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तेरी मेरी कहानी

Fri, 10 Aug 2012 03:47 PM IST
Updated Fri, 10 Aug 2012 03:47 PM IST
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 movie review teri meri kahani
हैलो फ्रैंड्स! आपको तो पता ही है कि प्यार-मोहब्बत की कहानियां बॉलीवुड को जमाने से डॉमिनेट करती रही हैं। अब जरा सोचिए कि प्रेम के अलग-अलग दौर का अंदाज आपको एक ही फिल्म में देखने को मिले तो कितना दिलचस्प होगा। जी हां, आपका अंदाजा सही है। मैं बात करने जा रही हूं कुणाल कोहली की नई फिल्म 'तेरी मेरी कहानी' की- जहां कुछ ऐसा ही करने की कोशिश की गई है।
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कहानी
मैं हमेशा से ही सोचती थी कि क्या 100 साल में प्रेम के बदलते स्वरूप को किसी फिल्म में दिखाया जा सकता है? 'तेरी मेरी कहानी' का प्रोमो देखकर ही मुझे समझ में आ गया (आपको भी आ गया होगा... है न?) कि इस फिल्म में अलग-अलग पीरियड के प्रेम को दिखाया होगा। अब आज की जेनरेशन के लिए यह जानना बड़ा ही दिलचस्प होगा कि 1910 के दौर में प्रेम कितनी मुश्किलों से भरा होता होगा।
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फिल्म शुरू होती है 1960 के दौर से। जहां लखनऊ से रुख़सार (प्रियंका चोपड़ा) अपनी सहेली माही (प्राची देसाई) के साथ घर से भागकर हीरोइन बनने बंबई आ जाती है और सुपरस्टार बन जाती है। गोविंद (शाहिद कपूर) भी अपनी किस्मत आजमाने मुंबई आता है। रास्ते में उसकी मुलाकात सुपरस्टार रुख़सार से हो जाती है।
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दोनों को एक-दूसरे की कंपनी अच्छी लगती है। अनजाने में माही भी गोविंद से प्यार कर बैठती है। दूसरी तरफ 2012 का दौर है, जब मीरा (नेहा शर्मा) से पूरी तरह से ब्रेकअप हुए बिना ही कृष (शाहिद कपूर) को राधा (प्रियंका चोपड़ा) से प्यार हो जाता है।

अब एक और प्रेम कहानी, दौर है 1910 का। जहां जावेद (शाहिद कपूर) एक आवारा लड़का है और लड़कियों के पीछे भागना उसका काम है। जावेद आराधना (प्रियंका चोपड़ा) को देख उस पर फिदा हो जाता है और उसे इंप्रैस करने की कोशिश करने लगता है। फिल्म का टर्निंग प्वाइंट तब आता है जब तीनों ही प्रेम के पंछियों का अलग-अलग वजहों से ब्रेकअप हो जाता है।

निर्देशन
फिल्म के निर्देशक कुणाल कोहली का एक्सपेरिमेंट यह है कि प्रेम के अलग-अलग पंछी लेने के बजाय एक ही जोड़ी को फिल्म में तीन अलग-अलग दौर में अलग-अलग रूप में दिखाया। इसे देखना वाकई दिलचस्प था। फिल्म खालिस रोमांटिक है, यानी अच्छे संगीत, खूबसूरत देसी-विदेशी लोकेशन और बढ़िया ड्रेसेज की गारंटी।

मगर एक मिनट... लव स्टोरी में इस सबके अलावा भी तो कुछ चाहिए? जी हां, एक अच्छी कहानी... लेकिन यकीन जानिए फिल्म में कहानी के नाम पर अगर कुछ था तो सिर्फ हीरो-हीरोइन (प्रियंका चोपड़ा और शाहिद कपूर) को आपस में किसी तरह मिलाना। कुल मिलाकर कहानी पर अच्छी तरह से काम नहीं किया गया। प्रेम के नाम पर कहीं भावनाओं का लेना-देना नहीं है... जबरन प्यार करवाने की कोशिश की गई है। बस, प्रियंका और शाहिद की कैमिस्ट्री अच्छी है।

फिल्म में हीरो-हीरोइन के कॉस्ट्यूम्स, लोकेशन, डायलॉग और अलग-अलग पीरियड का काफी ख्याल रखा गया है लेकिन थोड़ा कहानी और इमोशंस पर भी ध्यान दिया जाता तो 'तेरी मेरी कहानी' एक बेहतरीन फिल्म बन सकती थी। किसी की फिल्म की ये सबसे खराब बात होती है कि दर्शक फिल्म के बारे में पहले से ही समझ जाएं। इस फिल्म के साथ भी कुछ ऐसा ही महसूस हो रहा था और इसी कारण फिल्म में आपकी दिलचस्पी खत्म होने लगती है।

फिल्म का निर्देशन कमजोर है, निर्देशक तीनों दौर को सही से डवलप करने में कामयाब नहीं हुआ। जैसे ही दर्शक फिल्म से जुड़ने की कोशिश करने लगता है तभी अचानक दूसरा दौर शुरू हो जाता है। इसके अलावा साठ के दशक को बहुत अच्छे तरीके से नहीं दिखाया गया है। फिल्म में पीरियड इतनी तेजी से बदलता है कि दर्शक के लिए उसे पचाना काफी मुश्किल हो जाता है। यह फिल्म का बहुत बड़ा माइनस प्वाइंट है। हालांकि कहीं-कहीं दर्शकों को कुछ दृश्यों पर पर हंसी आ सकती है मगर फिल्म पूरी तरह से बांधने में नाकामयाब हुई है।

संगीत
हां इतना जरूर है कि इस फिल्म के म्यूजिक के लिए साजिद-वाजिद को लेना सही फैसला था। फिल्म का म्यूजिक युवाओं को पसंद आएगा। उन्होंने धुनें इस तरह तैयार की हैं कि वह फिल्म के तीनों अलग-अलग दौर से मेल खा जाती है।

क्यों देखें
फिल्म में खास है 100 साल में अलग-अलग दौर में प्रेम के स्टाइल को देखना। इसके अलावा मुझे फिल्म के कुछ डायलॉग पसंद आए खासकर शाहिद कपूर के 1960 और 2012 के... शायद आपको भी दिलचस्प लगें। अब अगर शाहिद और प्रियंका आपके फेवरेट एक्टर हैं और उनकी ऑनस्क्रीन कैमिस्ट्री आप देखना ही चाहते हैं तो हम भला फिल्म देखने से कैसे मना कर सकते हैं।


क्यों न देखें
अब आप पहले ही पकाऊ किस्म की रोमाटिंग फिल्मों से बोर हो चुके हों और कुछ नया देखने की उम्मीद में जा रहे हैं या फिर यह उम्मीद है कि कुणाल हम-तुम जैसी ताजगी से भरी रोमाटिंग फिल्म दोबारा लेकर आए हैं तो मेरा मानना है कि आप निराश होंगे।

बैनर: इरोज इंटरनेशनल मीडिया लिमिटेड, कुणाल कोहली प्रोडक्शन्स
निर्माता: कुणाल कोहली, सुनील ए. लुल्ला, विक्की बाहरी
निर्देशक: कुणाल कोहली
संगीत: साजिद-वाजिद
कलाकार: शाहिद कपूर, प्रियंका चोपड़ा, प्राची देसाई, नेहा शर्मा
रेटिंग: **1/2
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