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जाटों ने धरना प्रदर्शन से दूर रह कर सौंपा ज्ञापन, दिया अल्टीमेटम
jhajjar
Updated Tue, 15 Mar 2016 01:51 AM IST
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प्रशासनिक अधिकारियों को अल्टीमेटम देता जाट नेता
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आरक्षण व अन्य मांगों को लेकर जाट समाज ने सोमवार को एक बार फिर से हुंकार भरी। जाट समाज के प्रतिनिधिमंडल ने मुख्यमंत्री के नाम दो अलग अलग ज्ञापन स्थानीय अधिकारियों को सौंपे। जाटों का इरादा शहर में धरने व प्रदर्शन का था, लेकिन प्रशासनिक अधिकारियों ने उनको मना कर लघु सचिवालय से परे ही रोक लिया। सेक्टर -6 में डीसी अनीता यादव और चौधरी छोटूराम धर्मशाला में एकत्रित जाटों से ज्ञापन लेने के लिए सीटीएम संजय राय व एसपी जशनदीप सिंह पहुंचे। सात सुत्री ज्ञापन में जाट समाज ने चेताया कि उनकी मांगों पर अगले 72 घंटे में कार्रवाई नहीं हुई तो 18 मार्च को फिर से जाट आंदोलन का बिगुल बजा दिया जाएगा।
जाट समाज की ओर से ज्ञापन देने के कार्यक्रम को देखते हुए प्रशासन पूरी तरह से अलर्ट रहा। सुबह ही शहर में आने वाले प्रमुख मार्गों पर नाके लगा दिए गए थे। इस बीच अधिकारी भी इस प्रयास में रहे कि जिलार मुख्यालय पर ज्यादा संख्या में जाट न जुटें। ज्ञापन देने के लिए जाट समाज के नेता दो गुटों में शहर पहुंचे। एक गुट जहां अहलावत खाप के प्रधान जयसिंह अहलावत की अध्यक्षता में छोटूराम धर्मशाला में बैठक के लिए एकत्रित हुआ। वहीं दूसरा गुट कादियान खाप के प्रधान केदार सिंह के नेतृत्व में लघु सचिवालय पहुंचा। यहां पहले से अलर्ट डीएसपी राजीव ने उनको गेट पर ही रोक लिया। बाद में उनको सेक्टर-6 में भेजा गया।
कुछ देर बाद डीसी अनीता यादव सेक्टर-6 पहुंची और ज्ञापन लिया। हालांकि छोटूराम धर्मशाला में जमे जाट नेता भी डीसी को ज्ञापन देने पर अड़े थे। प्रशासनिक अधिकारियों ने उनको बताया कि डीसी जांच कमेटी के अध्यक्ष प्रकाश सिंह के साथ मीटिंग मे हैं। इसके बाद उनकी मांग पर एसपी ने धर्मशाला पहुंच कर ज्ञापन लिया। ज्ञापन कार्यक्रम शांतिपूर्ण ढंग से निपट जाने पर प्रशासन व पुलिस ने राहत की सांस ली।
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एसपी को सौंपी सीडी
छोटूराम धर्मशाला में ज्ञापन लेने आए एसपी जशनदीप सिंह को एक सीडी सौंपी। इसमें पुलिस व प्रशासन के ही कुछ अधिकारी दिल्ली गेट स्थित जाट चौपाल को आग के हवाले करा रहे हैं। जाटों ने मांग की कि इस प्रकार के अधिकारियों के खिलाफ कड़ी कार्रवाई की जाए।
ज्ञापन में ये उठाई मांग
-एसबीसी की जगह जाटों को आरक्षण के लिए ओबीसी में शामिल किया जाए।
-आंदोलन में मृतक लोगों के परिजनों को 50 लाख रुपये मुआवजा, एक सदस्य को सरकारी नौकरी दी जाए।
-जिन अधिकारियों ने गोली चलवाई उन पर सख्त कार्रवाई हो।
-निर्दोष युवकों की गिरफ्तारी पर तुरंत रोक लगे।
-सांसद राजकुमार सेनी पर उचित कानूनी कार्रवाई की जाए।
-प्रदेश सरकार पर विश्वास नहीं, इसलिए केंद्र के मंत्रिमंडल की समिति जांच के लिए बने।
-जाट आंदोलन के दौरान दर्ज हुए सभी मुकदमों को वापस लिया जाए।
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जाट समाज की ओर से ज्ञापन देने के कार्यक्रम को देखते हुए प्रशासन पूरी तरह से अलर्ट रहा। सुबह ही शहर में आने वाले प्रमुख मार्गों पर नाके लगा दिए गए थे। इस बीच अधिकारी भी इस प्रयास में रहे कि जिलार मुख्यालय पर ज्यादा संख्या में जाट न जुटें। ज्ञापन देने के लिए जाट समाज के नेता दो गुटों में शहर पहुंचे। एक गुट जहां अहलावत खाप के प्रधान जयसिंह अहलावत की अध्यक्षता में छोटूराम धर्मशाला में बैठक के लिए एकत्रित हुआ। वहीं दूसरा गुट कादियान खाप के प्रधान केदार सिंह के नेतृत्व में लघु सचिवालय पहुंचा। यहां पहले से अलर्ट डीएसपी राजीव ने उनको गेट पर ही रोक लिया। बाद में उनको सेक्टर-6 में भेजा गया।
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कुछ देर बाद डीसी अनीता यादव सेक्टर-6 पहुंची और ज्ञापन लिया। हालांकि छोटूराम धर्मशाला में जमे जाट नेता भी डीसी को ज्ञापन देने पर अड़े थे। प्रशासनिक अधिकारियों ने उनको बताया कि डीसी जांच कमेटी के अध्यक्ष प्रकाश सिंह के साथ मीटिंग मे हैं। इसके बाद उनकी मांग पर एसपी ने धर्मशाला पहुंच कर ज्ञापन लिया। ज्ञापन कार्यक्रम शांतिपूर्ण ढंग से निपट जाने पर प्रशासन व पुलिस ने राहत की सांस ली।
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एसपी को सौंपी सीडी
छोटूराम धर्मशाला में ज्ञापन लेने आए एसपी जशनदीप सिंह को एक सीडी सौंपी। इसमें पुलिस व प्रशासन के ही कुछ अधिकारी दिल्ली गेट स्थित जाट चौपाल को आग के हवाले करा रहे हैं। जाटों ने मांग की कि इस प्रकार के अधिकारियों के खिलाफ कड़ी कार्रवाई की जाए।
ज्ञापन में ये उठाई मांग
-एसबीसी की जगह जाटों को आरक्षण के लिए ओबीसी में शामिल किया जाए।
-आंदोलन में मृतक लोगों के परिजनों को 50 लाख रुपये मुआवजा, एक सदस्य को सरकारी नौकरी दी जाए।
-जिन अधिकारियों ने गोली चलवाई उन पर सख्त कार्रवाई हो।
-निर्दोष युवकों की गिरफ्तारी पर तुरंत रोक लगे।
-सांसद राजकुमार सेनी पर उचित कानूनी कार्रवाई की जाए।
-प्रदेश सरकार पर विश्वास नहीं, इसलिए केंद्र के मंत्रिमंडल की समिति जांच के लिए बने।
-जाट आंदोलन के दौरान दर्ज हुए सभी मुकदमों को वापस लिया जाए।