हो रही है। पहले खाद-बीज के लिए दर-दर भटकना पड़ता है, अगर फसल हो जाए तो भाव नहीं मिलता है। लगातार दूसरी बार भगवान किसानों का दुश्मन बन गया है।
कॉटन को सफेद मक्खी ने लील लिया। जिसका मुआवजा आज तक नहीं मिला है। अब सरसों तथा गेहूं की बर्बादी हो गई है। इन परिस्थतियों में खेती नहीं हो सकती। पूनियां ने पटवारी को सरकार तक रिपोर्ट जल्द भेजने का अनुरोध किया।
अगले माह भतीजी की शादी है, शायद आगे करनी पड़े
गांव लखुआना के किसान जगदीश खीचड अपने दो भाइयों के साथ 48 एकड़ में सरसों की बिजाई की थी। लगभग 80 से 90 फीसदी फसल खराब हो गई है। करीब तीस एकड़ भूमि पर बिजांत गेहूं की फसल को भी पचास फीसदी तक नुक्सान पहुंचा है। खीचड ने बताया कि अगले माह उसकी भतीजी की शादी तय कर रखी है। लगातार तिहरी मार पडने पर शादी रद्द करनी पड़ेगी या फिर तारीख आगे बढ़ानी पड़ेगी। चूंकि कुछ समय पहले भाखड़ा नहर टूटने से नरमा की फसल को काफी नुक्सान हुआ था। जो फसल बची थी, उस पर सफेद मक्खी ने नुक्सान पहुंचाया था। फसल की बर्बादी ने करीब बीस लाख रुपये का कर्जदार बना दिया है।
गांव शेरगढ़ के किसान गुरमीत सिंह, सर्वजीत सिंह, अवतार सिंह के खेतों में भी पटवारी ने दौरा कर स्थिति जानी। सरसों लगभग समाप्त हो चुकी है। गुरमीत सिंह ने बताया कि उसने जमीन ठेके पर ले रखी है। इस बार सरसों की फसल न होने से उसे दोहरी मार पड़ेगी। ठेका राशि का उसे भुगतान करना होगा।
उपमंडल डबवाली में करीब 15 हजार 700 हेक्टेयर एरिया में सरसों की बिजाई हुई है। प्रति एकड़ करीब 11 से 12 क्विंटल सरसों मिलती है। सरसों का उत्पादन करने वाले किसानों के अनुसार भाव करीब 4000 के आस पास होता है। खेत को तैयार करने में 9 से 10 हजार रुपये लग जाते हैं। ऐसे में प्रति एकड़ करीब उसे 50 से 55 हजार रुपये का नुक्सान हुआ है।
सड़क किनारे सबसे ज्यादा मार
गेहूं के उन खेतों पर सबसे ज्यादा मार पड़ी है, जो सड़क के किनारे स्थित हैं। चौटाला रोड़, सकताखेड़ा से लखुआना रोड़ पर यही स्थिति देखने को मिलती है। ओलावृष्टि के साथ तेज आंधी के चलते लहलहा रही गेहूं की फसल जमीन छूने लगी है। सबसे ज्यादा नुक्सान वहां हुआ है, यहां गेहूं की फसल पककर तैयार होने वाली थी।
डबवाली में 15 एमएम बारिश रिकॉर्ड
शनिवार को ओलावृष्टि के साथ डबवाली में पंद्रह एमएम बारिश रिकॉर्ड की गई है। जगह-जगह पानी खड़ा होने से जन-जीवन अस्त व्यस्त हो गया था। नीचले इलाकों में रविवार दोपहर बाद पानी निकलने से राहत महसूस हुई।
छुट्टी वाले दिन दो काम निपटाते रहे पटवारी
राज्य सरकार द्वारा सफेद मक्खी से खराब हुई कॉटन की फसल की मुआवजा राशि घोषित करने के बाद पटवारियों ने किसानों की सूचियां तैयार करनी शुरू कर दी हैं। दूसरी ओर शनिवार को हुई ओलावृष्टि से प्रभावित खेतों का आंकलन करने के लिए रविवार को पटवारी दौड़ धूप करते रहे। छुट्टी वाले दिन डबवाली स्थित ई-दिशा केंद्र खुला रहा।
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मलकीत सिंह, निर्मल सिंह, झिलमन सिंह और कुलदीप सिंह चार भाई हैं। चारों के पास 28 एकड़ जमीन है। गेहूं और सरसों की बिजाई की थी। सरसों पककर तैयार थी कि ओलावृष्टि ने सब कुछ तहस नहस कर दिया। गेहूं को भी करीब 50 फीसदी नुकसान हुआ है। नुकसान देखने गए पटवारी के समक्ष मलकीत सिंह रो दिया। उसने ठेठ पंजाबी में कहा कि बैंक, सोसायटी दे अट्ठ लख रुपये देने आ। कुज समां पहलां आढ़ती तो 12 लख रुपये उधार फड के कुडी दा ब्याह कित्ता सी। कर्ज दी रकम 20 लख रुपये हो हो गई है। पिछले साल नरमें दी फसल नी होई। हुण सरों खत्म हो गई।
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कनक दी हालत वी माडी ए। इक वार विच कर्जा लौण लई, मैं तां हिस्से विच आऊंदे सात किल्लेयां चों एक किल्ला नीलाम कर दित्ता सी। उम्मीद तां सी 25-30 लख रुपया मिल जाऊ। जमीन दा मुल्ल ही चार-पंज लख लगेया। मैं, जमीन नहीं वेच्ची। पटवारी साहब नरमें दी फसल दा मुआवजा कदों मिलूगा दसो। मुआवजे नाल कर्जा उतारणा। किसानी करणा हुण बहोत ओक्खा। तुसीं सही रिपोर्ट करियो। मलकीत सिंह पटवारी को अपने खेतों में ले गया।
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पड़ोसी खेत मालिक सतपाल पूनियां ने पंद्रह एकड़ में लगी सरसों की फसल दिखाई। जो ओलावृष्टि के कारण पूरी तरह से समाप्त हो चुकी थी। पूनियां ने बैंक से करीब 13 लाख रुपये का लोन ले रखा है। पूनियां के अनुसार किसानी घाटे का सौदा साबित हो रही है। पहले खाद-बीज के लिए दर-दर भटकना पड़ता है, अगर फसल हो जाए तो भाव नहीं मिलता है। लगातार दूसरी बार भगवान किसानों का दुश्मन बन गया है।
कॉटन को सफेद मक्खी ने लील लिया। जिसका मुआवजा आज तक नहीं मिला है। अब सरसों तथा गेहूं की बर्बादी हो गई है। इन परिस्थतियों में खेती नहीं हो सकती। पूनियां ने पटवारी को सरकार तक रिपोर्ट जल्द भेजने का अनुरोध किया।
अगले माह भतीजी की शादी है, शायद आगे करनी पड़े
गांव लखुआना के किसान जगदीश खीचड अपने दो भाइयों के साथ 48 एकड़ में सरसों की बिजाई की थी। लगभग 80 से 90 फीसदी फसल खराब हो गई है। करीब तीस एकड़ भूमि पर बिजांत गेहूं की फसल को भी पचास फीसदी तक नुक्सान पहुंचा है। खीचड ने बताया कि अगले माह उसकी भतीजी की शादी तय कर रखी है। लगातार तिहरी मार पडने पर शादी रद्द करनी पड़ेगी या फिर तारीख आगे बढ़ानी पड़ेगी। चूंकि कुछ समय पहले भाखड़ा नहर टूटने से नरमा की फसल को काफी नुक्सान हुआ था। जो फसल बची थी, उस पर सफेद मक्खी ने नुक्सान पहुंचाया था। फसल की बर्बादी ने करीब बीस लाख रुपये का कर्जदार बना दिया है।
गांव शेरगढ़ के किसान गुरमीत सिंह, सर्वजीत सिंह, अवतार सिंह के खेतों में भी पटवारी ने दौरा कर स्थिति जानी। सरसों लगभग समाप्त हो चुकी है। गुरमीत सिंह ने बताया कि उसने जमीन ठेके पर ले रखी है। इस बार सरसों की फसल न होने से उसे दोहरी मार पड़ेगी। ठेका राशि का उसे भुगतान करना होगा।
उपमंडल डबवाली में करीब 15 हजार 700 हेक्टेयर एरिया में सरसों की बिजाई हुई है। प्रति एकड़ करीब 11 से 12 क्विंटल सरसों मिलती है। सरसों का उत्पादन करने वाले किसानों के अनुसार भाव करीब 4000 के आस पास होता है। खेत को तैयार करने में 9 से 10 हजार रुपये लग जाते हैं। ऐसे में प्रति एकड़ करीब उसे 50 से 55 हजार रुपये का नुक्सान हुआ है।
सड़क किनारे सबसे ज्यादा मार
गेहूं के उन खेतों पर सबसे ज्यादा मार पड़ी है, जो सड़क के किनारे स्थित हैं। चौटाला रोड़, सकताखेड़ा से लखुआना रोड़ पर यही स्थिति देखने को मिलती है। ओलावृष्टि के साथ तेज आंधी के चलते लहलहा रही गेहूं की फसल जमीन छूने लगी है। सबसे ज्यादा नुक्सान वहां हुआ है, यहां गेहूं की फसल पककर तैयार होने वाली थी।
डबवाली में 15 एमएम बारिश रिकॉर्ड
शनिवार को ओलावृष्टि के साथ डबवाली में पंद्रह एमएम बारिश रिकॉर्ड की गई है। जगह-जगह पानी खड़ा होने से जन-जीवन अस्त व्यस्त हो गया था। नीचले इलाकों में रविवार दोपहर बाद पानी निकलने से राहत महसूस हुई।
छुट्टी वाले दिन दो काम निपटाते रहे पटवारी
राज्य सरकार द्वारा सफेद मक्खी से खराब हुई कॉटन की फसल की मुआवजा राशि घोषित करने के बाद पटवारियों ने किसानों की सूचियां तैयार करनी शुरू कर दी हैं। दूसरी ओर शनिवार को हुई ओलावृष्टि से प्रभावित खेतों का आंकलन करने के लिए रविवार को पटवारी दौड़ धूप करते रहे। छुट्टी वाले दिन डबवाली स्थित ई-दिशा केंद्र खुला रहा।