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ब्यूटी कॉन्टेस्ट में नहीं होगा बिकिनी राउंड, फैशन की दुनिया में अब ऐसे तय होगी मॉडल्स की खूूबसूरती
बीबीसी
Updated Fri, 15 Jun 2018 08:50 AM IST
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मकसद तो खूबसूरती आंकना ही है, तो 'बिकिनी राउंड' पर इतनी असहजता क्यों?
अमरीका की सबसे खूबसूरत औरत चुनने की प्रतियोगिता, 'मिस अमरीका' में अब 'बिकिनी राउंड' नहीं होगा।आयोजकों ने कहा है कि अब हिस्सा लेने वाली मॉडल्स को शारीरिक खूबसूरती के पैमाने पर नहीं आंका जाएगा। प्रतियोगिता में भाग लेने वाली औरतें 'बिकिनी राउंड' में कपड़े के दो हिस्सों की बनी 'टू-पीस बिकिनी' पहनकर रैम्प पर चलती हैं और उस पर उन्हें आंका जाता है।
पिछले साल 'मिस अमरीका' के बोर्ड के पुरुष सदस्यों की कुछ ई-मेल्स लीक हो गई थीं। उनसे पता चला कि सदस्यों ने प्रतियोगिता में भाग लेने वाली मॉडल्स के बारे में भद्दी टिप्पणियां की थीं। इसके बाद उन्हें इस्तीफा देना पड़ा था। 'मिस अमरीका' के बोर्ड में अब सिर्फ औरतें हैं। बोर्ड की अध्यक्ष 1989 की विजेता ग्रेचन कार्लसन ने यह घोषणा करते हुए कहा कि अब प्रतियोगियों को सूझबूझ, पसंद और जुनून के आधार पर जांचा जाएगा।
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पिछले साल 'मिस अमरीका' के बोर्ड के पुरुष सदस्यों की कुछ ई-मेल्स लीक हो गई थीं। उनसे पता चला कि सदस्यों ने प्रतियोगिता में भाग लेने वाली मॉडल्स के बारे में भद्दी टिप्पणियां की थीं। इसके बाद उन्हें इस्तीफा देना पड़ा था। 'मिस अमरीका' के बोर्ड में अब सिर्फ औरतें हैं। बोर्ड की अध्यक्ष 1989 की विजेता ग्रेचन कार्लसन ने यह घोषणा करते हुए कहा कि अब प्रतियोगियों को सूझबूझ, पसंद और जुनून के आधार पर जांचा जाएगा।
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पर सौंदर्य प्रतियोगिताओं का मकसद तो खूबसूरती आंकना ही है, तो 'बिकिनी राउंड' पर इतनी असहजता क्यों? आखिर भारत में भी इसका तजुर्बा पुराना है। जब फेमिना पत्रिका ने 1964 में पहली 'मिस इंडिया' प्रतियोगिता आयोजित की तब भी 'स्विमसूट राउंड' था। फर्क इतना था कि तब 'स्विमसूट' टू-पीस की जगह एक कपड़े के हुआ करते थे और बदन को ज्यादा ढकते थे।
जब सुष्मिता सेन और ऐश्वर्या राय ने 1994 में ये प्रतियोगिता जीतीं तब भी भारत में 'स्विमसूट' का रूप नहीं बदला था। पर तब इतना ही काफी क्रांतिकारी था बल्कि सौंदर्य प्रतियोगिताओं को देखने की बड़ी वजह भी था। मॉडल्स को छोटे कपड़ों में ऐसे औपचारिक कार्यक्रम में देखना आज आम महसूस हो सकता है पर 1980-90 के दशकों में जब केबल टेलिविजन हमारे ड्राइंग रूम में दाखिल नहीं हुआ था, यह बहुत खास था।
जब सुष्मिता सेन और ऐश्वर्या राय ने 1994 में ये प्रतियोगिता जीतीं तब भी भारत में 'स्विमसूट' का रूप नहीं बदला था। पर तब इतना ही काफी क्रांतिकारी था बल्कि सौंदर्य प्रतियोगिताओं को देखने की बड़ी वजह भी था। मॉडल्स को छोटे कपड़ों में ऐसे औपचारिक कार्यक्रम में देखना आज आम महसूस हो सकता है पर 1980-90 के दशकों में जब केबल टेलिविजन हमारे ड्राइंग रूम में दाखिल नहीं हुआ था, यह बहुत खास था।
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लड़कों के लिए ही नहीं, लड़कियों के लिए ये एक ऐसी दुनिया की खिड़की थे जो आम तौर पर बंद रहती थी। समय के साथ बाजार ताकतवर होता गया। औरतों की खूबसूरती का पैमाना चेहरे से उनके शरीर के आकार तक जुड़ गया और सौंदर्य प्रतियोगिताएं उस बदलाव का प्रतीक बन गईं। स्टेज पर सैकड़ों लोगों के जमावड़े के बीच और टेलीविजन स्क्रीन के उस तरफ बैठे करोड़ों दर्शकों के सामने 'स्विमसूट' में किए जाने वाला ये 'वॉक' खूबसूरत बदन का मापदंड तय करने लगा।
'स्विमसूट' खुद एक कपड़े से फटकर दो का हो गया। बहस छिड़ी कि औरत के बदन की ये 'नुमाइश' उसे एक वस्तु की तरह देखने के चलन को बढ़ावा देती है। ये बदलाव 2000 के दशक से सौंदर्य प्रतियोगिताओं में ही नहीं मुख्यधारा के मीडिया में आम हो गया।
'स्विमसूट' खुद एक कपड़े से फटकर दो का हो गया। बहस छिड़ी कि औरत के बदन की ये 'नुमाइश' उसे एक वस्तु की तरह देखने के चलन को बढ़ावा देती है। ये बदलाव 2000 के दशक से सौंदर्य प्रतियोगिताओं में ही नहीं मुख्यधारा के मीडिया में आम हो गया।
अब कम कपड़ों में, एक खास तरह के शरीर के आकार वाली महिलाएं आम तौर पर फिल्मों और म्यूजिक वीडियो में दिखाई जाने लगीं। 'मिस इंडिया' भी आम हो गया। कई और सौंदर्य प्रतियोगिताएं, जैसे 'मिसेज इंडिया', 'मिस डीवा', 'मिस सुपरमॉडल' वगैरह की जाने लगीं।
एक तरह का शरीर और लोकप्रिय हो गया और औरतों को उनके शरीर के चश्मे से देखना और आम। इस नए 'नॉर्मल' यानी आम पर कई बार बहस छिड़ी और मांग उठी कि 'बिकिनी राउंड' को बंद किया जाए। साल 2014 में 'मिस वर्ल्ड' में ये राउंड हटाया गया और उसके दो साल बाद 'मिस इंडिया' प्रतियोगिता में।
एक तरह का शरीर और लोकप्रिय हो गया और औरतों को उनके शरीर के चश्मे से देखना और आम। इस नए 'नॉर्मल' यानी आम पर कई बार बहस छिड़ी और मांग उठी कि 'बिकिनी राउंड' को बंद किया जाए। साल 2014 में 'मिस वर्ल्ड' में ये राउंड हटाया गया और उसके दो साल बाद 'मिस इंडिया' प्रतियोगिता में।
अब इस साल 'मी-टू' अभियान के बाद अमरीका में छिड़ी ताज़ा बहस के बाद 'मिस अमरीका' में भी बदलाव करने का फैसला हुआ है। पर क्या फर्क पड़ता है? स्विमसूट राउंड की वो खिड़की अब बड़ी होकर दरवाजा हो गई है। एक दरवाजा नहीं कई दरवाजे हो गए हैं। औरतों की खूबसूरती को सौंदर्य प्रतियोगिता में चाहे उनके शरीर के आकार से ना आंका जाए पर आम जिंदगी में वो पैमाना और जरूरी बनता जा रहा है। सवाल की सूई तो घूम-फिरकर हमारे आपके ऊपर ही टिकती है। बिकिनी राउंड के बिना ब्यूटी कॉन्टेस्ट देखेंगे? औरत की खूबसूरती को उसके शरीर के आकार से आंकना बंद करेंगे?