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सिटी में नहीं जुटे जाट, नारायणगढ़ में सौंपा ज्ञापन
ब्यूरो /अमर उजाला, अंबाला
Updated Tue, 15 Mar 2016 12:59 AM IST
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सिटी में नहीं जुटे जाट, नारायणगढ़ में सौंपा ज्ञापन
- फोटो : Amar ujala
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हरियाणा में जाट संगठनों ने सभी जिलों के जाट समुदाय के लोगों से आह्वान किया था कि सभी अपने-अपने जिलों में एकत्रित हों आौर जिला उपायुक्तों को पीएम मोदी के नाम अपना मांग पत्र सौंपे। सोमवार को जाट समुदाय की इस रणनीति को लेकर अंबाला का सीआईडी विभाग और पुलिस दोनों अलर्ट थे, लेकिन अंबाला में पुलिस प्रशासन की दबाव की रणनीति जाटों की रणनीति पर भारी पड़ गई।
लिहाजा जाट समुदाय के लोगों ने सिटी में एकजुट होने से परहेज किया, लेकिन जाट संगठनों के आह्वान के मद्देनजर अंबाला मुख्यालय से करीबन चालीस किलोमीटर दूर नारायणगढ़ कस्बे में कुछे जाट समुदाय के लोग एकत्रित हुए और उन्होंने बेहद शांतिपूर्ण तरीके से एसडीएम नारायणगढ़ को ज्ञापन सौंपा। इस दौरान पुलिस अफसर भी मौजूद रहे, लेकिन अंबाला सिटी और अंबाला कैंट के जाट समुदाय के लोग पुलिस दबाव के रणनीति के चलते सिटी में एकत्रित नहीं हुए।
जाटों की मांग, मंत्री, विधायक बंद करें बयानबाजी
जाट समुदाय के लोगों ने अपनी मांगों को लेकर एक ज्ञापन प्रधानमंत्री के नाम एसडीएम नारायणगढ़ को सौंपा। जाट धर्मशाला में सोमवार को अखिल भारतीय जाट आरक्षण संघर्ष समिति के बैनर तले हुई जाटों की बैठक के बाद यह ज्ञापन सौंपा गया। हालांकि एसडीएम ने स्वयं जाट धर्मशाला पहुंचकर यह ज्ञापन लिया है। प्रधानमंत्री के नाम भेजे गए इस ज्ञापन में समिति ने मांग की है कि 22 फरवरी को प्रदेश सरकार द्वारा स्वीकार की गई भी सभी मांगों पर अविलंब निर्णय लिया जाए। प्रदेश सरकार जाट बिरादरी के युवाओं और लोगों को झूठे मुकदमें को तत्काल प्रभाव से वापिस ले। सरकार के मंत्रियों, विधायकों व सांसदों द्वारा जाटों के खिलाफ किए जा रहे दुष्प्रचार को तुरन्त रोका जाए। आंदोलन के दौरान हुई हिंसा की जांच एक न्यायिक जांच आयोग के माध्यम से की जाए। जांच रिपोर्ट आने तक किसी भी जाट युवा के खिलाफ कोई कार्रवाई न की जाए तथा जहां आन्दोलन शांतिपूर्ण रहा उन जिलों में दर्ज मुकदमें तुरन्त वापस लिए जाएं।
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सिटी में जुटते तो हो सकती थी गिरफ्तार
अंबाला सिटी में जाट जुटेंगे और डीसी को ज्ञापन सौंपेंगे, इस बात की आशंका रविवार देररात तक लगाई जा रही थी। अंबाला की सीआईडी भी जाटों की रणनीति को भांपने में देररात तक लगी रही। लेकिन दूसरी ओर पुलिस प्रशासन अपनी रणनीति तैयार कर रही थी। पुलिस चाहती थी कि न तो जाट सिटी में एकत्रित हो और न ही माहौल तनावपूर्ण हो। इसके लिए पुलिस प्रशासन ने भी कूटनीति का इस्तेमाल किया। दरअसल, पुलिस ने अंबाला में जाट आंदोलन के दौरान हाइवे जाम करने के आरोप में 300 जाटों के खिलाफ के दर्ज कर रखा है। इसलिए पुलिस ने इस बात की भी तैयारी कर ली थी कि सिटी में यदि जाट फिर से एकत्रित होते हैं, उन्हे दर्ज किए गए पहले वाले केस में हिरासत में लिया जा सकता है। लेकिन पुलिस की ये रणनीति जाट समुदाय के नेता भांप चुके थे, इसलिए सिटी में न तो कोई जाट समुदाय के लोग एकत्रित हुए और न ही डीसी को किसी प्रकार का ज्ञापन सौंपा।
--- आंदोलन के दौरान पुलिस ने दो केसों में करीबन तीन सौ जाटों के तहत केस दर्ज किया हुआ है। एक जाट समुदाय के व्यक्ति ने पुलिस पर बंदूक तानकर फायरिंग भी की थी। इस मामले में पुलिस ने अभी तक एक ही जाट समुदाय के नेता को तो काबू कर लिया है, जबकि अन्य लोगों की तलाश अभी जारी है। कोई भी व्यक्ति यदि एकत्रित होकर बिना वजह माहौल खराब करने क कोशिश करेगा, पुलिस उसे जरूर हिरासत में लेगी। पुलिस अंबाला सिटी में किसी प्रकार से माहौल बिगड़ने नहीं देगी।
-हरजिंद्र सिंह खैरां, थाना प्रभारी सदर पुलिस, अंबाला सिटी-
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लिहाजा जाट समुदाय के लोगों ने सिटी में एकजुट होने से परहेज किया, लेकिन जाट संगठनों के आह्वान के मद्देनजर अंबाला मुख्यालय से करीबन चालीस किलोमीटर दूर नारायणगढ़ कस्बे में कुछे जाट समुदाय के लोग एकत्रित हुए और उन्होंने बेहद शांतिपूर्ण तरीके से एसडीएम नारायणगढ़ को ज्ञापन सौंपा। इस दौरान पुलिस अफसर भी मौजूद रहे, लेकिन अंबाला सिटी और अंबाला कैंट के जाट समुदाय के लोग पुलिस दबाव के रणनीति के चलते सिटी में एकत्रित नहीं हुए।
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जाटों की मांग, मंत्री, विधायक बंद करें बयानबाजी
जाट समुदाय के लोगों ने अपनी मांगों को लेकर एक ज्ञापन प्रधानमंत्री के नाम एसडीएम नारायणगढ़ को सौंपा। जाट धर्मशाला में सोमवार को अखिल भारतीय जाट आरक्षण संघर्ष समिति के बैनर तले हुई जाटों की बैठक के बाद यह ज्ञापन सौंपा गया। हालांकि एसडीएम ने स्वयं जाट धर्मशाला पहुंचकर यह ज्ञापन लिया है। प्रधानमंत्री के नाम भेजे गए इस ज्ञापन में समिति ने मांग की है कि 22 फरवरी को प्रदेश सरकार द्वारा स्वीकार की गई भी सभी मांगों पर अविलंब निर्णय लिया जाए। प्रदेश सरकार जाट बिरादरी के युवाओं और लोगों को झूठे मुकदमें को तत्काल प्रभाव से वापिस ले। सरकार के मंत्रियों, विधायकों व सांसदों द्वारा जाटों के खिलाफ किए जा रहे दुष्प्रचार को तुरन्त रोका जाए। आंदोलन के दौरान हुई हिंसा की जांच एक न्यायिक जांच आयोग के माध्यम से की जाए। जांच रिपोर्ट आने तक किसी भी जाट युवा के खिलाफ कोई कार्रवाई न की जाए तथा जहां आन्दोलन शांतिपूर्ण रहा उन जिलों में दर्ज मुकदमें तुरन्त वापस लिए जाएं।
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सिटी में जुटते तो हो सकती थी गिरफ्तार
अंबाला सिटी में जाट जुटेंगे और डीसी को ज्ञापन सौंपेंगे, इस बात की आशंका रविवार देररात तक लगाई जा रही थी। अंबाला की सीआईडी भी जाटों की रणनीति को भांपने में देररात तक लगी रही। लेकिन दूसरी ओर पुलिस प्रशासन अपनी रणनीति तैयार कर रही थी। पुलिस चाहती थी कि न तो जाट सिटी में एकत्रित हो और न ही माहौल तनावपूर्ण हो। इसके लिए पुलिस प्रशासन ने भी कूटनीति का इस्तेमाल किया। दरअसल, पुलिस ने अंबाला में जाट आंदोलन के दौरान हाइवे जाम करने के आरोप में 300 जाटों के खिलाफ के दर्ज कर रखा है। इसलिए पुलिस ने इस बात की भी तैयारी कर ली थी कि सिटी में यदि जाट फिर से एकत्रित होते हैं, उन्हे दर्ज किए गए पहले वाले केस में हिरासत में लिया जा सकता है। लेकिन पुलिस की ये रणनीति जाट समुदाय के नेता भांप चुके थे, इसलिए सिटी में न तो कोई जाट समुदाय के लोग एकत्रित हुए और न ही डीसी को किसी प्रकार का ज्ञापन सौंपा।
--- आंदोलन के दौरान पुलिस ने दो केसों में करीबन तीन सौ जाटों के तहत केस दर्ज किया हुआ है। एक जाट समुदाय के व्यक्ति ने पुलिस पर बंदूक तानकर फायरिंग भी की थी। इस मामले में पुलिस ने अभी तक एक ही जाट समुदाय के नेता को तो काबू कर लिया है, जबकि अन्य लोगों की तलाश अभी जारी है। कोई भी व्यक्ति यदि एकत्रित होकर बिना वजह माहौल खराब करने क कोशिश करेगा, पुलिस उसे जरूर हिरासत में लेगी। पुलिस अंबाला सिटी में किसी प्रकार से माहौल बिगड़ने नहीं देगी।
-हरजिंद्र सिंह खैरां, थाना प्रभारी सदर पुलिस, अंबाला सिटी-