Sridevi: कभी 'हवा हवाई' तो कभी 'चांदनी'; अभिनेत्री एक लेकिन रूप अनेक, हीरो से ज्यादा पैसे लेती थीं श्रीदेवी
Sridevi Birth Anniversary: दिवंगत एक्ट्रेस श्रीदेवी की आज 62वीं बर्थ एनिवर्सरी है। 13 अगस्त 1963 को उनका जन्म तमिलनाडु के मीनमपट्टी गांव में हुआ था। इस मौके पर आइए उनके जीवन के जुड़ी कुछ बातें जानते हैं।
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कभी 'हवा हवाई' तो कभी 'चांदनी' तो कभी 'लेडी सुपरस्टार', ना जाने दिवंगत अभिनेत्री श्रीदेवी के कितने नाम थे। भारतीय सिनेमा के इतिहास में कुछ कलाकार ऐसे होते हैं जिनका प्रभाव वक्त के साथ और भी गहराता जाता है। उन्हीं में से एक थीं श्रीदेवी – जिनका अभिनय, सौंदर्य और व्यक्तित्व आज भी सिनेमा प्रेमियों के दिलों में बसा है। 13 अगस्त 1963 को तमिलनाडु के मीनमपट्टी गांव में जन्मी श्रीदेवी का बचपन आम बच्चों जैसा नहीं था। उन्होंने बहुत कम उम्र में फिल्मों की दुनिया में कदम रख दिया और अपने कठिन परिश्रम, डेडिकेशन और बेहतरीन अदाकारी के दम पर बॉलीवुड की ‘सुपरस्टार’ कही जाने लगीं।
4 साल की उम्र में कैमरे का सामना
जहां आम बच्चे चार साल की उम्र में स्कूल जाना शुरू करते हैं, वहीं श्रीदेवी इस उम्र में कैमरे के सामने एक्टिंग कर रही थीं। उनका पहला अभिनय अनुभव तमिल फिल्म ‘कंधन करुणई’ में एक बाल कलाकार के रूप में हुआ। अभिनय की इस पहली झलक ने ही यह संकेत दे दिया था कि यह बच्ची एक दिन बड़ा नाम बनेगी।
बाल कलाकार से हिंदी फिल्मों की ओर
तमिल फिल्मों में सफल शुरुआत के बाद श्रीदेवी ने महज नौ साल की उम्र में हिंदी फिल्म ‘रानी मेरा नाम’ से बॉलीवुड में अपनी मौजूदगी दर्ज कराई। बचपन से ही अभिनय की पकड़ इतनी मजबूत थी कि वह हर किरदार में पूरी तरह ढल जाती थीं।
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1979 में श्रीदेवी ने 'सोलहवां सावन' से हिंदी सिनेमा में अभिनेत्री के रूप में खुद को स्थापित कर लिया, लेकिन असली पहचान उन्हें 1983 की फिल्म ‘हिम्मतवाला’ से मिली। इस फिल्म में उनके डांस और डायलॉग डिलिवरी ने दर्शकों के दिल जीत लिए। इसके बाद 80 और 90 का दशक श्रीदेवी के नाम रहा। उनकी मौजूदगी से फिल्में हिट की गारंटी मानी जाती थीं। निर्माता-निर्देशक उनकी लोकप्रियता के बल पर फिल्में बनाते थे।
जब हीरोइन बन गईं हीरो से बड़ी स्टार
श्रीदेवी को न सिर्फ दर्शकों का प्यार मिला, बल्कि फिल्म इंडस्ट्री में भी उन्हें एक अलग दर्जा प्राप्त हुआ। उस दौर में जब हीरो को ही हमेशा फिल्म का केंद्र माना जाता था, श्रीदेवी ने उस सोच को बदल दिया। उन्होंने कई फिल्मों में ऐसा किरदार निभाया जिसमें कहानी पूरी तरह उन्हीं के इर्द-गिर्द घूमती थी।
80 और 90 के दशक में जब अभिनेत्रियों को पुरुष कलाकारों की तुलना में कम फीस मिलती थी, तब श्रीदेवी ने यह मिथक तोड़ा। वह बॉलीवुड की पहली अभिनेत्री बनीं जिन्हें एक फिल्म के लिए 1 करोड़ रुपए तक की फीस दी गई। यह उस समय के हिसाब से एक बड़ी उपलब्धि थी, जो उनके स्टारडम और प्रभाव का प्रतीक था।
महज 13 साल की उम्र में निभाया मां का किरदार
श्रीदेवी का अभिनय हमेशा उम्र और किरदार की सीमाओं से परे रहा। उन्होंने 13 साल की उम्र में फिल्म ‘मंदरू मुदिचू’ में रजनीकांत की सौतेली मां का रोल निभाया। यह किरदार आसान नहीं था, क्योंकि इसमें एक परिपक्व महिला की भूमिका थी। लेकिन श्रीदेवी ने इस भूमिका को इतनी संजीदगी से निभाया कि दर्शक उनकी उम्र को भूल गए।
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रजनीकांत से गहरी दोस्ती
‘मंदरू मुदिचू’ फिल्म के बाद श्रीदेवी और रजनीकांत के बीच एक मजबूत दोस्ती की शुरुआत हुई। दोनों ने साथ में 20 से ज्यादा फिल्मों में काम किया। फिल्मी पर्दे पर उनकी जोड़ी दर्शकों को खूब पसंद आई। एक समय ऐसा भी आया जब रजनीकांत की तबीयत खराब हुई, और श्रीदेवी ने उनके लिए उपवास रखे – यह उनके गहरे रिश्ते को दर्शाता है।
पांच भाषाओं में अभिनय का जादू
श्रीदेवी केवल हिंदी फिल्मों तक सीमित नहीं रहीं। उन्होंने तमिल, तेलुगू, मलयालम और कन्नड़ फिल्मों में भी काम किया। हर भाषा में उनकी लोकप्रियता और प्रशंसा देखने लायक थी। वह उन चंद अभिनेत्रियों में से थीं जिन्होंने पैन-इंडिया स्तर पर एक जैसी लोकप्रियता हासिल की।
प्रसिद्ध फिल्में और यादगार किरदार
श्रीदेवी ने अपने करियर में तकरीबन 300 फिल्मों में काम किया। ‘चांदनी’, ‘लम्हे’, ‘नगीना’, ‘चालबाज’, ‘सदमा’, ‘मिस्टर इंडिया’, ‘खुदा गवाह’, और ‘जुदाई’ जैसी फिल्मों में उनके किरदार आज भी याद किए जाते हैं। खासकर ‘चालबाज’ में उनका डबल रोल और ‘सदमा’ में उनकी मासूमियत ने दर्शकों को भावुक कर दिया।
श्रीदेवी को मिलने वाले अवॉर्ड्स
श्रीदेवी को उनके सशक्त अभिनय के लिए कई प्रतिष्ठित पुरस्कारों से नवाजा गया, जिनमें भारत सरकार द्वारा प्रदत्त पद्मश्री (2013) प्रमुख है। उन्होंने फिल्म 'मॉम' के लिए मरणोपरांत राष्ट्रीय फिल्म पुरस्कार मिला। इसके अलावा श्रीदेवी ने फिल्मफेयर पुरस्कार भी विभिन्न भाषाओं और श्रेणियों में कई बार जीते, जैसे चालबाज-लम्हे के लिए।
उन्हें तेलुगु, तमिल और मलयालम सिनेमा में भी शानदार परफॉर्मेंस के लिए राज्य स्तरीय सम्मान प्राप्त हुए। जीवन के अंतिम वर्षों में भी इंग्लिश विंग्लिश जैसी फिल्मों के जरिए उन्होंने नई पीढ़ी को अपनी प्रतिभा से प्रभावित किया, जिसके लिए उन्हें कई आधुनिक सम्मान जैसे स्टारडस्ट अवॉर्ड्स भी प्राप्त हुए।
1996 में श्रीदेवी ने निर्माता बोनी कपूर से शादी की। यह शादी उस समय काफी चर्चा में रही, क्योंकि बोनी पहले से शादीशुदा थे। शादी के बाद भी श्रीदेवी ने फिल्मों से पूरी तरह दूरी नहीं बनाई। वह कुछ समय के लिए जरूर इंडस्ट्री से दूर रहीं, लेकिन जब वापसी की तो धमाकेदार की। हालांकि बोनी से शादी से पहले उनका नाम मिथुन चक्रवर्ती और जितेंद्र जैसे कलाकारों के साथ जुड़ा।
‘मॉम’ से की शानदार वापसी
अपनी दोनों बेटियों जान्हवी और खुशी कपूर के जन्म के बाद अभिनेत्री ने एक्टिंग से ब्रेक ले लिया था लेकिन फिर 2017 में फिल्म ‘मॉम’ के साथ श्रीदेवी ने एक बार फिर सिनेमा में जोरदार वापसी की। इस फिल्म में उन्होंने एक मां का किरदार निभाया, जो अपनी बेटी के इंसाफ के लिए किसी भी हद तक जाने को तैयार है। इस भूमिका के लिए उन्हें मरणोपरांत राष्ट्रीय पुरस्कार भी मिला।
उनकी आखिरी फिल्म थी ‘जीरो’, जिसमें उन्होंने एक कैमियो किया। यह फिल्म उनकी मृत्यु के बाद रिलीज हुई थी, और दर्शकों ने उनकी झलक को देखकर एक बार फिर उन्हें याद किया।
विचलित कर देने वाली मौत
24 फरवरी 2018 का दिन भारतीय सिनेमा के लिए एक मनहूस खबर लेकर आया। दुबई में एक पारिवारिक समारोह के दौरान बाथटब में डूबने से श्रीदेवी की मृत्यु हो गई। यह खबर सुनकर पूरा देश स्तब्ध रह गया। उनकी अचानक गई जिंदगी ने न सिर्फ उनके परिवार को, बल्कि लाखों प्रशंसकों को गहरे शोक में डाल दिया।
‘चांदनी’ की चमक आज भी कायम है
श्रीदेवी भले ही आज हमारे बीच नहीं हैं, लेकिन उनका काम, उनका अंदाज और उनकी यादें हमेशा जीवित रहेंगी। वो एक ऐसी अभिनेत्री थीं, जिन्होंने अपनी मेहनत, प्रतिभा और समर्पण से भारतीय सिनेमा को नई ऊंचाइयों पर पहुंचाया। आज जब हम उनका 62वां जन्मदिन मना रहे हैं, तो यह दिन हमें सिर्फ उनकी फिल्मों की याद नहीं दिलाता, बल्कि यह भी याद दिलाता है कि सच्ची प्रतिभा किसी भी सीमा में नहीं बंधती।