Seema Kapoor Exclusive: भूमि पेडनेकर की मां के कहने पर मैंने किया अभिनय, अन्नू भैया के बिना जीवन सोचना भी कठिन
Seema Kapoor Exclusive Interview: निर्माता-निर्देशक सीमा कपूर ने टेलीविजन और सिनेमा में खूब नाम कमाया है। ओम पुरी से विवाह से पहले उन पर फौज के अफसर से लेकर विधु विनोद चोपडा जैसे निर्देशक भी फिदा रहे। पहली बार सीमा ने कैमरे के सामने अपनी जीवन के निजी पहलुओं पर खुलकर बात की है।
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दूरदर्शन के चर्चित धारावाहिक ‘किले का रहस्य’ से लेकर अभी बीते साल प्रसारित धारावाहिक ‘अवंतिका’ तक निर्देशन में बीते चार दशकों से लगातार सक्रिय सीमा कपूर की आत्मकथा ‘यूं गुजरी है अब तलक’ इन दिनों खूब हलचल है। अपने दिवगंत पति ओम पुरी के बारे में इसमें उन्होंने खूब खुलकर लिखा है। ओम पुरी से विवाह होने से पहले भी सीमा कपूर के पास शादी के अनेक प्रस्ताव आए। उनमें से एक प्रस्ताव खुद विधु विनोद चोपड़ा ने भी रखा। सीमा कपूर ने अभिनेत्री भूमि पेडनेकर की मां सुमित्रा के बहुत आग्रह पर एक फिल्म में अभिनय भी किया है। और, क्या आपको पता है कि ओम पुरी को स्त्रियों के वस्त्र पहनने का भी शौक रहा। अपने जीवन के अहम पड़ावों के बारे में सीमा कपूर ने ‘अमर उजाला’ के सलाहकार संपादक पंकज शुक्ल से लंबी और एक्सक्लूसिव बातचीत कार्यक्रम ‘शुक्ल पक्ष’ के लिए की है, उसी बातचीत के कुछ अंश यहां प्रस्तुत हैं, पूरी बातचीत के वीडियो का लिंक भी इंटरव्यू के आखिर में दिया गया है।
आपके भीतर कुछ कर दिखाने की ललक कैसे आई होगी?
(ओम) पुरी साहब और मेरे भाई हमेशा बोलते थे, तुम्हारे अंदर फायर नहीं है। एक होती है न फायर कि आपको यह करना है, वह करना है, यह बनना है, वह बनना है। वैसा मेरे साथ कभी नहीं रहा। जैसे मैं अभी शांत हूं, ऐसे ही मैं शुरू से शांत रही हूं। मैंने जो चाहा वह कभी नहीं मिला और जिसकी इच्छा ही नहीं की, वह सब मिलता चला गया। अब मैं कोई इच्छा करती ही नहीं हूं।
आपके तीन भाई रंजीत कपूर, रंगमंच का इतना बड़ा नाम, अन्नू कपूर का सिनेमा में बड़ा नाम और निखिल कपूर। फिर भी आपका जीवन इन सबसे अलग ही रहा। गीतकार व कवि गोपालदास नीरज से मुलाकात का एक किस्सा भी है..
थियेटर और नाटक घर में होने के बावजूद कभी हमारे परिवार में लड़कियों को इसमें जाने नहीं दिया गया। नीरज जी की जो बात आपने कही तो मुझे याद है मैं उन दिनों बहुत ही अजीब से दौर से गुजरी थी। और उसकी वजह से मैं बहुत ज्यादा संकोची और बहुत ज्यादा एहसास ए कमतरी में रहने लगी थी। सब लोगों की तारीफ होती थी, मेरी कोई तारीफ ही नहीं करता तो एग अजीब तरह की घुटन थी। ऐसे में नीरज निशा नामक एक कवि सम्मेलन में मां के साथ मैं भी गई थी और वहां जब मां ने मुझे मिलवाया उनसे तो उन्होंने मेरे सिर पर हाथ रखा। मेरा नाम पूछा और मेरे जवाब पर बोले, वेरी गुड। इन दो शब्दों ने तो मुझे सातवें आसमान में पहुंचा दिया।
सिनेमा के दमकते सितारे रघुवीर यादव किशोरावस्था में आपके पिताजी की नाट्य मंडली में आ मिले थे, उनके साथ बिताए बचपन से लेकर अब तक की यादों के बारे में कुछ कहेंगी?
मेरे पिता बंटवारे से पहले दिल्ली आ गए थे। भोपाल आकर उन्होंने अपनी थिएटर कंपनी शुरू की। 250 लोग थे उसमें और काफी बड़े-बड़े कलाकार, जैसे शकीला बानो भोपाली वगैरह काम किया करते थे। रघुवीर भाई आए हैं मेरे ख्याल से 1965 या 66 में। तब वह रहे होंगे 13 साल के करीब। अब के बच्चे इसी उम्र में बड़े हो जाते हैं। रंजीत भाई ने उनको और अन्नू भैया को एनएसडी (राष्ट्रीय नाट्य विद्यालय) भेजने के लिए पूरी कोशिश की। रंजीत भाई ने कहा कि अगर तुम यह सोचोगे कि मैं कह दूंगा भाड़ में जाओ गुस्सा होकर, तो मैं चुप हो जाऊंगा। मैं मार-मार के लेके जाऊंगा। और, इन दोनों को लेकर गए वह।
आपका भी तो चयन अलकाजी ने कर लिया था लेकिन आपकी मां ने आपको अभिनय क्षेत्र में जाने नहीं दिया। फिर, शायद अभिनेत्री भूमि पेडनेकर की मां सुमित्रा के कहने पर आपने ओम पुरी की एक फिल्म में काम किया है?
हां, पुरी साब मुझे दिल्ली से रोहतक ले गए थे। एक फिल्म की शूटिंग चल रही थी। भूमि की मां सुमित्रा उसमें हीरोइन थीं। फिल्म में एक छोटा सा रोल किसी अभिनेत्री का था और वह आ नहीं सकीं थीं तो सुमित्रा ने मुझसे वह रोल करने को खूब कहा। पुरी साब ने भी रोक लिया। फिर मेरे लिए कपड़े वगैरह मंगवाए गए। अभी बहुत साल बाद पुरी साब ने जाने से पहले एक दिन इस फिल्म की एक क्लिप कहीं से निकाली और उस पर लिखा सीमा कपूर की डेब्यू फिल्म, सांझी।
और, झालावाड़ में कोई फौजी अफसर आपके घर पहुंच गया था शादी का प्रस्ताव लेकर?
उनकी ड्रिल हो रही थी कुछ और उस शहर में कभी हेलीकॉप्टर या हवाई जहाज दूर से भी नहीं निकलता था। जैसे ही दो हेलीकॉप्टर आए तो शहर में ही खलबली मच गई। शहर क्या कस्बा था छोटा था? हम लोग भी भागे। वहां हेलीकॉप्टर उतरे। और, उन्होंने जैसे ही अपना हेलमेट उतारा, तो उफ। फिर उनकी आवाज सुनी। अमिताभ बच्चन जैसी आवाज थी उनकी बड़ी गंभीर और खूबसूरत पर्सनैलिटी थी। फिर एक दिन मेजर कावस के साथ ये कैप्टन नेहरा दोनों घर आ गए। मुझे देखकर गाना भी सुनाया, ये शाम मस्तानी मदहोश किए जाए..
निर्देशक विधु विनोद चोपड़ा ने भी आपके सामने शादी का प्रस्ताव रखा?
रंजीत भाई फिल्म लिख रहे थे विनोद की, ‘खामोश’। उन दिनों मैं रंजीत भाई के पास ही रहती थी। वहीं पहचान हुई और अच्छी दोस्ती हुई जो आज भी कायम है। हम लोग उस दिन जुहू बीच पर थे। शाम का समय, उन्होंने एक कागज पर लिखा। डू यू लव मी? मैंने लिखा यस। फिर उन्होंने लिखा, विल यू मैरी मी? मैंने लिखा, नो। वह कागज उन्होंने सहेज लिया और थोड़ा दुखी भी हुए। मैंने क्यों मना किया था? उसकी अलग कहानी है।
अब मैं ओम पुरी और आपकी शादी से पहले की मुलाकात पर आता हूं, कहां और कैसे हुई ये पहली मुलाकात?
बहुत नाटकीय थी, वह मुलाकात। साल 1979 की बात है। रंजीत भाई उन दिनों नंबर वन निर्देशक बन चुके थे। बॉम्बे में उनका बहुत नाम था। पुरी साहब उनसे एक नाटक करवा रहे थे। उन दिनों सोशल मीडिया तो था नहीं तो अभिनेता अपने हुनर को ऐसे ही रंगमंच पर दिखाया करते थे। रंजीत भाई की पत्नी तृषा और उनकी बेटी ग्रुषा जो तब साल भर की थी, हम तीनों साथ में बंबई आए। सीधे पृथ्वी थिएटर गए हम, वहीं पुरी साबसे मैं पहली बार मिली।
और, शैतानियां भी बहुत करते थे वह आपके साथ? शायद कभी आश्रम खोलने की योजना भी बनाई थी?
हां, एक बार वह एक फोटो लेकर आए किसी बाबा की तस्वीर पर मेरा चेहरा लगाकर। बोले, सीमा तुम बोलती अच्छा हो। हम आश्रम खोलते हैं। मैं करोड़पति भक्त लेकर आया करूंगा। फिर कभी जब मैं बाहर होती तो वह मेरी स्कर्ट और टॉप पहनकर और दुपट्टा ओढ़कर बैठ जाते। घर में काम करने वाली से कहते कि कहो, तुम्हारी सहेली आई है। मैंने अंदर जाकर देखा तो घूंघट किए बैठे हैं। मैंने कहा, मेरे बेड पर कौन सहेली बैठेगी और वह भी सिगरेट हाथ में लेकर।
अपने अंतिम दिनों में वह आपके यहां ही आस लेकर आए थे। उनका जिक्र आता है तो अब वे सारे कष्ट भी याद आते हैं, या क्षमा कर दिया आपने?
मैंने तो तभी क्षमा कर दिया था, तभी स्वीकार लिया था। पर, मेरे अन्नू भैया (अन्नू कपूर) ने आज तक उन्हें क्षमा नहीं किया। पुरी साहब कभी-कभी मूर्खतापूर्ण वक्तव्य दे देते थे। उनका शब्दज्ञान भी कम था और वह जो सोचते थे, उसे कैसे कहना है, नहीं जान पाते थे। उन्होंने कहीं कह दिया कि अपना मैं सीमा के साथ बिताना चाहता हूं। इसी पर अन्नू भैया गुस्सा हो गए थे और बोले थे कि इसे पत्नी नहीं सेवादार चाहिए।
अन्नू कपूर जैसा भाई मुश्किल से मिलता है जो खुद भी संघर्ष कर रहा हो और इसके बावजूद अपनी बहन को लगातार पैसे भेज रहा हो, उनका आपके जीवन में क्या स्थान है?
ऐसे स्थान तो बना नहीं रखे लेकिन उनके बिना जीवन सोचना कठिन है। मतलब सोच भी नहीं पा सकती मैं। उनके बिना जीवन की सोचकर ही सिहर जाती हूं। एक सेकंड भी वह मेरी आंख का आंसू नहीं बर्दाश्त कर सकते और मैं भी उनकी आंख का आंसू आने से पहले ही उनकी पीड़ा से व्यथित हो जाती हूं।
निर्माता-निर्देशक सीमा कपूर के पॉडकास्ट का वीडियो आप यहां देख सकते हैं: