{"_id":"56e5bb3e4f1c1b70488b45de","slug":"nagar-nigam-narendra-modi-swaksh-bharat-mision-hisar","type":"story","status":"publish","title_hn":"आईएचएचएल के 300 फार्म गायब, घपले की आशंका","category":{"title":"City & states","title_hn":"शहर और राज्य","slug":"city-and-states"}}
आईएचएचएल के 300 फार्म गायब, घपले की आशंका
Hisar
Updated Mon, 14 Mar 2016 12:41 AM IST
विज्ञापन
नगर निगम
- फोटो : Bureau
खबरें लगातार पढ़ने के लिए अमर उजाला एप डाउनलोड करें
या
वेबसाइट पर पढ़ना जारी रखने के लिए वीडियो विज्ञापन देखें
अगर आपके पास प्रीमियम मेंबरशिप है तो
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के स्वच्छ भारत मिशन पर भी नगर निगम के अधिकारियों की कार्यशैली भारी पड़ रही है। स्वच्छ भारत मिशन अर्बन के तहत आईएचएचएल (इंडीविजुअल हाउस होल्ड लेटरिन) स्कीम में जिन लोगों ने निगम में एप्लीकेशन फार्म जमा करवाई थी उनमें से 300 से ज्यादा फार्म गायब हो चुके हैं।
इस तरह से करीब 42 लाख रुपये का गोलमाल करने की आशंका जताई जा रही है। एक एप्लीकेशन में लाभार्थी को 14 हजार रुपये दिये जाने हैं। निगम के पास शहर से हजारों की संख्या में एप्लीकेशन आई थी। मगर इनमें से सर्वे के बाद 2673 एप्लीकेशन को निगम अधिकारियों ने अप्रूवल दी थी।
अब 300 से ज्यादा गायब हुए फार्मों को निगम अधिकारियों द्वारा जैसे तैसे किसी भी तरीके से पूरा करने के निर्देश दिए गए हैं। सूत्रों का यहां तक दावा है कि अब निगम में कुछ दलाल व कर्मचारी मिलकर स्कीम के तहत मिलने वाली राशि में से आधी पेमेंट देने की एवज में लोगों से एप्लीकेशन जमा करवाने की जिम्मेवारी उठा रहे हैं। इतना ही नहीं निगम में ही कांट्रेक्ट बेस पर लगे एक कर्मचारी द्वारा फार्म पूरे करने की एवज में 500-500 रुपये लेकर नई एप्लीकेशन जमा करवाने की बात भी सामने आई है।
विज्ञापन
सीएसआई ने मांगा स्पष्टीकरण, एक्सईएन ने कहा जैसे भी हो पूरा करो
नगर निगम के ही एक कर्मचारी ने बताया है कि 300 से ज्यादा फार्म गायब होने के मामले पर निगम अधिकारी चुप्पी साधे हुए हैं। हेल्थ ब्रांच के सीएसआई ने तीन एएसआई और एक जमादार से लिखित में स्पष्टीकरण मांगा है।
उधर मामले को लेकर पिछले महीने में एक्सईएन रामजीलाल ने हेल्थ ब्रांच व टेक्निकल ब्रांच के अधिकारियों की मीटिंग ली। मीटिंग में एमई और जेई भी थे। बताया गया है कि मीटिंग में एक्सईएन ने किसी तरह भी फार्म पूरे करने की बात कही। ताकि मामला उच्च अधिकारियों की संज्ञान में न चला जाए।
यूं हुई गड़बड़
निगम अधिकारियों ने 2673 लोगों के घर बिना टायलेट के दिखाए। यानी 2673 घरों को टायलेट बनाने के लिए स्कीम के तहत स्वीकृत किया। एप्लीकेशन जमा करवाने वाले आधे से ज्यादा लोगों को अप्रूवल लेटर तक नहीं दिया गया। जिनको दिया भी गया उन पर डिस्पैच नंबर नहीं डाले।
इतना ही नहीं इनके बदले ली गई ऑफिस कॉपी पर रिसीविंग के साइन तक नहीं करवाए गए। यानी ऑन रिकॉर्ड किसी को यह तक पता नहीं लग सकता कि किस व्यक्ति ने एप्लीकेशन जमा करवाई थी। फिर किसी ने इन जमा फार्म में से 300 से ज्यादा फार्म गायब कर दिए।
यूं हुआ खुलासा
आईएचएच स्कीम के तहत निगम ने जो फार्म स्वीकृत माने उनके टायलेट के प्रति हाउस 14 हजार व सीवरेज कनेक्शन के 5 हजार रुपये के हिसाब से करीब दो करोड़ की पेमेंट निगम के पास आ गई। यह राशि 2673 आवेदकों के अगेंस्ट आ गई। चंडीगढ़ निदेशालय ने इनकी पेमेंट डालने के बाद आवेदकों का रिकॉर्ड सहित डाटा ऑनलाइन करने के आदेश कर दिए। तब तक मामला दबा रहा। जब ऑनलाइन करने की प्रक्रिया शुरू हुई तो केवल 2300 एप्लीकेशन ही कार्यालय में मिली। फिर गायब हुई एप्लीकेशन को लेकर निगम में हंगामा मचा।
यह है स्टेटस
नगर निगम में टॉयलेट के लिए आवेदन करने वाले 150 लोगों को पहली किस्त जारी कर दी है। मोदी के स्वच्छ भारत मिशन अर्बन के तहत चले इस अभियान में टॉयलेट के लिए 1 करोड़ 94 लाख की पेमेंट निगम के पास पहुंच चुकी है। पहली किस्त में केवल बिना सीवरेज कनेक्शन टॉयलेट वाले मकान मालिकों को ढाई हजार तथा जिनके यहां टॉयलेट ही नहीं उन्हें 7 हजार रुपये बैंक खाते के माध्यम से दिए जा रहे हैं।
हां अभी तक 2300 से थोड़ी ज्यादा एप्लीकेशन ऑनलाइन हो पाई हैं। यह जानकारी में नहीं की फार्म गायब हो गए हैं। हां यह जरूर है कुछ एप्लीकेशन सॉफ्टेवयर ले नहीं रहा। ये कैसे हो सकता है (हैरानी जताते हुए) फार्म गायब हुए हों। सोमवार को इस बारे में संबंधित ब्रांच से जानकारी लेंगे।
विज्ञापन
इस तरह से करीब 42 लाख रुपये का गोलमाल करने की आशंका जताई जा रही है। एक एप्लीकेशन में लाभार्थी को 14 हजार रुपये दिये जाने हैं। निगम के पास शहर से हजारों की संख्या में एप्लीकेशन आई थी। मगर इनमें से सर्वे के बाद 2673 एप्लीकेशन को निगम अधिकारियों ने अप्रूवल दी थी।
विज्ञापन
अब 300 से ज्यादा गायब हुए फार्मों को निगम अधिकारियों द्वारा जैसे तैसे किसी भी तरीके से पूरा करने के निर्देश दिए गए हैं। सूत्रों का यहां तक दावा है कि अब निगम में कुछ दलाल व कर्मचारी मिलकर स्कीम के तहत मिलने वाली राशि में से आधी पेमेंट देने की एवज में लोगों से एप्लीकेशन जमा करवाने की जिम्मेवारी उठा रहे हैं। इतना ही नहीं निगम में ही कांट्रेक्ट बेस पर लगे एक कर्मचारी द्वारा फार्म पूरे करने की एवज में 500-500 रुपये लेकर नई एप्लीकेशन जमा करवाने की बात भी सामने आई है।
विज्ञापन
सीएसआई ने मांगा स्पष्टीकरण, एक्सईएन ने कहा जैसे भी हो पूरा करो
नगर निगम के ही एक कर्मचारी ने बताया है कि 300 से ज्यादा फार्म गायब होने के मामले पर निगम अधिकारी चुप्पी साधे हुए हैं। हेल्थ ब्रांच के सीएसआई ने तीन एएसआई और एक जमादार से लिखित में स्पष्टीकरण मांगा है।
उधर मामले को लेकर पिछले महीने में एक्सईएन रामजीलाल ने हेल्थ ब्रांच व टेक्निकल ब्रांच के अधिकारियों की मीटिंग ली। मीटिंग में एमई और जेई भी थे। बताया गया है कि मीटिंग में एक्सईएन ने किसी तरह भी फार्म पूरे करने की बात कही। ताकि मामला उच्च अधिकारियों की संज्ञान में न चला जाए।
यूं हुई गड़बड़
निगम अधिकारियों ने 2673 लोगों के घर बिना टायलेट के दिखाए। यानी 2673 घरों को टायलेट बनाने के लिए स्कीम के तहत स्वीकृत किया। एप्लीकेशन जमा करवाने वाले आधे से ज्यादा लोगों को अप्रूवल लेटर तक नहीं दिया गया। जिनको दिया भी गया उन पर डिस्पैच नंबर नहीं डाले।
इतना ही नहीं इनके बदले ली गई ऑफिस कॉपी पर रिसीविंग के साइन तक नहीं करवाए गए। यानी ऑन रिकॉर्ड किसी को यह तक पता नहीं लग सकता कि किस व्यक्ति ने एप्लीकेशन जमा करवाई थी। फिर किसी ने इन जमा फार्म में से 300 से ज्यादा फार्म गायब कर दिए।
यूं हुआ खुलासा
आईएचएच स्कीम के तहत निगम ने जो फार्म स्वीकृत माने उनके टायलेट के प्रति हाउस 14 हजार व सीवरेज कनेक्शन के 5 हजार रुपये के हिसाब से करीब दो करोड़ की पेमेंट निगम के पास आ गई। यह राशि 2673 आवेदकों के अगेंस्ट आ गई। चंडीगढ़ निदेशालय ने इनकी पेमेंट डालने के बाद आवेदकों का रिकॉर्ड सहित डाटा ऑनलाइन करने के आदेश कर दिए। तब तक मामला दबा रहा। जब ऑनलाइन करने की प्रक्रिया शुरू हुई तो केवल 2300 एप्लीकेशन ही कार्यालय में मिली। फिर गायब हुई एप्लीकेशन को लेकर निगम में हंगामा मचा।
यह है स्टेटस
नगर निगम में टॉयलेट के लिए आवेदन करने वाले 150 लोगों को पहली किस्त जारी कर दी है। मोदी के स्वच्छ भारत मिशन अर्बन के तहत चले इस अभियान में टॉयलेट के लिए 1 करोड़ 94 लाख की पेमेंट निगम के पास पहुंच चुकी है। पहली किस्त में केवल बिना सीवरेज कनेक्शन टॉयलेट वाले मकान मालिकों को ढाई हजार तथा जिनके यहां टॉयलेट ही नहीं उन्हें 7 हजार रुपये बैंक खाते के माध्यम से दिए जा रहे हैं।
हां अभी तक 2300 से थोड़ी ज्यादा एप्लीकेशन ऑनलाइन हो पाई हैं। यह जानकारी में नहीं की फार्म गायब हो गए हैं। हां यह जरूर है कुछ एप्लीकेशन सॉफ्टेवयर ले नहीं रहा। ये कैसे हो सकता है (हैरानी जताते हुए) फार्म गायब हुए हों। सोमवार को इस बारे में संबंधित ब्रांच से जानकारी लेंगे।
- रामजीलाल, एक्सईएन नगर निगम