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Hindi News ›   Gen-Z ›   What Is "Effort Recession"? Why Is Gen Z Stepping Back from Going the Extra Mile at Work?

Work Culture: क्या है Effort Recession? क्यों Gen Z अब ऑफिस में एक्स्ट्रा एफर्ट से बना रहे दूरी

Mon, 13 Jul 2026 06:37 PM IST
रिया दुबे न्यूज डेस्क, अमर उजाला
न्यूज डेस्क, अमर उजाला Published by: रिया दुबे Updated Mon, 13 Jul 2026 06:37 PM IST
सार

आज की नई पीढ़ी कहती है कि नौकरी जरूरी है, लेकिन जिंदगी उससे भी ज्यादा जरूरी है। इसलिए वे तय समय तक ईमानदारी से काम करना चाहते हैं, लेकिन रोज देर रात तक काम करना, हर वीकेंड ऑफिस के लिए देना या हर समय ऑनलाइन रहना पसंद नहीं करते। यही बदलती सोच अब कंपनियों के लिए नई चुनौती बन गई है। आइए विस्तार से जानते हैं।

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What Is "Effort Recession"? Why Is Gen Z Stepping Back from Going the Extra Mile at Work?
gen Z - फोटो : Amar Ujala

विस्तार

अगर आपको लगता है कि जेन जी कर्मचारी पहले की पीढ़ियों की तरह ऑफिस के लिए Extra Efforts नहीं डालते या हर बार Extra जिम्मेदारी लेने से बचते हैं, तो ऐसा सिर्फ आपको नहीं लग रहा। कॉरपोरेट में इस बदलाव को अब एक नाम मिल गया है, 'Effort Recession'।

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इसका मतलब यह बिल्कुल नहीं है कि जेन जी काम नहीं करना चाहते। बल्कि नई पीढ़ी का कहना है 'काम करेंगे, लेकिन अपनी पूरी जिंदगी इसमें नहीं झोकेंगे। ग्रेट प्लेस टू वर्क इंडिया के अनुसार, आज कर्मचारी अपना काम पूरी ईमानदारी से कर रहे हैं, लेकिन बिना वजह अतिरिक्त काम करने की इच्छा पहले जैसी नहीं रही। इस बदलाव के पीछे सबसे बड़ी वजह मानी जा रहे हैं जेन जी।

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आखिर क्या है Effort Recession?

सीधी भाषा में समझें तो ऑफिस में जितना काम आपकी जिम्मेदारी है, उतना पूरी ईमानदारी से करना... लेकिन हर बार एक्सट्रा वर्क, एक्सट्रा घंटे और एक्सट्रा जिम्मेदारी लेने के लिए तैयार न होना ही Effort Recession है। यानी कर्मचारी अपना काम समय पर पूरा कर रहे हैं लेकिन हर बार देर रात तक रुकना नहीं चाहते। छुट्टी वाले दिन लैपटॉप खोलना जरूरी नहीं मानते। हर समस्या को अपनी जिम्मेदारी नहीं समझते। ऑफिस के साथ अपनी पर्सनल लाइफ को भी उतनी ही अहमियत देते हैं।

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What Is "Effort Recession"? Why Is Gen Z Stepping Back from Going the Extra Mile at Work?
जेन जी वर्कफोर्स - फोटो : Amar Ujala

रिपोर्ट में क्या सामने आया?

इस रिपोर्ट में 20 से ज्यादा इंडस्ट्री के 57 लाख (5.7 मिलियन) से अधिक कर्मचारियों का फीडबैक लिया गया। रिपोर्ट के मुताबिक 63% भारतीय कंपनियों का कहना है कि कर्मचारी अब पहले जैसी अतिरिक्त मेहनत नहीं करना चाहते। 2023 के मुकाबले Extra Effort में चार फिसदी की गिरावट दर्ज की गई है। यानी यह बदलाव धीरे-धीरे नहीं, बल्कि तेजी से बढ़ रहा है।

वर्कफोर्स में जेन जी की कितनी भागीदारी?

आज ऑफिस में सबसे बड़ा बदलाव नई पीढ़ी लेकर आई है। 2023 में भारतीय वर्कफोर्स में जेन जी की हिस्सेदारी 13% थी। अब यह बढ़कर 26% हो चुकी है। यानी अब हर चार कर्मचारियों में लगभग एक Gen Z है। उनकी सोच पहले की पीढ़ियों से काफी अलग है।

Gen Z आखिर चाहते क्या हैं?

पहले लोग अच्छी नौकरी और स्थायी सैलरी को सबसे बड़ी सफलता मानते थे। लेकिन Gen Z के लिए सिर्फ पैसा काफी नहीं है। उन्हें चाहिए वर्क-लाइफ बैलेंस, फ्लेक्सिबल वर्किंग, मीनिंगफुल वर्क, करियर ग्रोथ, रिस्पेक्ट, मेंटल पीस।  उनका मानना है कि ऑफिस जिंदगी का हिस्सा है, पूरी जिंदगी नहीं। 

इसलिए कम हो रहा है Extra Effort

Gen Z का कहना है:

  • अगर रोज देर रात तक काम करना पड़े...
  • अगर हर वीकेंड ऑफिस के लिए देना पड़े...
  • अगर हर समय ऑनलाइन रहना पड़े...
  • तो यह मेहनत नहीं, बल्कि Burnout है।

नई पीढ़ी Smart Work में भरोसा करती है, सिर्फ लंबे समय तक काम करने में नहीं।

What Is "Effort Recession"? Why Is Gen Z Stepping Back from Going the Extra Mile at Work?
Burnout - फोटो : Amar Ujala

कंपनियां भी उलझन में हैं

रिपोर्ट के मुताबिक लगभग हर दो में से एक सीएचआरओ मानता है कि उसे अभी तक समझ नहीं आया कि Gen Z को सबसे ज्यादा क्या मोटिवेट करता है। वहीं 58% से ज्यादा HR प्रमुख एक साथ दो बड़ी चुनौतियों का सामना कर रहे हैं;

1.Gen Z की उम्मीदों को समझना।
2.एआई के दौर के लिए कंपनी को तैयार करना।

एआई ने भी बढ़ाया दबाव

आज लगभग हर कंपनी AI अपना रही है। उम्मीद थी कि इससे कर्मचारियों का काम आसान होगा। लेकिन कई जगह उल्टा हो रहा है। एआई की वजह से काम पहले से ज्यादा तेजी से पूरा करने की उम्मीद बढ़ गई, डेडलाइन छोटी हो गई, कर्मचारियों पर ज्यादा काम का दबाव आने लगा। रिपोर्ट के मुताबिक हर पांच में से दो CHRO मानते हैं कि अलग-अलग टीमों में एआई को लागू करना उनकी सबसे बड़ी चुनौती है। वहीं सिर्फ हर चार में से एक कंपनी ही AI की सफलता को रेवेन्यू या कस्टमर इम्पैक्ट जैसे असली बिजनेस नतीजों से माप रही है।

Free Pizza नहीं, अच्छा Leader चाहिए

रिपोर्ट का सबसे बड़ी बात यह निकल कर आई कि कर्मचारियों को सिर्फ अच्छी सैलरी या ऑफिस की सुविधाएं खुश नहीं रख सकतीं। उन्हें ऐसे लीडर चाहिए जो उनकी बात सुनें, उन पर भरोसा करें, उन्हें आगे बढ़ने का मौका दें, काम का उद्देश्य समझाएं। जहां कर्मचारियों का अपने नेताओं पर भरोसा ज्यादा होता है, वहां प्रोडक्टिविटी 47% ज्यादा, एजिलिटी  56% बेहतर, इनोवेशन 34% अधिक, कस्टमर एप्रिसिएशन 52% ज्यादा देखी गई।

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