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Jaya Movie Review: दलित विमर्श बढ़ाने का बेहतरीन मौका चूकी ‘जया’, माही श्रीवास्तव के कंधों पर टिकी फिल्म

Wed, 31 Jul 2024 01:49 PM IST
Pankaj Shukla पंकज शुक्ल
Updated Wed, 31 Jul 2024 01:49 PM IST
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Jaya Movie Review by Pankaj Shukla Worldwide Channel Mahi Shrivastava Daya Shankar Pandey Manu Ratnakar
'जया' रिव्यू - फोटो : अमर उजाला
Movie Review
जया
कलाकार
माही श्रीवास्तव , दया शंकर पांडे , सुकेश आनंद , मनु कृष्णा , महेश आचार्य , धर्मेंद्र सिंह और राव रणविजय आदि
लेखक
धर्मेंद्र सिंह
निर्देशक
धीरू यादव
निर्माता
रत्नाकर कुमार
रिलीज:
2 अगस्त 2024
रेटिंग
2/5

भारतीय सिनेमा में दलितों की कहानियों की कितनी हिस्सेदारी है, इस पर अगर कोई शोध करने बैठे तो ये एक अच्छा विषय सामाजिक जीवन और सिनेमा के बीच टूटते पुल का हो सकता है। हिंदी सिनेमा में विक्की कौशल की फिल्म ‘मसान’ के बाद सीधे दिलजीत दोसांझ की फिल्म ‘अमर सिंह चमकीला’ ही ऐसी फिल्म है जिसका नायक दलित है और जिसे दर्शकों का खूब प्यार भी मिला। मुख्यधारा में दलित हितों की बात करने वाला सिनेमा दक्षिण में खूब बनता है। सिद्धार्थ जैसे अभिनेता व निर्माता भी जब ‘चिट्टा’ जैसी फिल्म बनाते हैं तो प्रेम को जाति की संकरी गलियों से निकालकर रोशनी तक ले आते हैं। भोजपुरी सिनेमा में इस लिहाज से फिल्म ‘जया’ एक नई पहल है। फिल्म कैसी बनी है, उसकी गुणवत्ता की परख से पहले इस फिल्म की तारीफ दो वजहों से की जानी जरूरी है, पहली तो इसका दलित चिंतन और दूसरी वजह है इसका भोजपुरी सिनेमा को एक नई दृष्टि देना।

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Jaya Movie Review by Pankaj Shukla Worldwide Channel Mahi Shrivastava Daya Shankar Pandey Manu Ratnakar
'जया' रिव्यू - फोटो : अमर उजाला ब्यूरो, मुंबई

भोजपुरी प्रमाणन वाली कम बजट की हिंदी फिल्म
फूहड़ता, अश्लीलता और द्विअर्थी संवादों के चलते भोजपुरी सिनेमा ऐसे गर्त में जा चुका है जिसे देखते हुए कोई भी कायदे का तकनीशियन या कलाकार इसके साथ अब अपना नाम जोड़ने से भी परहेज करता है, नहीं तो इसी भोजपुरी सिनेमा से अमिताभ बच्चन, मिथुन चक्रवर्ती और अजय देवगन जैसे सितारों ने अपना नाता जोड़ा है। स्त्री देह की नुमाइश में अपनी सफलता मानने वाले निर्माताओं की दुकान अब जब धीरे धीरे बंद होती दिख रही है तो डिजिटल के नए दौर में इस सिनेमा का पुनर्जीवन होने की आस बंधने लगी है। लेकिन, छल यहां भी है। क्योंकि, जिस फिल्म ‘जया’ के सेंसर सर्टिफिकेट पर इसकी भोजपुरी लिखी है, वह पूरी फिल्म हिंदी में है। भोजपुरी यहां बस कहने भर को बोली गई है। ठीक हालिया रिलीज फिल्म ‘बैड न्यूज’ की तरह जिसे सेंसर सर्टिफिकेट भले हिंदी फिल्म का मिला हो, लेकिन पूरी फिल्म पंजाबी में है और हिंदी वहां बस कहने भर को है।

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Jaya Movie Review by Pankaj Shukla Worldwide Channel Mahi Shrivastava Daya Shankar Pandey Manu Ratnakar
'जया' रिव्यू - फोटो : अमर उजाला ब्यूरो, मुंबई

दलित की बेटी से ब्राह्मण के बेटे का प्रेम
एक कम बजट की हिंदी फिल्म बनाने और उसे भोजपुरी के नाम पर प्रचारित-प्रसारित करने की फिल्म के निर्माता रत्नाकर कुमार और निर्देशक धीरू यादव के पास जो भी वजह रही हो, दोनों ने इसके विषय पर शुरू से आखिर तक टिके रहकर और पूरी फिल्म में अश्लील दृश्यों, फूहड़पन और द्विअर्थी संवादों से दूरी बनाए रखने का प्रशंसनीय काम किया है। फिल्म की कहानी किसी ऐसे कस्बे की है, जिसके किनारे गंगा घाट है और जहां दिन रात छोटी छोटी चिताएं जलती रहती हैं। घाट का डोम राजा अपनी बिटिया जया को अच्छे स्कूल में दाखिला दिलाता है और एक दिन मंच पर इनाम मिलने के समय बिटिया अपने पिता को भी बुला लेती है। इसी के बाद जया का जीवन मुसीबतों में घिरने लगता है। ब्राह्मणों का एक बेटा उससे प्यार करता है, लेकिन जब इस प्रेम को साबित करने की जरूरत होती है तो वह विदेश चला जाता है। यहां जया के साथ आठ-10 साल में जो होता है, वही फिल्म की असली कहानी बनती है।

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'जया' रिव्यू - फोटो : अमर उजाला ब्यूरो, मुंबई

कमजोर पटकथा सबसे कमजोर कड़ी
साफ सुथरी भोजपुरी फिल्मों के दर्शक है, ये बात इससे भी साबित होती है कि फिल्म ‘जया’ के यहां मुंबई में हुए प्रीमियर में पूरा हॉल खचाखच भरा हुआ था। पीछे की कतार में कुछ बेटियां अंग्रेजी में वार्तालाप देर तक करती सुनाई देती रहीं। पड़ोस की सीट पर विराजमान आगंतुक भी भोजपुरी भाषी नहीं थे पर फिल्म में आनंद तलाश रहे थे। फिल्म अपनी कथा वस्तु पर टिकी रहने की कोशिश करती है और फिल्म में शीर्षक भूमिका निभा रहीं माही श्रीवास्तव के बूते नैया पार लगाने की कोशिश में पूरी फिल्म लगी रहती है।। फिल्म का विषय बहुत अच्छा है लेकिन इसे एक सफल फिल्म की पटकथा में तब्दील करने में धर्मेंद्र सिंह इस लिहाज से सफल नहीं रहे कि अगले पल फिल्म में क्या होने वाला है, इसका अंदाजा दर्शकों को शुरू से होता रहता है और फिल्म में कहीं भी चौंकाने वाला घटनाक्रम नहीं है। फिल्म की कहानी समय रेखा पर छलांग लगाती हुई आगे बढ़ती है, लेकिन इसके चलते किरदारों में कोई तब्दीली आती नहीं दिखाई देती।

Jaya Movie Review by Pankaj Shukla Worldwide Channel Mahi Shrivastava Daya Shankar Pandey Manu Ratnakar
'जया' रिव्यू - फोटो : अमर उजाला ब्यूरो, मुंबई

माही और मनु के किरदारों की प्रेम कहानी
फिल्म के कलाकारों में ये फिल्म पूरी तरह माही श्रीवास्तव की है। वह मंजी हुई कलाकार नजर आती हैं और उनका अपने किरदार के चोले में प्रवेश करने की कोशिश करना भी सराहनीय है। हालांकि, श्मशान भूमि वाले दृश्यों में अनावश्यक रूप से कंबल ओढ़े रहना उनके किरदार को कमजोर करता है। माही के अभिनय की अपनी सीमाएं हैं। चुलबुली लड़की के किरदार में वह जंचती हैं लेकिन मां का दर्द उनसे परदे पर वैसा बयां नहीं हो पाता, जैसा होना चाहिए। ग्रीन स्क्रीन पर शूट किए गए उनके कुछ दृश्य भी फिल्म में वैसे के वैसे ही हैं। जया के पिता के किरदार में अभिनेता दयाशंकर पांडे ने अच्छा काम किया है। माही श्रीवास्तव और मनु कृष्णा के किरदारों के बीच पनपती प्रेम कहानी सामाजिक संघर्ष और स्वीकारोक्ति का एक गंभीर विमर्श बनती नजर आता ही लेकिन कमजोर लेखन के चलते मनु कृष्णा का किरदार बीच कहानी से हटा दिया जाता है और एक विरह, विछोह और आघात की जिस पीड़ा का प्रकटन दोनों के बीच यहां हो सकता था, उसमें फिल्म पूरी तरह चूक जाती है।  

Jaya Movie Review by Pankaj Shukla Worldwide Channel Mahi Shrivastava Daya Shankar Pandey Manu Ratnakar
'जया' रिव्यू - फोटो : अमर उजाला ब्यूरो, मुंबई

नायिका का विजय बिंदु नहीं तलाश पाई ‘जया’
तकनीकी रूप से ये एक कमजोर फिल्म है। घुटने पर हाथ रखकर लंगड़ाते घूम रहे एक युवक का एक ही दृश्य में दो बार अलग अलग दिशाओं से निकलना इसके निर्देशन में बरती गई लापरवाही की पोल खोलता है। निर्देशक धीरू यादव ने दृश्यों का भूगोल रचने में भी पर्याप्त तैयारी नहीं की है और सिनेमैटोग्राफर समीर सय्यद उनको वांछित मदद नहीं कर पाए हैं। फिल्म के 90 फीसदी संवाद और सौ फीसदी गाने हिंदी में हैं और फिल्म को विकसित करने में कोई खास मदद नहीं करते हैं। दलित विमर्श का एक बड़ा संदर्भ बिंदु बनने से भी ये फिल्म इसलिए चूक गई है क्योंकि फिल्म के उपसंहार में ये फिल्म इसकी नायिका का विजय बिंदु नहीं तलाश पाती है।

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