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खेती के बदले तरीके: FPO माॅडल से बढ़ी आय, कंपनियां गठित कर कृषि काे व्यावसायिक बना रहे किसान; बड़ा फायदा

Sat, 14 Dec 2024 01:06 PM IST
नवीन दलाल मोहित धुपड़, भोपाल/सिहोर
मोहित धुपड़, भोपाल/सिहोर Published by: नवीन दलाल Updated Sat, 14 Dec 2024 01:06 PM IST
सार

आत्मनिर्भर महिला फार्मर प्रोड्यूसर कंपनी लिमिटेड, गांव इच्छावर की निदेशक संगीता मालवीय और चंद्रकला ने बताया कि उनकी कंपनी महिला किसानों को समृद्ध करने में काम कर रही है। 35 गांवों में 2000 महिला किसान कंपनी में सदस्य हैं, जिनके पास 4385 एकड़ जमीन है।

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Changing methods of farming, Income increased due to FPO model, farmers making agriculture commercial
एफपीओ माॅडल के जरिये किसान पेशेवर ढंग से खेती कर रहे। - फोटो : amar Ujala

विस्तार

मध्य प्रदेश के किसान खेती के ताैर-तरीकों  में बदलाव कर अपनी कृषि आय को बढ़ा रहे हैं। खेती के एफपीओ (फार्मर प्रोग्रेसिव ऑर्गेनाइजेशन) माॅडल के जरिये छोटी-छाेटी कंपनियां बनाकर ये किसान पेशेवर ढंग से खेती कर रहे हैं। किसानों का मुख्य फोकस इस बात पर रहता है कि उन्हें अपनी फसलों का एमएसपी से अधिक दाम कैसे और कहां मिल सकता है। इसके लिए वे सरकारी मंडियों के बजाय बाजार मूल्यों पर अपनी फसलों को बेचने में ज्यादा प्राथमिकता देते हैं। इस कार्य में आईटीसी उनकी पूरी मदद कर रही है।

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‘द नेक्सटजेन एग्री ट्रेल’ विजन के साथ आईटीसी न केवल इन किसानों काे सरकारी योजनाओं का उचित इस्तेमाल करना सिखा रही है बल्कि फिजिटल (फिजिकल + डिजिटल हस्तक्षेप) फाॅर्मूले से किसानों को अपग्रेड भी किया जा रहा है। आईटीसीमार्स, क्लाइमेट स्मार्ट खेती, वाॅटर यूजर्स ग्रुप, फसल विविधिकरण व चाैपाल सागर के जरिये किसानों का दृष्टिकोण व्यावसायिक बनाने पर पूरा जोर दिया जा रहा है। अभी 1700 से अधिक एफपीओ गठित कर 1.7 मिलियन किसानों को इससे जोड़ा जा चुका है। वर्ष 2030 तक इन एफपीओ की संख्या बढ़ाकर चार हजार करने की योजना है। खास बात यह कि पुरुष व महिला किसान मिलकर कृ षि आधारित 100 से अधिक स्टार्टअप भी चला रहे हैं और इनके माध्यम से अपनी आय बढ़ा रहे हैं।
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मध्य प्रदेश स्थित सिहोर जिले के गांव भाऊखेड़ी में किसान अपनी एक कंपनी गठित कर व्यावसायिक तरीके से खेती कर रहे हैं। किसानों की इस कंपनी में 10 निदेशक और 300 किसान सदस्य हैं। निदेशक गुलाब वर्मा ने बताया कि 20 जुलाई 2022 को किसानों ने आईटीसी की मदद से यह कंपनी गठित की थी और अब तक वे 43 हजार क्विंटल से अधिक फसलें एमएसपी से अधिक दाम पर बेच चुके हैं। मृदा जांच, बैंक लोन, खाद व दवा संबंधी कई सुविधाएं किसानों को यहीं उपलब्ध हो जाती हैं और किसान अपनी फसलों को इसी कंपनी के माध्यम से एमएसपी से अधिक दाम पर बेचते हैं।
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आत्मनिर्भर महिला फार्मर प्रोड्यूसर कंपनी लिमिटेड, गांव इच्छावर की निदेशक संगीता मालवीय और चंद्रकला ने बताया कि उनकी कंपनी महिला किसानों को समृद्ध करने में काम कर रही है। 35 गांवों में 2000 महिला किसान कंपनी में सदस्य हैं, जिनके पास 4385 एकड़ जमीन है। महिलाएं उनके कलेक्शन सेंटर पर फसलें लाती हैं और वहीं से उन्हें नकद भुगतान कर दिया जाता है। वर्ष 2021 में शुरू की गई महिलाओं की इस कंपनी का अब तक टर्नओवर 5.51 करोड़ है। भऊखेड़ी गांव के वृद्ध किसान गंगा प्रसाद व माताजन वर्मा कहते हैं कि किसानी के इस नए तरीके में बहुत अंतर और फायदा है। हमने वह दाैर देखा है जब  फसलों को बचाना और बेचना कड़ी चुनाैती थी, कुछ हद तक आज भी है मगर इस नए माॅडल के जरिये किसान पहले से ज्यादा समृद्ध बन रहे हैं।

मोदी कर चुके तारीफ, 1200 महिला किसान लखपति बनीं

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विशेषज्ञ सचिन शर्मा और महिला किसान चंद्रकला - फोटो : संवाद

इच्छावर गांव में महिला किसानों की ओर से गठित कंपनी की तारीफ देश के प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी कर चुके हैं। 25 अगस्त को महाराष्ट्र के जलगांव में आयोजित लखपति दीदी सम्मेलन में इसी कंपनी की निदेशक संगीता मालवीय प्रधानमंत्री से रूबरू हुई थीं। संगीता ने बताया कि इस दाैरान प्रधानमंत्री ने उनसे कंपनी के संचालन के बारे में विस्तार से जानकारी हासिल की थी। वह बताती हैं कि प्रधानमंत्री ने  उनसे पूछा था कि उनकी कंपनी से कितनी महिला किसानों को फायदा हुआ। तब मैंने उन्हें बताया कि अभी तक 2000 किसान दीदियां उनकी कंपनी से जुड़ चुकी हैं और उनमें से 1200 दीदियां लखपति की श्रेणी में आ चुकी हैं। पीएम यह सुनकर बहुत खुश और हैरान हुए।

अब क्लाइमेट स्मार्ट खेती जरूरी

जलवायु परिवर्तन इस वक्त किसानों और कृषि विज्ञानियों के लिए बहुत बड़ी चुनाैती बन चुका है। इसी के चलते आईटीसी के विशेषज्ञों की टीम यहां किसानों को क्लाइमेट स्मार्ट खेती की ओर प्रोत्साहित कर रही है। मध्य प्रदेश में बड़ी संख्या में किसान इस तरह की खेती कर रहे हैं। यहां सूखा, मूसलाधार बारिश, उसके बाद कई दिनों तक जलभराव व अत्यधिक गर्मी यह जलवायु जोखिम की श्रेणी में आता है। इसके लिए अंकुर रोपण, फसलों के उठाए गए बिस्तर रोपण, शून्य जुताई, वैकल्पिक गीला और सुखाने, मल्चिंग और ब्रॉड बेड फरो इत्यादि तरीकों से खेती करवा इस जोखिम को कम करने का प्रयास किया जा रहा है।

नरसिंह खेड़ा गांव के किसान विष्णु शर्मा बताते हैं कि वे 4.5 एकड़ जमीन पर क्लाइमेट स्मार्ट खेती ही करते हैं। इसमें वह ब्रॉड बेड फरो तकनीक से गेहूं व सोयाबीन लगाते हैं। सीजन में पालक, मैथी, धनिया, साैंफ व लहसुन की फसल से हर साल अच्छी कमाई करते हैं। साथ ही आंवला, आम और अमरूद की भी अच्छी फसल ले रहे हैं। इसी गांव के किसान सवाई सिंह व संतोष वर्मा भी 300 किसान सदस्यों की कंपनी चलाते हैं आैर खास बात यह कि सभी करीब 1200 एकड़ में आईटीसी के विशेषज्ञों की निगरानी में क्लाइमेट स्मार्ट खेती ही कर रहे हैं।

अधिकारी के अनुसार

आईटीसी मार्स एक अग्रणी ‘फिजिटल’ पहल है, जिसमें एफपीओ एक धुरी के रूप में है। किसान अब एक व्यावसायिक ढंग से खेती करें, फसल विविधिकरण व क्लाइमेट स्मार्ट खेती की ओर बढ़ें, बाजार मूल्यों पर उनकी फसलें बिकें और उनकी कमाई में वृदि्ध हो। इसके लिए किसानों को जागरूक बनाने से लेकर उन्हें हर स्तर पर अपग्रेड करने का भरसक प्रयास किया जाता है। एपीओ माॅडल किसानों को समृद्ध बनाने का सशक्त माध्यम है। -एस. गणेश कुमार, सीईओ,  एग्री बिजनैस डिवीजन, आईटीसी।

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