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फिल्म समीक्षा: गाना, बजाना और रोमांस की कहानी है बैंजो

Fri, 23 Sep 2016 03:12 PM IST
रवि बुले/अमर उजाला ब्यूरो, मुंबई
रवि बुले/अमर उजाला ब्यूरो, मुंबई Updated Fri, 23 Sep 2016 03:12 PM IST
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film review of banjo

-निर्माताः कृषिका लुल्ला

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-निर्देशकः रवि जाधव

-सितारेः रितेश देशमुख, नर्गिस फाखरी

रेटिंग **


हिट होने के मौसम होते हैं। बैंजो के निर्माता-निर्देशक को अब एहसास होगा कि कुछ दिन पहले फिल्म रिलीज कर देते तो ठीक होता। मुंबई समेत महाराष्ट्र के गणपति पंडालों में बजने वाले गीतों की वजह से कुछ दर्शक मिल जाते। वक्त हाथ से निकल चुका है। निर्देशक रवि जाधव ने मराठी में पुरस्कार जीतने वाली सफल/बेहतरीन फिल्में (नटरंग, बालगंधर्व, बालक पालक, टाइमपास और टाइमपास-2) बनाई हों मगर हिंदी में वह हिंदी वालों जैसे ही हो गई हैं। फार्मूलों पर चलने वाले।

लोकल-ग्लोबल को मिक्स करके जाधव ने फिल्म रची है। बैंजो भारतीय वाद्ययंत्र नहीं है। अमेरिकी डीजे हसीना क्रिस (नर्गिस फाखरी) को ओरीजनल स्ट्रीट म्यूजिक की तलाश है। ताकि कुछ बेहतरीन गाने बना सके। तलाश उसे मुंबई की गलियों में तराट (रितेश देशमुख) से मिलाती। जो बैंजो बजाते हुए अपने लिए सम्मान ढूंढ रहा है। वह तेज-तर्रार है। ग्रुप का लीडर है। हीरो है। बदमाशों को अकेले ठिकाने लगाता है। बैंजो उनके हाथों में कमाल करता है। मगर रितेश एक्टर के रूप में यहां कमाल नहीं दिखा पाते। 

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गाना, बजाना और रोमांस की कहानी है बैंजो

film review of banjo

कई फिल्मों में उन्हें अच्छी कॉमेडी करते देखा गया है, जबकि यहां तो उनके बैंड के बाकी तीन सदस्यों पेपर (आदित्य कुमार), ग्रीस (धर्मेश येलांडे) और वाजा (लेस्ली) के हिस्से कहीं बेहतर कॉमिक संवाद आए हैं। फिल्म का पहला हिस्सा इतना उबाऊ है कि आप सोच में पड़ जाते हैं कि क्या किया जाए? हालांकि दूसरे हिस्से को डायरेक्टर ने संभाला है। रोमांस और म्यूजिक के बीच एक्शन ड्रामा है। टैलेंट हंट के लिए आई हसीना हीरो के प्यार में पड़ जाती है। फिल्म रितेश के इर्द-गिर्द घूमती है। 2012 में आई तेरे नाल लव हो गया के बाद यह उनकी पहली सोलो रिलीज है। 

अतः जितनी प्रतिभा वह दिखा सकते थे, दिखाई। कहानी के केंद्र में संगीत होने के बावजूद फिल्म के गीत- संगीत में बहुत नयापन नहीं है। मुंबई से बाहर फिल्म को पसंद कि जाने की गुंजाइश कम है। एक तरफ जहां पिंक के असर में बात हो रही है कि स्त्री की ना का मतलब ना होता है, बैंजो का खलनायक कहता हैः औरत की ना का मतलब हां होता है। इस मौसम में बहुतों को यह बात भी अच्छी नहीं लगेगी।

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