Kaagaz 2 Review: सतीश और अनुपम की अदाकारी का आखिरी संगम, सबसे बड़ा सवाल, कागज पर लिखे कानून की अहमियत क्या है?
आम आदमी और खास आदमी के बीच इन दिनों खाई इतनी लंबी और गहरी है कि उसे पाट पाना अब बहुत मुश्किल हो चला है। सबके लिए कानून में बराबर अधिकार दिया गया है लेकिन आम आदमी को इसकी जरूरत पड़े तो क्या वाकई कानून उसकी मदद के लिए साथ खड़ा होता है, फिल्म 'कागज 2' इसी की पड़ताल करती एक बहुत ही संवेदनशील फिल्म है। इस कड़ी की पहली फिल्म 'कागज' सीधे ओटीटी पर रिलीज हुई थी, लेकिन 'कागज 2' को सिनेमाघरों में रिलीज किया जा रहा है। लेकिन, सवाल यही है कि ऐसी फिल्में देखने सिनेमाघरों में कितने दर्शक आएंगे। फिल्म यह सवाल उठाती हैं कि कानून सिर्फ कागजों पर ही मजबूत है या इसके जरिये मिले अधिकार आम इंसान के भी कभी काम आ सकते हैं?
फिल्म 'कागज 2' की कहानी दो परिवारों की कहानी है। उदय प्रताप सिंह के पिता राज नारायण सिंह उसे बचपन में ही छोड़कर चले जाते हैं, उदय प्रताप सिंह को इस बात का मलाल रहता है कि अगर पिता की परवरिश में वह पला बढ़ा हुआ होता तो उनके जीवन का लक्ष्य कुछ और ही होता। दूसरी कहानी एक पिता-पुत्री की है। बेटी आर्या रस्तोगी यूपीएससी टॉपर है और आईपीएस अधिकारी बनने वाली है। लेकिन, उसके माता पिता के सारे सपने उस वक्त चकनाचूर हो जाते हैं, जब प्रशासन की लापरवाही से बेटी की मौत हो जाती है। समाज के दूसरे लोगों के लिए यह महज एक और घटना है, लेकिन जिस परिवार के साथ यह घटा है, उस पर क्या बीतती है, यह वही समझ सकता है जो इससे दो चार हुआ हो।
फिल्म 'कागज 2' की कहानी अंकुर सुमन ने शशांक खंडेलवाल के साथ मिलकर लिखी है। सुमन और शशांक फिल्म 'कागज' की लेखन टीम का भी हिस्सा थे और इस। बार भी दोनों ने फिल्म की मूल आत्मा को संभाले रखने की पूरी कोशिश की है। कहानी प्रशासन की उन्ही उदासीनताओं के बारे में है, जिनसे आम जनता काफी परेशान होती है। फिल्म के निर्देशन की जिम्मेदारी साउथ सिनेमा के जाने माने निर्देशक वी के प्रकाश ने संभाली है। आम आदमी की समस्याओं को पर्दे पर पेश करने का फिल्म 'कागज' के निर्देशक सतीश कौशिक का जो दृष्टिकोण रहा, उसी को वी के प्रसाद ने 'कागज 2' में भी संभाले रखा है और इसमें वह सफल भी रहे हैं।
फिल्म 'कागज 2' में एक असहाय बाप की पीड़ा उस समय आंखों में आंसू ले आती है जब भरी अदालत में सहानुभूति तो मिलती है लेकिन उसके इरादों को कानून के घेरे में लाकर उसकी मंशा पर सवाल उठाए जाते हैं। एक आम आदमी की पीड़ा इस दृश्य में जो उभरकर आती है, वह दर्शकों को काफी भावुक कर देती है। दिवगंत सतीश कौशिक इस दृश्य में अपनी अभिनय क्षमता के बेहतरीन प्रदर्शन करते नजर आते हैं। वहीं, वकील राज नारायण की भूमिका में अभिनेता अनुपम खेर का अभिनय भी उनकी काबिलियत का श्रेष्ठ प्रदर्शन रहा। राज नारायण का अपना एक अतीत है जिसकी वजह से बेटा उदय उनको पसंद नहीं करता है। लेकिन, जब बेटे को पिता की सच्चाई का पता चलता है तो वह अपने पिता का साथ देता है।
उदय की भूमिका फिल्म 'कागज 2' में दर्शन कुमार ने निभाई है। बाप-बेटे की भूमिका में क्रमश: अनुपम खेर और दर्शन कुमार के बीच रिश्तों का एक ऐसा ताना-बाना फिल्म की लेखन टीम ने बुना है कि उसे नजरअंदाज कर पाना मुश्किल हो जाता है। इन मुख्य कलाकारों के अलावा स्मृति कालरा, नीना गुप्ता, अनंग देसाई, किरण कुमार और करण राजदान ने भी अपनी भूमिकाएं प्रभावशाली ढंग से निभाई हैं। अनु मूथेदाथ की सिनेमैटोग्राफी, संजय वर्मा का संपादन, और शारिब तोशी का संगीत औसत से बेहतर है।