टाइगर श्रॉफ गोलीबारी मामला: मुंबई पुलिस का बड़ा एक्शन, सभी आरोपियों के खिलाफ लगाईं मकोका की धाराएं
- Tiger Shroff Firing Case: बॉलीवुड अभिनेता टाइगर श्रॉफ पर हुई गोलीबारी की घटना में पुलिस जांच में जुटी है।
- मामले में गिरफ्तार सभी आरोपियों पर सख्त एक्शन लिया जा रहा है।
- मुंबई पुलिस ने आज मंगलवार को आरोपियों पर मकोका की धराएं लगाई हैं।
विस्तार
किससे ली गई मंजूरी?
समाचार एजेंसी आईएएनएस के मुताबिक, एक आधिकारिक बयान में कहा गया है कि महाराष्ट्र कंट्रोल ऑफ ऑर्गनाइज्ड क्राइम एक्ट (मकोका), 1999 के नियम DCB CID CR नंबर 143/26 में लगाए गए हैं। अधिकारी ने बताया कि सक्षम प्राधिकारी से मंजूरी मिलने के बाद इस कानून की धाराएं जोड़ी गई हैं।
19 अक्तूबर को दर्ज हुई थी एफआईआर
बता दें कि आरोपियों के खिलाफ मुंबई पुलिस ने 19 अक्तूबर को भारतीय न्याय संहिता (बीएनएस) और आर्म्स एक्ट के तहत केस दर्ज किया था। इसके बाद, 27 अक्टूबर को MCOCA लगाने की मंज़ूरी दी गई। पुलिस ने कहा कि इस केस से जुड़े ऑर्गेनाइज्ड क्राइम बैकग्राउंड को देखते हुए इसकी जांच तेज कर दी गई है। अभी केस की आगे की जांच चल रही है।
बिश्नोई गैंग से आरोपियों के लिंक?
इससे पहले मुंबई क्राइम ब्रांच ने टाइगर श्रॉफ से जुड़ी फायरिंग की घटना के पीछे कथित मकसद का पता लगाया था, जिसमें कहा गया था कि हमला पैसे ऐंठने, गैंग का दबदबा बनाने और लोगों में डर पैदा करने के मकसद से किया गया था। क्राइम ब्रांच की जांच के मुताबिक, फायरिंग की घटना में कथित तौर पर शामिल आरोपियों के लॉरेंस बिश्नोई गैंग से लिंक हैं।
पुलिस ने क्या कहा?
पुलिस का आरोप है कि गैंग ने टाइगर श्रॉफ को अपना प्रभाव बढ़ाने, लोगों को डराने और एक्सटॉर्शन के जरिए पैसे कमाने की कोशिश के तहत टारगेट किया। मुंबई क्राइम ब्रांच ने कहा है कि आरोपी कथित तौर पर एक ऑर्गनाइज्ड क्राइम सिंडिकेट के एक्टिव मेंबर के तौर पर काम कर रहे थे। इन्वेस्टिगेटर्स का मानना है कि यह हमला कोई अकेला काम नहीं था, बल्कि पैसे का फायदा उठाने, गैंग का दबदबा बनाने और समाज में डर फैलाने के मकसद से एक प्लान की गई क्रिमिनल साजिश का हिस्सा था।
योजनाबद्ध तरीके से किया गया हमला?
आरोपियों ने स्टार को टारगेट करने की पहले से प्लान की गई साजिश के तहत गैर-कानूनी और जानलेवा हथियारों का इस्तेमाल करके हमला किया। जांच से यह भी पता चला है कि यह साजिश दिल्ली और मुंबई समेत कई जगहों पर एक इंटर-स्टेट नेटवर्क के जरिए कोऑर्डिनेट की गई थी।