Thug Life Review: ये ठग नानी को दादी कहकर बुलाता है, हॉकर के बच्चे को बेटे जैसा पालता है, किंतु कहानी कहां है?
कमल हासन, उम्र 70 साल। मणि रत्नम, उम्र 69 साल। दुनिया की सबसे बड़ी कंपनियों में शुमार डिज्नी के नजरिये से देखें तो एक ब्लॉकबस्टर फिल्म बनाने के लिए दोनों की उम्र बिल्कुल ठीक है। कमल हासन को यहां तृषा कृष्णन के साथ ‘मैडम, आई एम योर ओनली एडम!’ करते देख तमाम छातियों पर सांप भले लोटे हों, पर उनका आभा मंडल अब भी पूरी तरह दुरुस्त है। आवाज भी कहीं नहीं कमजोर सुनाई देती है। आपने शायद देखा भी हो, अभी कुछ दिन पहले फिल्म ‘मालिक’ की पहली झलक रिलीज हुई है। यहां एक साइड प्रोफाइल राजकुमार राव का ठीक वैसा ही है, जैसा फिल्म ‘एनिमल’ में रणबीर कपूर का रहा है। हो सकता है वह गरीब फिल्म निर्माताओं के रणबीर कपूर ही बनना चाह रहे हों, लेकिन ये मणि रत्नम जैसे निर्देशक को क्या हुआ? फिल्म ‘ठग लाइफ’ के एक सीन में कमल हासन को छोटी सी कुल्हाड़ी लेकर लड़ते हुए जैसे ही दिखाया जाता है, दर्शकों के दिमाग में अपने आप बजने लगता है, ‘के अर्जन वेल्ली ए...’! मणि रत्नम की फिल्म में ऐसे दोहराव वाले सीन, तौबा है तौबा! ‘ठग लाइफ’ तमिल सिनेमा के दो दिग्गजों का मिलन है। ‘नायकन’ के बाद मणि रत्नम और कमल हासन फिर साथ आए हैं। चेन्नई में मिलने पर कमल हासन ने बताया था कि जवानी के दिनों में दोनों ने स्कूटरों की गद्दियों पर पसरे हुए अच्छे सिनेमा के तमाम सपने एक साथ देखे थे और ये उनमें से एक है! फिल्म देखकर मन में पहला सवाल यही आता है, क्या वाकई?
सीधे मुकाबले से हटते ही बना अंदेशा
फिल्म ‘ठग लाइफ’ इस साल की बहुप्रतीक्षित फिल्मों में से एक रही है। माना जा रहा था कि ये हिंदी फिल्म ‘हाउसफुल 5’ को कड़ी टक्कर देगी। लेकिन, फिल्म की रिलीज शुक्रवार की बजाय गुरुवार को तय होते ही पहला संकेत ये आया कि शायद सीधे मुकाबले के लिए ‘ठग लाइफ’ की टीम तैयार नहीं है। तैयार इस फिल्म की कहानी भी इतनी नहीं है कि इस पर मणि रत्नम जैसा निर्देशक फिल्म बनाए। क्या क्या नहीं बनाया हैं उन्होंने तमिल और हिंदी सिनेमा में। बेजॉय नांबियार जैसे निर्देशक अब भी उनका असिस्टेंट बनकर ही तर जाते हैं। लेकिन, ‘रोजा’, ‘बॉम्बे’ और ‘दिल से’ बनाने वाले निर्देशक की फिल्म है, ‘ठग लाइफ’, ये दिल किसी भी तरह मानने को तैयार नहीं होता। दिल्ली के भू माफियाओं की कहानी पूरे देश में यूं आसानी से घूमती रहती है कि बस पूछो मत। न कहीं कोई टाइम लैप, न ही कहीं कोई सिर पैर। गोवा और दिल्ली के बीच की दूरी फिल्म के कलाकार यूं तय करते हैं, मानो किसी टाइम पोर्टल से होकर गुजर जाते हों।
फिल्म की पटकथा सबसे कमजोर कड़ी
फिल्म की सबसे कमजोर कड़ी है इसकी कहानी, इसकी पटकथा और इसके संवाद। साल 1994 में शुरू होने वाली फिल्म में युवा कमल हासन भी दिखते हैं। शायद ये उनका एआई अवतार है। कहानी दिल्ली के माफियाओं की है। दो गिरोहों में समझौते की सी बात चल रही है। लेकिन, इनमें से एक गिरोह पुलिस से मिला हुआ है। गोलीबारी होती है। कमल हासन का किरदार कुछ कुछ ‘नायकन’ जैसा ही है, नाम उसको मिला है शक्तिवेल। वह अखबार बेचने वाले हॉकर के बच्चे को ढाल बनाकर भागने की कोशिश करता है। ये बच्चा बड़ा होकर उसका उत्तराधिकारी भी बनता है। लेकिन, छोटे भाई और बड़े भाई की अनबन के बीच बड़ा हो चुका ये बच्चा शतरंज का ऐसा मोहरा बन जाता है कि न इससे सीधी चाल चली जाती है और न घोड़े वाली ढैया चाल। हां, इंटरवल तक फिल्म ठीक ठाक चलती जाती है, लेकिन इंटरवल के बाद फिल्म आसमान से धरती पर इतनी जोर से गिरती है कि उनके और कमल हासन दोनों के फैंस के दिलों में बड़ा सा ‘क्रेटर’ बन जाता है।
दुख इस बात को यादकर और बढ़ जाता है कि साल 1981 में 5 जून को ही कमल हासन की पहली हिंदी फिल्म ‘एक दूजे के लिए’ रिलीज हुई थी और तब से आज तक उनके चाहने वाले उनकी अच्छी फिल्मों के इंतजार में रहते ही रहे हैं। कमल हासन की ‘सदमा’ आज भी हिंदी फिल्म दर्शकों की पसंदीदा फिल्मों की सूची में सबसे ऊपर की फिल्मों मे शुमार होती है। लेकिन, ‘ठग लाइफ’ देखने वाले खुद को ठगा सा जरूर महसूस करेंगे। ये आईफोन की ऑन लाइन खरीद में साबुन की बट्टी डिलीवर हो जाने जैसा मामला है। कमल हासन का किरदार शक्तिवेल यहां जवानी, प्रौढ़ावस्था, बुजर्गियत और फिर करीब करीब संन्यास की अवस्था तक में दिखता है। दूसरे नंबर वाला शक्तिवेल कमाल का है। लोग उसका कमाल देखने के इंतजार में ही रह गए इंटरवल के बाद। फिल्म में सबसे ज्यादा निराश कमल हासन ने ही किया है। यूं लगता है कि शंकर के बाद अब उन्होंने एक और ‘इंडियन 2’ मणि रत्नम के साथ बना ली है।
साउथ सिनेमा के हिंदी डब संस्करणों में ऐसी गलतियां होती नहीं है लेकिन, समझ आता कि ‘ठग लाइफ’ की हिंदी डबिंग वाकई सहायकों के ही हवाले रही है। पहले तो लगता है कि शक्तिवेल की बेटी का अपने बेटे को ‘आपका पोता’ कहकर अपने पिता से मिलना चूक हो सकती है। लेकिन, फिल्म खत्म होने से ठीक पहले शक्तिवेल भी जब अपनी पत्नी को इस बच्चे की दादी कहकर संबोधित करता है तो समझ आता है कि ये गलती नहीं लापरवाही है। कॉन्टीन्यूटी की गलतियां इस फिल्म में झौआ भर भरके हैं। मेकअप में कमल हासन खुद ही निपुण हैं और बताते हैं कि इसका ज्ञान उन्होंने हॉलीवुड जाकर हासिल किया है, लेकिन मौत के चंगुल से बच निकले शक्तिवेल का मेकअप अच्छा नहीं है, खासतौर से उनकी हेयर स्टाइलिंग गड़बड़ है। रवि के चंद्रन ने अपने कैमरे का कमाल खूब दिखाया है। मणि रत्नम ब्रांड वाले कुछ सीन भी अच्छे रचे हैं। ए श्रीकर प्रसाद चाहते तो फिल्म की लंबाई थोड़ी छोटी कर सकते थे, पौने तीन घंटे की ये फिल्म बहुत जुलुम है, मणि सर के प्रशंसकों के लिए।
तृषा कृष्णन का काम अव्वल नंबर
‘ठग लाइफ’ देखनी हो तो बस कमल हासन के लिए देखी जा सकती है, लेकिन है बहुत धीरज का काम फिर भी। कमल के बाद फिल्म में सबसे बढ़िया काम तृषा कृष्णन ने किया है। मुंबई के डांस बार से बचाई गई इंद्राणी के किरदार में वह खूब खिली हैं। फिल्म में कमल हासन के गोद लिए बेटे का किरदार सिलम्बरासन ने अच्छा निभाया है। उनकी पत्नी जीवा बनी अभिरामी ने भी बढ़िया काम किया है। चंद्रा बनी ऐश्वर्य लक्ष्मी छोटे रोल में भी प्रभावित करने में सफल रहीं। अली फजल का काम भी उतना ही है। मारधाड़ के सीन के दौरान फिल्म ‘साहो’ में श्रद्धा कपूर अपनी लट ठीक करती दिखी थीं। अली फजल भी यहां अपनी जुल्फें संवारने के चक्कर में अपना असर खो देते हैं। महेश मांजरेकर का काम प्रभावी है, और, अगर उनके किरदार सदानंद और शक्तिवेल की दुश्मनी पर ही ये फिल्म डटी रहती तो इसका असर कुछ और ही होता। फिल्म तकनीकी रूप से बहुत बढ़िया है। अरसे बाद ए आर रहमान के गाने भी फिल्म देखते समय अच्छे लगे, लेकिन फिल्म का बीज ही इतना कमजोर है कि बस क्या कहा जाए..!