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साहब! डीसी, एसपी, थाना प्रभारी ने ही शहर को जलवाया
jhajjar
Updated Tue, 15 Mar 2016 01:43 AM IST
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मीटिंग करते पीड़ित
- फोटो : rohtak desk
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बैंक में फंसे सुरक्षा गार्ड हवा सिंह को हम गांव के लोगों ने मौत के मुंह से निकाला। एसपी से मदद मांगी थी, तो उन्होंने तो कह दिया कि उसकी तो मौत हो चुकी है। जब जिंदा निकाल लाए तो थाना प्रभारी ने उनके घर आकर धमकी दी कि सभी को ये बोलना कि बैंक से उनको पुलिस ने सुरक्षित निकाला है।
गांव खेड़ी के ग्रामीणों ने यह सब प्रकाश सिंह जांच कमेटी के आगे बोला। विभिन्न ग्रुपों में जांच कमेटी के सामने पेश हुए सैकड़ों लोगों ने यही कहा कि डीसी, एसपी, थाना प्रभारी, एडीसी, एसडीएम ने ही शहर को जलवाया। शहर को जलाने वाले 30 से 50 युवक ही थे। जब बैंक के एक सुरक्षा गार्ड ने 135 करोड़ रुपये लुटने से बचा लिए तो फिर 250-300 की संख्या में होते हुए भी पुलिस व सीआरपीएफ इन पर कंट्रोल क्यों नहीं कर पायी। हरियाणा के लोग तो वैसे ही पुलिस से बहुत डरते हैं।
प्रकाश सिंह जांच कमेटी के सदस्य, पूर्व डीजीपी प्रकाश सिंह भी थे, सोमवार को हिंसा का जायजा लेने शहर में आए थे।
सुबह उन्होंने छावनी मोहल्ला, बस स्टैंड क्षेत्र, चौधरी छोटूराम धर्मशाला आदि स्थानों पर जाकर मुआयना किया। हर घटना के प्रकार, कैसे हुई आदि के बारे में जानकारी जुटाई। बाद में वे संवाद भवन में लोगों की शिकायतें सुनने के लिए बैठे तो उनके सामने पेश हुए लोगों ने प्रशासन पर जमकर हमला बोला। हालांकि इस दौरान उनके सामने पेश हुए ग्रुपों में से चार ऐसे भी रहे, जोकि प्रशासन के बचाव में थे।
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डीसी, एसपी को किया सदन से बाहर
प्रकाश सिंह अपने अन्य कमेटी सदस्यों के साथ यहां हिंसा के दौरान प्रशासनिक अधिकारियों की भूमिका पर लोगों से बात करने पहुंचे थे। पहले उन्होंने मौका देखा, फिर अधिकारियों की बैठक ली और इसके बाद संवाद भवन में आमजन से रूबरू होने पहुंचे। डीसी अनीता यादव, एसपी जशनदीप सिंह, एसडीएम व अन्य पुलिस अधिकारी उनके साथ पहुंचे।
इससे पहले कि अधिकारी अपनी जगह लेते उनको कमेटी ने बाहर जाने का फरमान सुना दिया। वहां से स्थानीय प्रशासनिक अधिकारियों, पुलिस अधिकारियों व मीडिया को भी बाहर जाने को बोला गया। बंद हाल में कमेटी सदस्यों ने लोगों के विभिन्न ग्रुपों से पुलिस प्रशासन के प्रति शिकायतें सुनीं।
कमेटी के सामने हो गई तनातनी
प्रकाश सिंह ने अभी प्रशासनिक अधिकारियों की भूमिका पर लोगों से शिकायतें सुननी शुरू ही की थी कि पहला मामला ही स्टेट बैंक ऑफ पटियाला के गार्ड हवा सिंह का उठा। इस दौरान मंच के सामने दो अलग अलग ग्रुपों में व्यक्ति खड़े थे। एक पक्ष जब कमेटी के सामने अपनी बात कह रहा था तो उनकी एक बात दूसरे पक्ष को नागवार लगी, इस पर उन्होंने बीच में ही टोक दिया।
कमेटी के सामने ही दोनों पक्षों में तनातनी हुई तो कमेटी सदस्यों को अपनी सीटों से उठ कर उनको शांत करने के लिए आगे आना पड़ा। प्रकाश सिंह ने कहा कि आपको भी बोलने का मौका दिया जाएगा। बात एक दूसरे की काटे नहीं। आईजी संजय सिंह व पुलिस के अन्य अधिकारी भी लोगों को शांत करने पहुंचे।
प्रशासन पूरी तरह रहा फेल
संवाद सदन में प्रकाश सिंह कमेटी के सामने विभिन्न 17 ग्रुपों में आए व्यक्तियों ने अपनी बातें रखीं। इनमें अधिकतर प्रशासन के खिलाफ थी, तो चार ग्रुप प्रशासन के बचाव में भी उतरे। कुछ ऐसे लोग भी थे जो कि प्रशासन की भूमिका की शिकायत की बजाय अपनी मुआवजे व पुलिस द्वारा की गई गिरफ्तारी की शिकायत लेकर पहुंचे थे। वकीलों से लेकर आमजन तक ने यही कहा कि आरक्षण की आग को रोकने में प्रशासन टोटली फेल रहा। डीसी, एसपी, एडीसी, एसडीएम, डीएसपी, थाना प्रभारी, चौकी प्रभारी तक को जिम्मेदार बताया गया।
...एसपी कटघरे में, साथ आई बचाव की दलील
प्रकाश सिंह कमेटी के सामने पेश हुए गांव खेड़ी के ग्रामीणों ने कहा कि 20 फरवरी की साम उनके गांव का हवा सिंह स्टेट बैंक ऑफ पटियाला में सिक्योरिटी पर था। लोगों ने बैंक को लुटने का प्रयास किया। गार्ड ने बैंक के 135 करोड़ बचाने के लिए जान की बाजी लगा दी। लोगों ने बैंक को आग लगा दी, वह अंदर फंस गया। ग्रामीणों ने एसपी से उसे बाहर निकालने के लिए मदद मांगी तो एसपी ने उनको बताया कि गार्ड मर चुका है।
इसके बाद ग्रामीण खुद बैंक पहुंचे और उपद्रवियों को खदेड़ते हुए हवा सिंह को जिंदा बाहर निकाला। इसी के साथ ही कुछ लोग एसपी के बचाव में उतर आए। उन्होंने बयान दर्ज कराए कि एसपी साहब मौके पर पहुंचे। बाहर एक शव पड़ा था, उसे ही गार्ड का शव समझ कर ग्रामीणों को सुचना दी गई थी। यह बाद में पता चला कि युवक की मौत गार्ड द्वारा चलाई गई गोली से हुई है।
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गांव खेड़ी के ग्रामीणों ने यह सब प्रकाश सिंह जांच कमेटी के आगे बोला। विभिन्न ग्रुपों में जांच कमेटी के सामने पेश हुए सैकड़ों लोगों ने यही कहा कि डीसी, एसपी, थाना प्रभारी, एडीसी, एसडीएम ने ही शहर को जलवाया। शहर को जलाने वाले 30 से 50 युवक ही थे। जब बैंक के एक सुरक्षा गार्ड ने 135 करोड़ रुपये लुटने से बचा लिए तो फिर 250-300 की संख्या में होते हुए भी पुलिस व सीआरपीएफ इन पर कंट्रोल क्यों नहीं कर पायी। हरियाणा के लोग तो वैसे ही पुलिस से बहुत डरते हैं।
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प्रकाश सिंह जांच कमेटी के सदस्य, पूर्व डीजीपी प्रकाश सिंह भी थे, सोमवार को हिंसा का जायजा लेने शहर में आए थे।
सुबह उन्होंने छावनी मोहल्ला, बस स्टैंड क्षेत्र, चौधरी छोटूराम धर्मशाला आदि स्थानों पर जाकर मुआयना किया। हर घटना के प्रकार, कैसे हुई आदि के बारे में जानकारी जुटाई। बाद में वे संवाद भवन में लोगों की शिकायतें सुनने के लिए बैठे तो उनके सामने पेश हुए लोगों ने प्रशासन पर जमकर हमला बोला। हालांकि इस दौरान उनके सामने पेश हुए ग्रुपों में से चार ऐसे भी रहे, जोकि प्रशासन के बचाव में थे।
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डीसी, एसपी को किया सदन से बाहर
प्रकाश सिंह अपने अन्य कमेटी सदस्यों के साथ यहां हिंसा के दौरान प्रशासनिक अधिकारियों की भूमिका पर लोगों से बात करने पहुंचे थे। पहले उन्होंने मौका देखा, फिर अधिकारियों की बैठक ली और इसके बाद संवाद भवन में आमजन से रूबरू होने पहुंचे। डीसी अनीता यादव, एसपी जशनदीप सिंह, एसडीएम व अन्य पुलिस अधिकारी उनके साथ पहुंचे।
इससे पहले कि अधिकारी अपनी जगह लेते उनको कमेटी ने बाहर जाने का फरमान सुना दिया। वहां से स्थानीय प्रशासनिक अधिकारियों, पुलिस अधिकारियों व मीडिया को भी बाहर जाने को बोला गया। बंद हाल में कमेटी सदस्यों ने लोगों के विभिन्न ग्रुपों से पुलिस प्रशासन के प्रति शिकायतें सुनीं।
कमेटी के सामने हो गई तनातनी
प्रकाश सिंह ने अभी प्रशासनिक अधिकारियों की भूमिका पर लोगों से शिकायतें सुननी शुरू ही की थी कि पहला मामला ही स्टेट बैंक ऑफ पटियाला के गार्ड हवा सिंह का उठा। इस दौरान मंच के सामने दो अलग अलग ग्रुपों में व्यक्ति खड़े थे। एक पक्ष जब कमेटी के सामने अपनी बात कह रहा था तो उनकी एक बात दूसरे पक्ष को नागवार लगी, इस पर उन्होंने बीच में ही टोक दिया।
कमेटी के सामने ही दोनों पक्षों में तनातनी हुई तो कमेटी सदस्यों को अपनी सीटों से उठ कर उनको शांत करने के लिए आगे आना पड़ा। प्रकाश सिंह ने कहा कि आपको भी बोलने का मौका दिया जाएगा। बात एक दूसरे की काटे नहीं। आईजी संजय सिंह व पुलिस के अन्य अधिकारी भी लोगों को शांत करने पहुंचे।
प्रशासन पूरी तरह रहा फेल
संवाद सदन में प्रकाश सिंह कमेटी के सामने विभिन्न 17 ग्रुपों में आए व्यक्तियों ने अपनी बातें रखीं। इनमें अधिकतर प्रशासन के खिलाफ थी, तो चार ग्रुप प्रशासन के बचाव में भी उतरे। कुछ ऐसे लोग भी थे जो कि प्रशासन की भूमिका की शिकायत की बजाय अपनी मुआवजे व पुलिस द्वारा की गई गिरफ्तारी की शिकायत लेकर पहुंचे थे। वकीलों से लेकर आमजन तक ने यही कहा कि आरक्षण की आग को रोकने में प्रशासन टोटली फेल रहा। डीसी, एसपी, एडीसी, एसडीएम, डीएसपी, थाना प्रभारी, चौकी प्रभारी तक को जिम्मेदार बताया गया।
...एसपी कटघरे में, साथ आई बचाव की दलील
प्रकाश सिंह कमेटी के सामने पेश हुए गांव खेड़ी के ग्रामीणों ने कहा कि 20 फरवरी की साम उनके गांव का हवा सिंह स्टेट बैंक ऑफ पटियाला में सिक्योरिटी पर था। लोगों ने बैंक को लुटने का प्रयास किया। गार्ड ने बैंक के 135 करोड़ बचाने के लिए जान की बाजी लगा दी। लोगों ने बैंक को आग लगा दी, वह अंदर फंस गया। ग्रामीणों ने एसपी से उसे बाहर निकालने के लिए मदद मांगी तो एसपी ने उनको बताया कि गार्ड मर चुका है।
इसके बाद ग्रामीण खुद बैंक पहुंचे और उपद्रवियों को खदेड़ते हुए हवा सिंह को जिंदा बाहर निकाला। इसी के साथ ही कुछ लोग एसपी के बचाव में उतर आए। उन्होंने बयान दर्ज कराए कि एसपी साहब मौके पर पहुंचे। बाहर एक शव पड़ा था, उसे ही गार्ड का शव समझ कर ग्रामीणों को सुचना दी गई थी। यह बाद में पता चला कि युवक की मौत गार्ड द्वारा चलाई गई गोली से हुई है।