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K. J. Yesudas: साउथ की वो मखमली आवाज, जिसे कहना पड़ा अब मुझे अवॉर्ड मत दो, जानें येसुदास की कहानी

Fri, 10 Jan 2025 07:00 AM IST
दीक्षा पाठक एंटरटेनमेंट डेस्क, अमर उजाला
एंटरटेनमेंट डेस्क, अमर उजाला Published by: दीक्षा पाठक Updated Fri, 10 Jan 2025 07:00 AM IST
सार

उस समय एक सिंगर के जे येसुदास हिंदी सिनेमा में एंट्री ले रहे थे। हालांकि, यह एंट्री कुछ ही वर्षों की थी, लेकिन इन सालों में के जे येसुदास ने संगीत के ऐसे समुद्र का निर्माण कर दिया, जिसमें आज तक संगीत प्रेमी गोते लगाते हैं।

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K. J. Yesudas Birthday Special Know Unknown Facts about Singer love life and Career Struggles
के जे येसुदास - फोटो : अमर उजाला

विस्तार

हिंदी सिनेमा में जब मोहम्मद रफी, किशोर और मुकेश का रुतबा कायम हुआ करता था और यह तीनों दिग्गज म्यूजिक इंडस्ट्री पर राज करते थे, उसी समय साउथ से भी एक मखमली आवाज धीरे-धीरे बॉलीवुड का रुख कर रही थी। उस समय एक सिंगर के जे येसुदास हिंदी सिनेमा में एंट्री ले रहे थे। हालांकि, यह एंट्री कुछ ही वर्षों की थी, लेकिन इन सालों में के जे येसुदास ने संगीत के ऐसे समुद्र का निर्माण कर दिया, जिसमें आज तक संगीत प्रेमी गोते लगाते हैं। आइए सिंगर के जन्मदिन पर जानते हैं, उनकी जिंदगी से जुड़े दिलचस्प किस्सों के बारे में।
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बचपन से ही संगीत में थी रुचि
के जे येसुदास का जन्म 10 जनवरी 1940 में एक ईसाई परिवार में हुआ, उनके पिता भी जाने माने संगीतकार और अभिनेता थे। बचपन से ही के जे येसुदास को संगीत में काफी रुचि थी। इसलिए उन्होंने पिता के दोस्त से इसकी प्रोफेशनल तामिल लेनी शुरू की। हालांकि, पैसों की तंगी के कारण उन्हें इसे बीच में ही छोड़ना पड़ा। इसके बाद उन्होंने वेच्चोर हरिहरा सुब्रमणिया अय्यर में संगीत का प्रशिक्षण लिया।
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वो सिंगर जिन्हें कहना पड़ा कि अब मुझे अवॉर्ड मत दो
के जे येसुदास  के संगीत का प्रतिभा का इस बात से अंदाजा लगाया जा सकता है कि केवल सात साल की उम्र में उन्होंने स्थानीय प्रतियोगिता में स्वर्ण पदक जीत लिया था। मलयालम, तमिल और हिंदी के अलावा अरबी भाषा में भी के जे येसुदास ने गाने गाए हैं। उन्हें देश ही नहीं बल्कि विदेशों में भी काफी अवॉर्ड्स से नवाजा गया है। सिंगर को इतने अवॉर्ड मिल चुके हैं कि उन्हें कहना पड़ा था कि अब मुझे अवॉर्ड मत दो।
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महिलाओं का जींस पहनने पर टिप्पणी कर विवादों में छाए
येसुदास महिलाओं की जींस पहनने को लेकर भी विवादों के घेरे में आ चुके हैं। सिंगर ने कहा था कि महिलाओं के जींस पहनकर परेशानी का कारण नहीं बनना चाहिए, जो चीज ढकी है, उसे ढक कर ही रखना चाहिए। यह भारतीय संस्कृति के खिलाफ है। ऐसे कपड़े महिलाओं के गुणों को छिपा देते हैं और यह उनकी सुशीलता के खिलाफ है।


ईसाई होकर कर्नाटक संगीत की शिक्षा ली
येसुदास ने बप्पी लहरी,  सलिल चौधरी, राजकमल, रविंद्र जैन, खय्याम जैसे मशहूर संगीतकारों के साथ कई गाने दिए हैं, उनकी आवाज सुनकर संगीतकार रविंद्र जैन ने एक बार कहा था, ' अगर कभी मेरी आंखों की रोशनी लौटती है तो सबसे पहले येसुदास को देखना चाहूंगा जिनकी इतनी मधुर आवाज है।' येसुदास भले ही ईसाई थे, लेकिन उन्होंने कर्नाटक संगीत के महान गायक के आर कुमारस्वामी से भी उन्होंने संगीत की तालीम हासिल की थी।
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