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Hindi News ›   Entertainment ›   Movie Reviews ›   Laaptaa Ladies Review in Hindi by Pankaj Shukla Aamir Khan Kiran Rao Ravi Kishan Nitanshi Sparsh Pratibha

Laaptaa Ladies Review: ये न्यू मिलेनियल्स की ‘नदिया के पार’ है, रूमाल बड़ा वाला लेकर जाना, रोना खूब आएगा..

Wed, 28 Feb 2024 09:58 PM IST
Pankaj Shukla पंकज शुक्ल
Updated Wed, 28 Feb 2024 09:58 PM IST
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Laaptaa Ladies Review in Hindi by Pankaj Shukla Aamir Khan Kiran Rao Ravi Kishan Nitanshi Sparsh Pratibha
लापता लेडीज रिव्यू - फोटो : अमर उजाला ब्यूरो, मुंबई
Movie Review
लापता लेडीज
कलाकार
रवि किशन , स्पर्श श्रीवास्तव , नितांशी गोयल , प्रतिभा रांटा , सतेंद्र सोनी और दुर्गेश कुमार
लेखक
बिप्लव गोस्वामी , स्नेहा देसाई और दिव्यनिधि शर्मा
निर्देशक
किरण राव
निर्माता
आमिर खान , किरण राव और ज्योति देशपांडे
रिलीज
1 मार्च 2024
रेटिंग
4/5

निर्माता, अभिनेता आमिर खान की पिछली फिल्म ‘लाल सिंह चड्ढा’ को जब मैंने इसकी रिलीज के वक्त अपने रिव्यू में साढ़े तीन स्टार दिए तो सोशल मीडिया पर इसे लेकर बहुत ट्रोलिंग हुई। लोगों ने फोन करके भी भला बुरा कहा, लेकिन यही फिल्म जब ओटीटी पर रिलीज हुई तो लोगों ने इसे जी भरकर देखा, इसकी तारीफ की लेकिन फिल्म सिनेमाघरों में बुरी तरह फ्लॉप रही। अब बारी आमिर खान की बनाई अगली फिल्म ‘लापता लेडीज’ की है। फागुन की बयार के साथ सिनेमाघरों में पहुंच रही ये फिल्म नई फसल के नए बौर जैसी है। ये एक अलग खुशबू है, एक अलग उम्मीद, चंद नए और कुछ अनुभवी कलाकारों की मेहनत से पकने को तैयार एक नई फसल की। सिनेमा अगर समाज से दूर जाने लगे तो लोग इसे खूब कोसते हैं, लेकिन क्या समाज के बीच रहकर बनी किसी फिल्म को लोग अब सिनेमाघर आकर प्यार भी करते हैं, फिल्म ‘लापता लेडीज’ इसका एक और इम्तिहान लेने वाली है।

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Laaptaa Ladies Review in Hindi by Pankaj Shukla Aamir Khan Kiran Rao Ravi Kishan Nitanshi Sparsh Pratibha
लापता लेडीज रिव्यू - फोटो : अमर उजाला ब्यूरो, मुंबई

टीजर और ट्रेलर से इक्कीस निकली फिल्म

फिल्म ‘लापता लेडीज’ के टीजर और ट्रेलर में जो बात इसकी निर्देशक किरण राव नहीं कह पाईं, वह बात फिल्म में बहुत अच्छे से बयां होती है। एक फूल जैसी किशोरी है। नाम भी उसका फूल ही है। ठीक से जवान हो पाने से पहले ही ब्याह दी गई है। सहालग जोर की है तो लाल चुनरी पहने ससुराल को निकली ब्याहताओं की बसों, ट्रेन में तादाद भी बहुत दिखती है। और, इसी लाली में जित देखूं तित लाल जैसे भ्रमजाल में दो दुल्हनें बदल जाती हैं। कहानी शुरू में महज एक गलतफहमी की लगती है। लेकिन, जैसे जैसे इसमें लुटेरी दुल्हनों और बेबस दुल्हनों की कहानी घुलती है, रूह अफजा सा दिखने वाला कहानी का ये शरबत मोदी नगर की जैन शिकंजी बनने में देर नहीं लगाता। बेटियों को आत्मनिर्भर बनाने और उन्हें उनकी सोच के हिसाब से जिंदगी जीने देने के मूलमंत्र पर आधारित फिल्म ‘लापता लेडीज’ मौजूदा दौर के हिंदी सिनेमा में उस कड़ी को मजबूत करती है, जिसके जरिये सिनेमा का समाज से रिश्ता अब तक बना हुआ है।

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Laaptaa Ladies Review in Hindi by Pankaj Shukla Aamir Khan Kiran Rao Ravi Kishan Nitanshi Sparsh Pratibha
लापता लेडीज रिव्यू - फोटो : अमर उजाला ब्यूरो, मुंबई

लेखन टीम को सौ में सौ नंबर

आमिर खान और किरण राव जैसे लोग आखिर ‘लापता लेडीज’ क्यों बनाते हैं? क्यों आमिर खान हजार कहानियां सुनने के बाद बिप्लव गोस्वामी की लिखी ये कहानी चुनते हैं? और, आखिर क्यों ये दोनों कलाकार भी इस कहानी के लिए ऐसे तलाश कर लाते हैं, जिनके परिवारों का सिनेमा से दूर दूर का कोई नाता नहीं है? सवाल और भी बहुत सारे हैं, जवाब इसके सारे इसी फिल्म में छुपे हुए हैं। बिप्लव गोस्वामी की कहानी जवाब देती है कि हिंदी सिनेमा को बजाय रीमेक के भ्रमयुगम में फंसने के मौलिक और देसी कहानियां खोजने में मेहनत करनी चाहिए। स्नेहा देसाई की पटकथा इस बात का जवाब है कि कहानी में अवयव सारे हों तो थोड़ा बताकर, थोड़ा छुपाकर एक फिल्म की पटकथा को कैसे इसके सहज, सरल और मर्मस्पर्शी उपसंहार तक लाया जा सकता है। दिव्यनिधि शर्मा ने अपने संवादों से कहानी के धरातल के खुरदुरेपन को भी बनाए रखा और जहां जरूरत हुई भावनाओं पर रिश्तों का लेप भी अच्छे से लगाया है।

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लापता लेडीज रिव्यू - फोटो : अमर उजाला ब्यूरो, मुंबई

किरण राव का फिर से राजतिलक

फिल्म ‘धोबी घाट’ के कोई 14 साल बाद एक तरह के सिनेमाई वनवास से लौटीं किरण राव का का ये दूसरा रचनात्मक राजतिलक है। किरण राव ने इस फिल्म के लिए अपनी फिल्म प्रोडक्शन कंपनी भी बनाई है, शायद फिल्म के मुनाफे में अपनी अलग भागीदारी के लिए। आमिर का इस फिल्म के लिए कहानी चुनने में अहम साथ उन्हें मिला, लेकिन फिल्म का निर्देशन जिस तरह से गांव, गली और नुक्कड़ों पर जाकर किरण राव ने किया है, वह भी कम आकर्षक नहीं है। फिल्म देखते समय बार बार गोविंद मूनिस निर्देशित ‘नदिया के पार’ के फ्रेम याद आते रहते हैं। वैसा ही सच्चा सा दिखता ग्राम्य जीवन और वैसे ही कहानी के किरदार। किरण राव को अपनी इस असल भारत जैसी दिखने वाली सिनेमाई दुनिया रचने में फिल्म के सिनेमैटोग्राफर विकास नौलखा ने उनकी खासी मदद की है। फिल्म का संगीत राम संपत ने दिया है। बहुत मधुर और मोहक संगीत तो नहीं है फिल्म का लेकिन, राम संपत ने कहानी के सुर साधने की कोशिश पूरी की है।

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Laaptaa Ladies Review in Hindi by Pankaj Shukla Aamir Khan Kiran Rao Ravi Kishan Nitanshi Sparsh Pratibha
लापता लेडीज रिव्यू - फोटो : अमर उजाला ब्यूरो, मुंबई

फिल्म का असली पोटैशियम रवि किशन

और, अब बात फिल्म के कलाकारों की। सोशल मीडिया पर कोई 10 लाख फॉलोअर्स रखने वाली किशोरी नितांशी गोयल इस फिल्म की असल हीरोइन हैं। फूल उनके किरदार का नाम है और वह दिखती भी फूल सी ही मासूम हैं। खोइंचा वाले प्रकरण से लेकर छोटू के साथ वाले सारे दृश्यों में उनका काम लाजवाब है। कलाकंद बनाकर अपनी माई को प्रसन्न करने के प्रसंग में नितांशी के चेहरे की दमक देखने लायक है। उनके साथ फिल्म में प्रतिभा रांटा भी है। बेहद खूबसूरत इस युवती के लिए भी हिंदी सिनेमा में आने वाले समय में अच्छे मौके बनते दिखते हैं। पढ़लिखकर वैज्ञानिक बनने की चाहत रखने वाली और दकियानूसी विचारों वाले एक परिवार में बेटी को बोझ समझने की मानसिकता को चुनौती देने वाली युवती के किरदार में प्रतिभा ने दर्शकों का दिल जीत लिया है। स्पर्श श्रीवास्तव दोनों ‘लापता लेडीज’ के बीच पेंडुलम से डोलते हैं और उनकी लाचारी फिल्म की रफ्तार बनाए रखने के काम आती है। लेकिन, फिल्म का असल पोटैशियम हैं इसमें पुलिस इंस्पेक्टर (पुलिस निरीक्षक) बने रवि किशन। उनका पान खाकर संवाद बोलने का अंदाज निराला है और फिल्म के क्लाइमेक्स में जब वह एक बेटी को उसका आसमान नापने के लिए मुक्त करते हैं, तो दिल जीत ही लेते हैं। छोटू बने सतेंद्र सोनी और हवलदार दुबेजी के किरदार में दुर्गेश कुमार फिल्म में हास्य के छींटे लगातार लगाते रहते हैं। पूरे परिवार के साथ देखी जा सकने ये फिल्म फागुन में एक साथ खूब सारे रंग समेटे आई है। मस्ट वॉच!

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