फ्री ई-पेपर
पर्सनलाइज़्ड फ़ीड
पर्सनलाइज़्ड नोटिफ़िकेशन
चलते-फिरते ख़बरें
लॉयल्टी रिवॉर्ड्स
डाउनलोड करें

सब्सक्राइब करें
Hindi News ›   Entertainment ›   Web Series ›   Pitchers S2 Review Arunabh Kumar Naveen Kasturia Vaibhav Bandhu Web Series Inspires youth to be self reliant

Pitchers S2 Review: जहां संघर्ष नहीं वहां प्रगति भी नहीं है, युवाओं को आत्मनिर्भरता की प्रेरणा देती वेब सीरीज

Fri, 23 Dec 2022 07:03 PM IST
वीरेंद्र मिश्र अमर उजाला ब्यूरो, मुंबई
अमर उजाला ब्यूरो, मुंबई Published by: वीरेंद्र मिश्र Updated Fri, 23 Dec 2022 07:03 PM IST
विज्ञापन
Pitchers S2 Review Arunabh Kumar Naveen Kasturia Vaibhav Bandhu Web Series Inspires youth to be self reliant
पिचर्स सीजन 2 रिव्यू - फोटो : अमर उजाला
Movie Review
Movie Review
कलाकार
नवीन कस्तुरिया , अरुणाभ कुमार , अभय महाजन , अभिषेक बनर्जी , ऋद्धि डोगरा , सिकंदर खेर और आशीष विद्यार्थी आदि
लेखक
प्रशांत कुमार और शुभम शर्मा
निर्देशक
वैभव बंधु
निर्माता
टीवीएफ
ओटीटी:
जी5
रेटिंग
3/5

इन दिनों स्टार्ट अप को लेकर हर तरफ चर्चाएं हो रही हैं। जरूरी नहीं कि देश की इतनी बड़ी आबादी में सबको नौकरी मिल ही जाए, इसलिए बहुत सारे लोग अपने बिजनेस या स्टार्टअप पर काम करना चाहते हैं। आसान भाषा में समझे तो यह एक ऐसा बिजनेस है जिसका उद्देश्य लोगों की सेवा के साथ साथ उनकी जरूरतों को पूरा कर खुद के लिए मुनाफा कमाना है। स्टार्टअप का अर्थ होता है, एक या एक से ज्यादा लोगो द्वारा स्थापित की गई कंपनी और इस कंपनी का उदेश्य शुरूआती दिनों में लोगों की समस्याओं को हल करना होता है और फिर आगे चलकर ऐसी ही कंपनियां एक बड़ी कारोबारी कंपनी में बदल जाती है।

विज्ञापन

Pitchers S2 Review Arunabh Kumar Naveen Kasturia Vaibhav Bandhu Web Series Inspires youth to be self reliant
पिचर्स सीजन 2 रिव्यू - फोटो : अमर उजाला ब्यूरो, मुंबई

'टीवीएफ पिचर्स' के पहले सीजन में चार युवा अपनी नौकरी स्टार्टअप के लिए छोड़ देते हैं। जहां पहला सीजन चार दोस्तों के बारे में था जो अपनी रोजमर्रा की नौकरी छोड़कर एक साथ एक कंपनी शुरू करते हैं, वहीं सीजन 2 में अब कंपनी में 24 लोगों की टीम शामिल हो गई है। चार दोस्तों ने पहले सीजन में प्रगति नाम से कंपनी की स्थापना की थी, सीजन 2 में इस कंपनी का विस्तार है। नए नए लोग जुड़े हैं और नई परेशानियां भी हैं। कंपनी को आगे बढ़ाने और स्टार्टअप की गलाकाट दुनिया में कंपनी के अस्तित्व को बनाए रखने के लिए चुनौतियां भी हैं और संघर्ष भी।

विज्ञापन
विज्ञापन

Pitchers S2 Review Arunabh Kumar Naveen Kasturia Vaibhav Bandhu Web Series Inspires youth to be self reliant
पिचर्स सीजन 2 रिव्यू - फोटो : अमर उजाला ब्यूरो, मुंबई

सपने देखना और उसको हकीकत में उतरने में बहुत अंतर है। बड़ी बड़ी कंपनियों की कामयाबी देखकर हम उनके जैसा बनना चाहते तो हैं, लेकिन किस कठिन दौर और मेहनत के बलबूते पर वह कंपनी आगे बढ़ी है, समझने की कोशिश नहीं करते। दुनिया में ऐसा कोई भी काम नहीं है जिसे इंसान न कर सके। सही योजना और धैर्य के साथ काम किया जाए तो किसी भी क्षेत्र में सफलता मिल सकती है। यह बात सही है कि इन्वेस्टर दौड़ने वाले घोड़े पर पैसे लगते हैं, तो रेस में तो आपको उतरना ही पड़ेगा। नवीन बंसल जब अपने पार्टनर दोस्त दत्ता और योगी के साथ एक बड़े बिजनेसमैन के सी शर्मा के पास अपनी कंपनी में इनवेस्टमेंट करने की बात करने जाते हैं तो के सी शर्मा मना कर देते हैं। उनको बिजनेस का पहले से बहुत बड़ा अनुभव है और वह नई कंपनी में इनवेस्ट करने से मना कर देते हैं। वह कहते भी हैं कि पैसे दौड़ने वाले घोड़े पर लगाए जाते हैं।

विज्ञापन

Pitchers S2 Review Arunabh Kumar Naveen Kasturia Vaibhav Bandhu Web Series Inspires youth to be self reliant
पिचर्स सीजन 2 रिव्यू - फोटो : अमर उजाला ब्यूरो, मुंबई

किसी भी काम को करने के लिए बड़ी सोच बहुत जरूरी है। अगर हम छोटा सोचेंगे तो जिंदगी भर छोटे ही रहेंगे। नवीन बंसल और उसके चार दोस्त जब नौकरी कर रहे थे तब उन्होंने नहीं सोचा होता है कि उनकी एक दिन खुद की अपनी कंपनी होगी। लेकिन उन्होंने खुद की कंपनी के बारे में सोचा और प्रगति नाम से ऑनलाइन कंपनी शुरू कर दी। कंपनी को आगे बढ़ाने के लिए और भी फंड चाहिए या ऐसा कोई पार्टनर जो कंपनी से जुड़ सके। लोग आलोचना भी करते हैं और जो कंपनियां सफल नहीं हुई उनका उदहारण भी देते हैं। लेकिन अगर सही प्लानिंग के साथ कोई भी काम किया जाए तो उसमें असफल होने के कम चांस होते हैं। के सी शर्मा अपना यही मत नवीन बंसल और उसके दोस्तों के सामने रखते हैं कि उनका मानना है कि ऑनलाइन कंपनी का भविष्य उज्ज्वल नहीं है।

Pitchers S2 Review Arunabh Kumar Naveen Kasturia Vaibhav Bandhu Web Series Inspires youth to be self reliant
पिचर्स सीजन 2 रिव्यू - फोटो : अमर उजाला ब्यूरो, मुंबई

कहानी आगे बढ़ती है और के सी शर्मा इस शर्त पर पैसा लगाने के लिए राजी होते है कि अगर नवीन बंसल 90 दिनों के अंदर अपनी कंपनी में 50 करोड़ रूपये ले आएं तो वह कंपनी में इन्वेस्ट कर देंगे। बिना कुछ सोचे नवीन हां बोल देता है। उसके दोस्तों को लगता है कि 90 दिन के अंदर 50 करोड़ रुपये कहां से आएंगे। उतावलेपन में लिया गया निर्णय अक्सर नुकसान ही पहुंचता है। लेकिन नवीन अपने दोस्तों को समझाता है कि किसी भी काम के लिए धैर्य और आत्मविश्वास बहुत ही जरूरी है। नवीन अपनी दोस्त प्राची से मदद मांगता है, इससे पहले प्राची मदद कर पाती, के सी शर्मा एक दूसरी कंपनी के साथ डील कर लेते हैं। नवीन बंसल को अब नए सिरे से इन्वेस्टर की तलाश में जुटना पड़ता है। वह अपने दोस्तों को समझाता है कि जीवन में बहुत सारी समस्याएं आती रहती है। जरूरी नहीं कि एक ही समस्या को पकड़ कर रखे। आगे कैसे बढ़ना है इस दिशा में सोचा हुआ प्रयास हमेशा इंसान को आगे बढ़ाने में मदद करता है। 'पिचर्स सीजन 2' में ऐसे कई मोड़ आते हैं जिसे देखकर आज की युवा पीढ़ी अपने वर्तमान को सुरक्षित कर सकती है।

Pitchers S2 Review Arunabh Kumar Naveen Kasturia Vaibhav Bandhu Web Series Inspires youth to be self reliant
पिचर्स सीजन 2 रिव्यू - फोटो : अमर उजाला ब्यूरो, मुंबई

सीरीज के निर्देशक वैभव बंधु ने ‘पिचर्स' के रूप में ऐसा विषय चुना है जो युवा पीढ़ी को कुछ न कुछ करने की प्रेरणा देता है। ओटीटी प्लेटफार्म पर जो भी सीरीज अब बन रही हैं वे वास्तविकता के बहुत करीब होते जा रहे हैं। वैभव बंधु ने इस सीरीज के जरिए एक अच्छी कहानी कहने की कोशिश की है। सीरीज का पहला एपिसोड थोड़ा सा धीमा है लेकिन आप जैसा जैसे सीरीज को आगे देखते जाते हैं, उत्सुकता बनी रहती है। जहां तक कलाकारों के अभिनय की बात है तो नवीन कस्तुरिया, अरुणाभ कुमार, अभय महाजन, अभिषेक बनर्जी, ऋद्धि डोगरा, सिकंदर खेर, और आशीष विद्यार्थी जैसे कलाकारों के अलावा जितने कलाकार सीरीज में है, सबने अच्छा प्रयास किया है। अर्जुन कुकरेती की सिनेमेटोग्राफी अच्छी है।

विज्ञापन
विज्ञापन
विज्ञापन
विज्ञापन
विज्ञापन

एड फ्री अनुभव के लिए अमर उजाला प्रीमियम सब्सक्राइब करें

Next Article

AU ऐप में पढ़ें

Followed