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Hindi News ›   Entertainment ›   Movie Reviews ›   Mister Mummy Movie Review in Hindi by Pankaj Shukla Riteish Deshmukh Genelia D Souza Mahesh Majrekar Shaad Ali

Mister Mummy Review: सबसे खराब फिल्मों के कंपटीशन में उतरी ‘मिस्टर मम्मी’, शाद अली के नाम पर नया धब्बा

Fri, 18 Nov 2022 08:47 PM IST
Pankaj Shukla पंकज शुक्ल
Updated Fri, 18 Nov 2022 08:47 PM IST
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Mister Mummy Movie Review in Hindi by Pankaj Shukla Riteish Deshmukh Genelia D Souza Mahesh Majrekar Shaad Ali
मिस्टर मम्मी - फोटो : अमर उजाला
Movie Review
मिस्टर मम्मी
कलाकार
रितेश देशमुख , जेनेलिया डिसूजा , राकेश बेदी और महेश मांजरेकर
लेखक
अनन्या शर्मा
निर्देशक
शाद अली
निर्माता
भूषण कुमार , शाद अली , शिवा अनंत और कृष्ण कुमार
रेटिंग
1/5

निर्देशक शाद अली का करियर अपने आप में किसी पाठशाला जैसा है। मणिरत्नम जैसे निर्देशक का असिस्टेंट बनने से पहले जमाना उन्हें मशहूर फिल्मकार मुजफ्फर अली और फायरब्रांड नेता सुभाषिनी अली के बेटे के रूप में जानता था। निर्देशक के रूप में डेब्यू करने की बारी आई तो यशराज फिल्म्स ने मणिरत्नम की आर माधवन स्टारर तमिल फिल्म ‘अलायपायुथे’ का हिंदी रीमेक बनाया ‘साथिया’। फिल्म हिट रही। शाद अली चल निकले। अगली फिल्म ‘बंटी और बबली’ में भी छींका टूटा। शाद अली यशराज फिल्म्स के सितारे बन गए। लेकिन, फिर ‘झूम बराबर झूम’, ‘किल दिल’ और ‘ओके जानू’ की फ्लॉप की हैट्रिक ने उन्हें वहां पहुंचा दिया, जहां वह अब ‘मिस्टर मम्मी’ बना रहे हैं। बीच में उन्होंने एक कमाल फिल्म ‘सूरमा’ भी बनाई, लेकिन जो हाल उनका रितेश देशमुख और जेनेलिया स्टारर इस नई फिल्म में दिख रहा है, लगता नहीं कि आगे उनका कुछ और बना पाने का इरादा भी है।

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Mister Mummy Movie Review in Hindi by Pankaj Shukla Riteish Deshmukh Genelia D Souza Mahesh Majrekar Shaad Ali
मिस्टर मम्मी - फोटो : अमर उजाला, मुंबई

ओटीटी के नए फैसले की बलिहारी
इधर बीते कुछ महीनों से हर शुक्रवार को दर्जनों के हिसाब से फिल्में रिलीज होने लगी हैं। वजह इसकी आप भी समझ लीजिए। बड़े बड़े सितारों के नामों के चक्कर में करोड़ों रुपये डुबा चुके ओटीटी संचालकों को अब समझ में आया है कि जिन फिल्मों को थियेटर में दर्शक पूछते भी नहीं, उनके नाम पर उन्हें कैसे चूना लगाया गया है। लिहाजा अब हर फिल्म निर्माता को अपने पैसे खर्च करके फिल्मों को थियेटर में रिलीज करना जरूरी कर दिया है इन ओटीटी वालों ने। फिल्म चले न चले, पहले से तय रकम इन्हें बनाने वालों को ओटीटी से फिर भी मिल जाती है। सौदा कुछ यूं होता है कि फिल्म पसंद आई तो ये बड़ी रकम मिलेगी और फिल्म पसंद न आई तो उसके दाम कुछ इतने तय हैं कि फिल्म की लागत से ज्यादा रकम फिर भी निर्माता को मिल ही जाए। ऐसे करार करने वाले तमाम अफसरों की अब ओटीटी से छुट्टी हो चुकी है लेकिन ‘मिस्टर मम्मी’ जैसी तमाम फिल्में अभी थियेटर तक पहुंचनी बाकी हैं।

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Mister Mummy Movie Review in Hindi by Pankaj Shukla Riteish Deshmukh Genelia D Souza Mahesh Majrekar Shaad Ali
मिस्टर मम्मी - फोटो : अमर उजाला, मुंबई

रितेश और जेनेलिया की खराब वापसी
ओटीटी के आने के बाद से चित भी मेरी, पट भी मेरी वाले कारोबार का गणित अपने ‘जुगाड़’ से ओटीटी में फिट कर लेने वाले निर्माताओं की लिस्ट जितनी जल्दी पूरी हो जाए, उतना ही हिंदी का भला होगा। नहीं तो हाल ये है कि डेढ़ घंटे की फिल्म ‘मिस्टर मम्मी’ देखने में पसीने छूट जाते हैं। बड़ी उम्मीद थी कि अपनी रील्स के जरिये लाखों दर्शक सोशल मीडिया पर बटोरने वाली रितेश और जेनेलिया की जोड़ी इस फिल्म में धमाल करेगी। लेकिन फिल्म देखने के बाद लगता है कि अगर दोनों की रील्स ही डेढ़ घंटे बैक टू बैक देख ली जाएं तो वह भी इस फिल्म से बेहतर होगा। फिल्म की कहानी बस उतनी ही है जितनी दर्शक ट्रेलर में देख ही चुके हैं। इसके बाद फिल्म में शाद अली ने बस रायता ही फैलाया है।

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Mister Mummy Movie Review in Hindi by Pankaj Shukla Riteish Deshmukh Genelia D Souza Mahesh Majrekar Shaad Ali
मिस्टर मम्मी - फोटो : सोशल मीडिया

सबसे खराब फिल्मों का कंपटीशन
एक दंपती है। दोनों गर्भवती हैं। बस इतनी सी फिल्म है ‘मिस्टर मम्मी’। न कहीं इसके सामाजिक संघर्षों की देश में बवाल मचा सकने वाली कहानी है। न दोनों का कहीं एक जैसी दिक्कत से निपटने का एक जैसा संघर्ष दिखता है। पूरी फिल्म में रितेश और जेनेलिया के बीच में दंपती जैसा कोई रिश्ता न सुख का दिखता है और न ही दुख का। फिल्म की पटकथा इतनी खराब लिखी है कि इसे देखने के लिए पूरा समय सिनेमाघर में बिता लेने वाले को वीरता पुरस्कार दिया जा सकता है। पता नहीं कौन से जमाने में रह रहे हैं शाद अली और क्या समझ कर रितेश और जेनेलिया ने इस फिल्म के लिए हां कर दी होगी? फिल्म इतनी बेढंगी है कि इसकी समीक्षा लिखना भी अपने आप में एक टास्क है। हिंदी सिनेमा मे जब भी सबसे खराब फिल्मों की लिस्ट बनेगी तो तय मानिए कि फिल्म ‘मिस्टर मम्मी’ की गिनती उसकी पहली 10 फिल्मों में जरूर होगी।

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