पेंशन नहीं, खुद पर भरोसा: 20 की उम्र में रिटायरमेंट की प्लानिंग; Gen Z क्यों बदल रहे निवेश के नियम?
Gen Z अब रिटायरमेंट की तैयारी 20–25 साल की उम्र से ही शुरू कर रहे हैं। वे पेंशन की बजाय गोल्ड, शेयर और क्रिप्टो जैसे निवेशों को प्राथमिकता दे रहे हैं। आर्थिक संकट, महंगाई और बदलते रोजगार ने उनका भरोसा पारंपरिक पेंशन से हटाया है।
विस्तार
क्या 20–25 साल की उम्र में रिटायरमेंट के बारे में सोचना चाहिए? अगर आपको लगता है कि ये सिर्फ 50–60 साल के लोगों की चिंता है, तो शायद आप Gen Z के सोचने के तरीके से पूरी तरह वाकिफ नहीं हैं। Gen Z सिर्फ कमाने और घूमने की नहीं बल्कि अपने भविष्य के लिए अभी से पैसे बचाने की भी प्लानिंग कर रहे हैं।
पिछले साल आई एक रिसर्च के मुताबिक, Gen Z रिटायरमेंट के लिए पहले की पीढ़ियों से कहीं पहले और ज्यादा पैसे बचा रहे हैं। उनकी रिटायरमेंट सेविंग्स में उतना पैसा है, जितना Gen X के पास उसी उम्र में महंगाई के हिसाब से भी नहीं था।
एक दूसरी स्टडी में भी सामने आया कि कई Gen Z अपनी कमाई का करीब 20% हिस्सा भविष्य और रिटायरमेंट के लिए बचा रहे हैं। यानी आज के Gen Z सिर्फ आज के लिए नहीं, बल्कि आने वाले कल के लिए भी तैयारी कर रहे हैं।
नई रिपोर्ट बताती है कि Gen Z की निवेश करने की आदतें तेजी से बदल रही हैं। अब यह पीढ़ी सिर्फ पारंपरिक पेंशन योजनाओं पर निर्भर नहीं रहना चाहती, बल्कि अपने निवेश पर खुद ज्यादा नियंत्रण रखना चाहती है।
- सोने (Gold) में निवेश 50% बढ़ा है।
- शेयर बाजार में निवेश 35% बढ़ा है।
- क्रिप्टोकरेंसी में निवेश 15% बढ़ा है।
44% बेबी बूमर्स और 18% मिलेनियल्स आज भी पेंशन को अपनी पहली पसंद मानते हैं।
दिलचस्प बात यह है कि इसका मतलब यह नहीं है कि Gen Z बचत नहीं करना चाहते। बल्कि रिपोर्ट बताती है कि जिन युवाओं के पास बिल्कुल भी बचत नहीं थी, उनकी संख्या 26% घट गई है। यानी पहले के मुकाबले ज्यादा युवा अब किसी न किसी रूप में निवेश और बचत कर रहे हैं।
रिसर्च फर्म GWI के चीफ इनसाइट ऑफिसर जेसन मैंडर के मुताबिक, Gen Z भविष्य के लिए बचत करने से पीछे नहीं हट रही है। फर्क सिर्फ इतना है कि यह पीढ़ी अपने पैसों पर खुद नियंत्रण रखना चाहती है। जहां पहले की पीढ़ियां पेंशन फंड पर भरोसा करती थीं, वहीं आज के युवा ऐसे निवेश पसंद कर रहे हैं, जिन्हें वे अपनी जरूरत और फैसलों के हिसाब से कभी भी मैनेज कर सकें।
Gen Z को पेंशन सिस्टम पर भरोसा क्यों नहीं है?
Gen Z ने बचपन से ही एक के बाद एक आर्थिक संकट देखे हैं। पहले 2008 का ग्लोबल फाइनेंशियल क्राइसिस, फिर कोरोना महामारी और उसके बाद बढ़ती महंगाई। इन सबने इस पीढ़ी का भरोसा कम कर दिया है। यही वजह है कि आज कई Gen Z युवा बैंक या फाइनेंशियल एडवाइजर से ज्यादा सोशल मीडिया के फाइनेंस इन्फ्लुएंसर्स पर भरोसा करते हैं। एक रिपोर्ट के मुताबिक, 59% Gen Z ऐसे इन्फ्लुएंसर्स को फॉलो करते हैं, जबकि 77% उनकी सलाह पर भरोसा भी करते हैं।

Gen Z के लिए रिटायरमेंट पहले से ज्यादा मुश्किल क्यों?
Gen Z के सामने सबसे बड़ी चुनौती यह है कि उन्हें वह सुरक्षा नहीं मिलेगी, जो पहले की पीढ़ियों को पेंशन के रूप में मिलती थी। पहले कई सरकारी और बड़ी निजी कंपनियों में Defined Benefit (DB) Pension होती थी। इसमें कर्मचारी को रिटायरमेंट के बाद हर महीने कितनी पेंशन मिलेगी। यह पहले से तय होता था। यानी नौकरी के दौरान तनख्वाह और सेवा के वर्षों के आधार पर एक निश्चित रकम की गारंटी मिलती थी।
लेकिन अब हालात बदल चुके हैं। ऐसी पेंशन योजनाएं बहुत कम बची हैं और ज्यादातर सरकारी क्षेत्रों तक ही सीमित हैं, इसलिए Gen Z को इनका फायदा मिलने की संभावना काफी कम है।
Gen Z की रिटायरमेंट प्लानिंग पर क्या डाल रही हैं असर
Pensions policy institute की रिसर्च के अनुसार Gen Z के लिए सिर्फ नौकरी और बचत ही चुनौती नहीं है। महंगे घर, बढ़ता किराया और बदलती पारिवारिक जिम्मेदारियां भी उनके भविष्य की आर्थिक योजना को प्रभावित कर रही हैं।
1. घर खरीदना होता जा रहा है मुश्किल
आज प्रॉपर्टी की कीमतें और किराया लगातार बढ़ रहे हैं। ऐसे में कई Gen Z युवा चाहकर भी अपना घर नहीं खरीद पा रहे हैं। घर न होने का असर सिर्फ आज की जिंदगी पर नहीं, बल्कि रिटायरमेंट पर भी पड़ता है। जो लोग रिटायरमेंट के बाद भी किराए के घर में रहते हैं, उन्हें हर महीने किराया देना पड़ता है। इससे उनकी बचत जल्दी खत्म हो सकती है। वहीं, जो लोग अपना घर खरीद लेते हैं, उनके लिए रिटायरमेंट के बाद एक बड़ा खर्च कम हो जाता है।
2. परिवार की बदलती जिम्मेदारियां
Gen Z पहले की तुलना में देर से शादी कर रहे हैं या कई लोग शादी नहीं भी कर रहे हैं। इससे कुछ समय तक आर्थिक जिम्मेदारियां कम रहती हैं, लेकिन घर खरीदने और भविष्य की लंबी योजनाएं भी टलती रहती हैं। दूसरी ओर, कई युवाओं पर बच्चों की परवरिश या बुजुर्ग माता-पिता की देखभाल की जिम्मेदारी भी होती है। ऐसे में उनकी कमाई का बड़ा हिस्सा इन्हीं जरूरतों में खर्च हो जाता है और रिटायरमेंट के लिए बचत करना मुश्किल हो जाता है।

3. क्या विरासत से मिलेगी राहत?
कुछ लोगों को उम्मीद होती है कि भविष्य में माता-पिता या दादा-दादी की संपत्ति या बचत उन्हें मिलेगी, जिससे आर्थिक दबाव कम हो जाएगा। लेकिन विशेषज्ञ कहते हैं कि विरासत पर भरोसा करना सुरक्षित रणनीति नहीं है। क्योंकि किसी को नहीं पता कि विरासत मिलेगी या नहीं, कब मिलेगी और कितनी मिलेगी। इसलिए रिटायरमेंट की योजना सिर्फ इसी उम्मीद पर नहीं बनाई जा सकती।