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नहीं हो पाया जिप चेयरमैन का फैसला
ब्यूरो/करनाल,अमर उजाला
Updated Wed, 09 Mar 2016 12:46 AM IST
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चुनाव
- फोटो : file
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आखिरकार वहीं हुआ, जिसका पहले से ही अंदेशा था। जिला परिषद चेयरमैन व वाइस चेयरमैन पद के चुनाव को लेकर किसी भी दल के न तो दावेदार मीटिंग में पहुंचे और न ही अन्य पार्षद। केवल तीन सदस्य बैठक में पहुंचे, लेकिन उन्होंने भी अपनी हाजिरी नहीं लगाई। आखिरकार आधे घंटे तक पार्षदों का इंतजार करने के बाद चुनाव को स्थगित कर दिया गया।
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अब सरकार द्वारा चुनाव के लिए नई तिथि की घोषणा बाद में की जाएगी। गौरतलब है कि प्रदेश सरकार द्वारा मंगलवार को जिप चेयरमैन व वाइस चेयरमैन पद के चुनाव की तिथि घोषित की गई थी। इसको लेकर सभी 25 जिला पार्षदों को सूचित किया गया था और बाकायदा पूरी तैयारियां की गई। भारी संख्या में पुलिस बल भी तैनात रहा।
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तीन पार्षद ही पहुंचे
सुबह 11 बजे से 11.30 बजे तक केवल तीन ही पार्षद बैठक में पहुंच पाए। इनमें वार्ड नंबर एक से सचिन बुड़नपुर, 19 से अशोक मित्तल व वार्ड 20 से दीपक त्यागी। इन्होंने भी रजिस्टर में अपनी हाजिरी नहीं लगाई और वे भी बैठक से चले गए। बाद में एडीसी धर्मबीर ने कोर ग्रुप पूरा नहीं होने के कारण चुनाव को स्थगित कर दिया। बता दें कि चेयरमैन पद को लेकर शुरू से ही भाजपा और इनेलो आमने सामने हैं। इनेलो की तरफ से कमलेश सांगवान का नाम शुरू से ही चर्चाओं में है तो भाजपा की तरफ से कोई दावेदार खुलकर सामने नहीं आ पा रहा है।
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हम तो वोट देने गए थे, कोई लेने वाला ही नहीं मिला : मित्तल
जिला पार्षद अशोक मित्तल ने कहा कि वे तो वोट देने गए थे, लेकिन कोई भी दावेदार वोट लेने के लिए बैठक में पहुंच पाया। मित्तल ने कहा कि वे चाहते हैं कि चुनाव जल्द हो ताकि विकास कार्य शुरू हो सके, लेकिन सरकार की मंशा कुछ और है। वहीं कांग्रेस के सचिन बुढ़नपुर व दीपक त्यागी ने भी कुछ ऐसा बयान किया।
हम नहीं दावेदार : सांगवान
पूर्व विधायक नरेंद्र सांगवान से जब इनेलो के सदस्यों के बैठक में नहीं आने का कारण पूछा गया तो सांगवान ने कहा कि जब सरकार का ही कोई नुमाइंदा बैठक में नहीं पहुंचा तो इनेलो के सदस्य क्या करते? सांगवान ने तो यहां तक कह दिया कि उनकी तरफ से चेयरमैन पद के लिए कोई दावेदार नहीं है? हालांकि, इसमें कितनी सच्चाई है यह तो चुनाव के दिन ही पता चल पाएगा।
भाजपा में नहीं बन पा रही सहमति
चुनाव बैठक में सदस्यों के नहीं पहुंचने का सबसे बड़ा कारण है भाजपा में नामों पर सहमति नहीं हो पाना। सूत्रों का दावा है कि देर रात भाजपा 14 पार्षदों को एकसाथ लाने में कामयाब रही, लेकिन चेयरमैन व वाइस चेयरमैन के नाम तय नहीं कर पाए। ऐसे में नाम तय होने पर 14 में कुछ सदस्यों का नाराज होना भी लाजमी है, इसलिए भाजपा नेताओं ने चुनाव को टालने में ही समझदारी समझी। इसलिए भाजपा समर्थक कोई भी सदस्य बैठक में नहीं पहुंच पाया। हालांकि, मंगलवार सुबह भी भाजपा समर्थक पार्षद कर्ण लेक पर एकजुट हुए थे, लेकिन आलाकमान के आदेश के इंतजार में वहीं बैठे रहे।