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अफसरों ने सेना को डमी बनाकर कर दिया खड़ा, नहीं थी आदेशों की जरूरत

Sun, 06 Mar 2016 01:51 AM IST
ब्यूरो/अमर उजाला, रोहतक
ब्यूरो/अमर उजाला, रोहतक Updated Sun, 06 Mar 2016 01:51 AM IST
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 Army officials have dummy standing by , did not need orders
प्रकाश सिंह जांच कमेटी - फोटो : अमर उजाला
अफसरों ने पूरे प्रदेश को जलने के लिए लावारिस छोड़ दिया। सेना को बुला तो लिया गया, लेकिन स्थानीय अधिकारियों ने आर्मी से कोई तालमेल नहीं बैठाया। स्थानीय प्रशासन पूरी तरह से लापरवाह बना रहा और सेना को डमी बनाकर खड़ा कर दिया। उपद्रव की जांच के लिए गठित प्रकाश सिंह कमेटी ने पूरे मामले में अफसरों की घोर लापरवाही की बात मानी है।
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कमेटी के सामने पीड़ितों के बयानों से सब कुछ उजागर हो गया। खुद कमेटी प्रमुख ने यह माना है कि तालमेल की कमी और लापरवाही के कारण ही उपद्रव बढ़ता चला गया। पूर्व डीजीपी प्रकाश सिंह ने यह भी कहा कि उपद्रव के समय सेना को सरकार से आदेशों की जरूरत नहीं थी। सेना केवल ड्यूटी मजिस्ट्रेट के आदेश मानती और जितनी भी कार्रवाई होती, वह ड्यूटी मजिस्ट्रेट के आदेश पर ही होती है। कमेटी के सामने अभी केवल रोहतक में अफसरों की लापरवाही सामने आई है।
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जाट आरक्षण आंदोलन में उपद्रव की शुरुआत रोहतक से हुई थी। 18 फरवरी को वकीलों और गैर जाट बिरादरी के लोगों में भिडंत हुई। इसके बाद कुछ उपद्रवियों ने बाइकों और गाड़ियों तक को फूंक डाला। उसी दिन अर्धसैनिक बल के जवानों को बुलाया गया था, जिनको केवल स्थानीय पुलिस के पीछे लगाया गया। अगले दिन हालात ज्यादा बिगड़ गए और रोहतक के साथ ही कई जिलों में उपद्रव शुरू हो गया। काबू करने के लिए सेना को बुलाया गया, लेकिन कर्फ्यू के बाद भी उपद्रव बढ़ता चला गया। हर किसी के जहन में एक ही सवाल खड़ा हो रहा था कि आखिर सेना के सामने भी पथराव, आगजनी, लूटपाट हो रही है और वह आराम से देख रही है।
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लेकिन अब इन सवालों के जवाब सामने आ रहे हैं। जांच कमेटी प्रमुख पूर्व डीजीपी प्रकाश सिंह का मानना है कि सेना के साथ ही अर्धसैनिक बल व अधिकारियों के बीच तालमेल में कमी रही। अगर तालमेल बेहतर होता तो यह दंगा कंट्रोल किया जा सकता था। क्योंकि सेना व अर्धसैनिक बल को पुलिस-प्रशासन की ओर से कोई भी सही जानकारी नहीं दी गई। सेना और अर्धसैनिक बल केवल फ्लैग मार्च तक सीमित रहे। फ्लैग मार्च को भी पुलिस अधिकारी केवल भीड़ तक लेकर जाते और वापस ले आते।

सूत्रों के अनुसार यह भी सामने आया है कि पुलिस-प्रशासन ने आंदोलन में जाम लगाने के समय ही किसी से बात तक नहीं की। जिससे लोगों के अंदर से पुलिस पर विश्वास और प्रशासन का डर निकल गया। 

कमेटी को बताई सच्चाई
शहर के पार्षद अशोक खुराना ने कमेटी प्रमुख प्रकाश सिंह को पूरे मामले की जानकारी देते हुए बताया कि डीसी ने सेना के आने के बावजूद किसी तरह की कार्रवाई के आदेश नहीं दिए। वे कहते रहे कि इसके लिए नियमानुसार बड़ी संख्या में सेना होनी चाहिए और सरकार से कार्रवाई के आदेश मिलने चाहिए। इस पर प्रकाश सिंह ने उनको बताया कि उस समय सेना केवल ड्यूटी मजिस्ट्रेट के आदेश मानती है। इस तरह अधिकारियों की लापरवाही की पोल खुल गई है।  

रोहतक उपद्रव में 50 से अधिक अधिकारियों को नोटिस 
जांच कमेटी ने रोहतक के 50 से ज्यादा पुलिस और प्रशासनिक अधिकारियों को नोटिस जारी कर दिया है। इन अधिकारियों से उपद्रव के संबंध में 10 दिनों के भीतर लिखित में जवाब मांगा गया है। जवाब कमेटी के चंडीगढ़ स्थित कार्यालय में भेजना होगा। अधिकारियों से पूछा गया है कि किन वजहों से उपद्रव मचा और आप क्यों फेल रहे। कमेटी अपनी जांच रिपोर्ट 45 दिनों में प्रदेश सरकार को सौंप देगी। अधिकारियों को कमेटी ने एक गाइडलाइन जारी की है। इसी के तहत उन्हें अपना पक्ष रखना है। कुछ बिंदुओं पर अधिकारियों को अपना पक्ष रखना अनिवार्य होगा। 

आईजी और डीआईजी सहित डीसी के बयान दर्ज 
हिंसा को लेकर कमेटी ने तत्कालीन आईजी श्रीकांत जाधव, चार्ज संभाल रहे डीआईजी सौरभ सिंह और डीसी डी. के. बेहरा सहित अन्य अधिकारियों के बयान दर्ज किए हैं। इन अधिकारियों से उपद्रव के कारण और मौजूदा हालात के बारे में पूछा गया था। आईजी और डीआईजी ने डिटेल में पूरी घटना के बारे में कमेटी को बताया। 

सेना की भूमिका भी होगी अहम 
कमेटी के सदस्यों ने उपद्रव के दौरान रोहतक पहुंचे सेना के अधिकारियों से संपर्क करने का प्रयास किया है। इन अधिकारियों से भी उपद्रव व स्थानीय अधिकारियों की भूमिका के बारे में पूछताछ की जाएगी। सेना के संबंधित अधिकारियों के मोबाइल नंबर और नाम लिए गए हैं। जल्द ही उनसे संपर्क कर बातचीत की जाएगी। जबकि अर्द्धसैनिक बल के अधिकारियों के बयान दर्ज कर लिये गए हैं। 

रोहतक उपद्रव का केंद्र, फिर आएगी टीम 
जांच कमेटी की रोहतक में अभी तक जांच पूरी नहीं हुई है। सिंह ने रोहतक को उपद्रव का केंद्र मानते हुए कहा कि दोबारा भी रोहतक में जांच के लिए आना पड़ेगा। फिलहाल यहां से लिए गए पीड़ितों के बयान और अन्य सबूतों की स्टडी की जाएगी। इसके बाद कमेटी के सदस्य अन्य जिलों में भी निरीक्षण करेंगे।

वीडियो फु टेज के लिए वेबसाइट बनाई
उपद्रव से जुड़े वीडियो और दस्तावेजों के लिए कमेटी ने एक वेबसाइट जारी कर दी है। prakashsingh.video.com2016@gmail.com और उपद्रव से जुड़े दस्तावेजों के लिए  prakashsingh.doc.com2016@gmail.com साइट बनाई है। इसके अलावा उपद्रव से जुड़ी वीडियो व्हाट्स अप पर भेजने के लिए प्रकाश सिंह का मोबाइल नंबर 09878982023 जारी किया गया है।  श्रद्धांजलि सभा आज 

वहीं, जाट आंदोलन के दौरान मरने वाले लोगों की आत्मा की शांति के लिए रविवार को बोहर गांव के नांदल भवन में श्रद्धांजलि सभा होगी। दावा है कि सभा में 36 बिरादरी के लोग शामिल होंगे। नांदल खाप के प्रधान महेंन्द्र सिंह हुड्डा ने बताया कि सुबह 10 से दोपहर 12 बजे तक सभा होगी।
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