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Hindi News ›   Entertainment ›   Shyam Sundar Chadha Birth Anniversary: Know about famous actor career movies and early death reason

Shyam: जिंदगी धोखा न देती तो कई सुपरस्टार्स का करियर खतरे में डाल देता ये कलाकार, 40 के दशक में रहा इनका राज

Fri, 21 Feb 2025 12:49 PM IST
ज्योति राघव एंटरटेनमेंट डेस्क, अमर उजाला
एंटरटेनमेंट डेस्क, अमर उजाला Published by: ज्योति राघव Updated Fri, 21 Feb 2025 12:49 PM IST
सार

Shyam Sundar Chadha Birth Anniversary: अभिनेता श्याम ने 40 और 50 के दशक में इंडस्ट्री पर राज किया। मगर, बहुत कम उम्र में वे दुनिया को अलविदा कह गए। आइए जानते हैं, उनके बारे में

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Shyam Sundar Chadha Birth Anniversary: Know about famous actor career movies and early death reason
एक्टर श्याम - फोटो : अमर उजाला

विस्तार

अविभाजित भारत में एक कलाकार का जन्म हुआ। 40 और 50 के दशक में उसने सफलता का शिखर छुआ। जबर्दस्त स्टारडम देखा। उसका समय शुरू ही हुआ था, कई बड़े सुपरस्टार्स को टक्कर देते हुए वह इंडस्ट्री को कई और फिल्में दे पाता कि जिंदगी ने धोखा दे दिया। बात हो रही है, महज 31 साल की उम्र में दुनिया को अलविदा कह देने वाले कलाकार श्याम की। उन्होंने अपने बहुत कम अवधि के करियर में भी कई बेमिसाल फिल्में दीं। 20 फरवरी को उनकी बर्थ एनिवर्सरी थी। आइए जानते हैं उनके बारे में...

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Shyam Sundar Chadha Birth Anniversary: Know about famous actor career movies and early death reason
एक्टर श्याम - फोटो : अमर उजाला

बचपन से था अभिनय के प्रति लगाव
सुंदर श्याम चड्डा उर्फ श्याम का जन्म अविभाजित भारत के सियालकोट में 20 फरवरी 1920 को हुआ। बचपन से ही उनका झुकाव अभिनय की तरफ रहा। मगर, उनका परिवार पुरानी विचारधारा का था, लिहाजा अभिनय की दुनिया में आने के लिए उन्हें परिवार का विरोध झेलना पड़ा। अभिनय के झुकाव के बीच श्याम ने पढ़ाई-लिखाई जारी रखी। श्याम के पिता सीताराम चड्ढा भारतीय सेना में थे। मां गृहणी थीं। जिंदगी में सबकुछ ठीक था, श्याम अभिनय की दुनिया में आने के सपने देख रहे थे कि तभी दुखों का पहाड़ टूटा। बाल्यावस्था में ही उनके सिर से मां का साया हट गया। श्याम अपने पांच भाई-बहनों में सबसे बड़े थे। उन पर जिम्मेदारी आ गई।  

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चाचा ने आसान किया मुश्किल रास्ता
श्याम जैसे-जैसे बड़े हुए उनका मन अभिनय की तरफ और ज्यादा झुकने लगा। उन्होंने रावलपिंडी के मशहूर विश्वविद्यालय गार्डन कॉलेज से डिग्री हासिल की। कॉलेज के दिनों से वे स्टेज शो में हिस्सा लेते थे। इसके साथ ही ड्रैमेटिक सोसाइटी ऑफ गार्डन कॉलेज के प्रेसीडेंट भी थे। 1941 के जमाने में वे इंग्लिश उर्दू न्यूजपेपर में आर्टिकल भी लिखा करते थे। मगर, उनका मन अभिनय की ओर ही झुकता रहा, वहीं उनके पिता अभिनय के प्रति लगाव बेटे के लगाव के सख्त खिलाफ थे। श्याम के अभिनय प्रेम को चाचा ताराचंद चड्ढा ने समझा और उन्होंने श्याम के पिता को समझाया। चाचा ने रास्ता आसान किया और अगले दिन ट्रेन से मुंबई आए। मुंबई आकर बॉम्बे स्टूडियो में ऑडिशन दिया। उनका चयन तो नहीं हुआ, लेकिन जीके नंदा ने उन्हें अपना असिस्टेंट बनाया। कुछ दिन मुंबई में बिताने के बाद वे फिर लाहौर लौट गए। 

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पंजाबी फिल्म से शुरू किया सफर
लाहौर आकर श्याम को अपने जीवन की पहली पंजाबी फिल्म 'गोवंधी' (1942) मिली। इस फिल्म की सफलता के बाद उन्हें महसूस हुआ कि वे फिल्म जगत के लिए बने हैं। अपनी मातृभूमि में रहते हुए उन्होंने सफलता की बुलंदी छुई और सिनेमा के उभरते सुपरस्टार बने। 'गोवंधी' की सफलता के बाद उन्होंने कई हिट फिल्मों में काम किया। श्याम का करियर अच्छी तरह चल रहा था, लेकिन तभी देश के विभाजन की खबर आई। कलाकारों को किसी एक देश को चुनना था। श्याम को मुंबई लौटना पड़ा। वे फिर बॉम्बे स्टूडियो गए। इस बार उन्हें चुन लिया गया। श्याम को 'मजबूर' फिल्म मिली। मुनव्ववर सुल्ताना उनके अपोजिट नजर आईं। फिल्म को अपार सफलता मिली। उनकी तुलना अशोक कुमार और मोतीलाल से होने लगी। उनकी यादगार फिल्मों में 'बाजार', 'आज और कल', 'चांदनी रात', 'चार दिन' और 'पतंगा' शामिल हैं। 

घुड़सवारी के दौरान हुआ हादसा और...
श्याम ने अपने करियर में करीब सभी लोकप्रिय अदाकाराओं के साथ काम किया। इनमें नरगिस, सुरैया, निगार सुल्ताना और नलिनी जयवंत शामिल हैं। 40 और 50 के दशक में इंडस्ट्री पर राज करने के बाद 60 का जमाना लगते-लगते जिंदगी ने श्याम को धोखा दे दिया। महज 31 साल की उम्र में उन्होंने दुनिया को अलविदा कह दिया। रिपोर्ट्स के अनुसार, फिल्मिस्तान स्टूडियो में घुड़सवारी के दौरान गिरने की वजह से श्याम की मौत हुई थी। उनके सिर में गहरी चोट लगी थी। कहा जाता है कि श्याम की अगर असमय मृत्यु नहीं हुई होती तो वे दिलीप कुमार, देव आनंद और राज कपूर को कड़ी चुनौती देते। उस दौर के सबसे खूबसूरत कलाकारों में उनकी गिनती होती थी। निजी जिंदगी की बात करें तो श्याम की शादी मुमताज कुरैशी से हुई। दोनों की दो संताने हुईं। बेटी का नाम शाहिरा और एक बेटा शाकिर। बेटे शाकिर का जन्म श्याम के निधन के दो माह बाद हुआ।

बन चुकी है फिल्म
श्याम, मशहूर लेखक सआदत हसन मंटो के गहरे दोस्त थे और उनकी कई कहानियों से प्रेरणा भी ली। नंदिता दास ने सआदत हसन मंटो की जिंदगी पर आधारित 'मंटो' नाम से एक फिल्म बनाई थी, जिसमें श्याम का किरदार एक्टर ताहिर राज भसीन ने निभाया था।

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