फ्री ई-पेपर
पर्सनलाइज़्ड फ़ीड
पर्सनलाइज़्ड नोटिफ़िकेशन
चलते-फिरते ख़बरें
लॉयल्टी रिवॉर्ड्स
डाउनलोड करें

सब्सक्राइब करें
Hindi News ›   Entertainment ›   Movie Review ›   Calendar Girls - Movie Review in Hindi

कैलेंडर गर्ल्स समीक्षा: फिल्म में कुछ नया नजर नहीं आता

Fri, 25 Sep 2015 03:53 PM IST
Updated Fri, 25 Sep 2015 03:53 PM IST
विज्ञापन
Calendar Girls - Movie Review in Hindi

-निर्माताः संगीता अहीर/भंडारकर एंटरटेनमेंट

विज्ञापन

-निर्देशकः मधुर भंडारकर
-सितारेः आकांक्षा पुरी, अवनी मोदी, कायरा दत्ता, रूही सिंह, सतरूपा पायने, रोहित रॉय
रेटिंग **

कई बार आपकी पहचान ही मुश्किल बन जाती है। पेज थ्री, कारपोरेट, फैशन और हीरोइन जैसी फिल्मों में मधुर ने जो दिखाया उसकी छवियां बार-बार कैलेंडर गर्ल्स में नजर आती है। यही इस फिल्म की मुश्किल है।

पेशेवर कैलेंडर गर्ल्स की अपनी त्रासदियां हो सकती हैं लेकिन ले-देकर उनके करिअर के लंबे रास्ते व्यावसायिक ग्लैमर की गलियों से गुजरते हैं और मधुर इनकी हकीकतें पहले ही पर्दे पर उतार चुके हैं। ऐसे में फिल्म में नया क्या है, यह ढूंढने की मशक्कत खुद दर्शक को करनी पड़ती है।
विज्ञापन


अगर मधुर के सिनेमा से आप परिचित नहीं हैं तो यह फिल्म आपको ग्लैमरस शॉक दे सकती है। परंतु सिनेमा के ऐसे शौकीन शायद ढूंढने से भी न मिलें जिन्होंने मधुर की फिल्में न देखी हों। फिल्म मध्यम और मैट्रो शहरों की उन लड़कियों की कहानी है, जो ग्लैमर के चमकीले संसार की ओर पतंगे-सी खिंची जाती हैं।
विज्ञापन
विज्ञापन


मधुर ने इस बार कैलेंडर गर्ल्स के बहाने इन लड़कियों का जीवन दिखाया है। कैसे कोई हार जाती है और कैसे कोई जीत कर भी हारती हुई दिखाई देती है। कुल जमा यह भाव आपके जेहन में आता है कि ये दुनिया अगर मिल भी जाए तो क्या है..!

बॉलीवुड में नाम कमाने आई लड़की ऐस्कॉर्ट गर्ल बन जाती है

Calendar Girls - Movie Review in Hindi

फिल्म पांच लड़कियों के 2014 के कैलेंडर पर आने-छाने और उसके बाद उनके संघर्ष को सामने लाती है। कोई हीरोइन बनने के लिए हर किसी की चापलूसी करती और चतुराई दिखाती है तो कोई (कायरा दत्त) फैशन उद्योग में समझौतापरस्त होने की अफवाह का शिकार बन जाती है।

एक लड़की कैलेंडर गर्ल बनते ही एक औद्योगिक घराने की बहू (आकांक्षा पुरी) बनने का फैसला कर लेती तो दूसरी (सतरूपा पायने) क्रिकेट की सट्टेबाजी में इस्तेमाल हो जाती है।

पाकिस्तान से बॉलीवुड में नाम कमाने का सपना लेकर आई नाजनीन मलिक (अवनी मोदी) ऐस्कॉर्ट गर्ल बन कर रईसों की हवस का शिकार होने को मजबूर हो जाती है। वास्तव में ये एक शीर्षक तले छोटी-छोटी कहानियां हैं।

फिल्म में कसावट है मगर कुछ सिरे छूट गए हैं

Calendar Girls - Movie Review in Hindi
फिल्म में कसावट है मगर कुछ सिरे निर्देशक से छूट गए हैं। लड़कियों के परिवार उनके कैलेंडर गर्ल बनते ही परिदृश्य से गायब हो जाते हैं। समाज पीछे रह जाता है। इस तरह मधुर की यह फिल्म उनकी अन्य फिल्मों जैसा कोई बड़ा वक्तव्य छोड़ते हुए खत्म नहीं होती।

अपनी सशक्त फिल्मों से इतर मधुर ने इस फिल्म में थोड़ा कॉमिक टोन रखने का प्रसाय किया है। खास तौर पर बॉलीवुड की फिल्म में नायिका के रूप में पहली फिल्म शूट करने वाली मयूरी चौहान (रूही सिंह) के किरदार के साथ। मयूरी के साथ वह खुद भी कुछेक दृश्यों में फिल्म निर्देशक के रूप में ही पर्दे पर आए हैं।

सतरूपा, अवनी और रूही ने अपने किरदारों को पर्दे पर अन्य कलाकारों के मुकाबले खूबसूरती से उतारा है। फिल्म का गीत-संगीत याद नहीं रह पाता। समय आ गया है कि मधुर अपनी कहानियों के गुलदस्ते में पुरानों को पॉलिश करने के बजाय कुछ नए फूल लगाएं।
विज्ञापन
विज्ञापन
सबसे विश्वसनीय Hindi News वेबसाइट अमर उजाला पर पढ़ें Entertainment News से जुड़ी ब्रेकिंग अपडेट। मनोरंजन जगत की अन्य खबरें जैसे Bollywood News, लाइव टीवी न्यूज़, लेटेस्ट Hollywood News और Movie Reviews आदि से संबंधित ब्रेकिंग न्यूज़।
 
रहें हर खबर से अपडेट, डाउनलोड करें अमर उजाला हिंदी न्यूज़ APP अपने मोबाइल पर।
Amar Ujala Android Hindi News APP Amar Ujala iOS Hindi News APP
विज्ञापन
विज्ञापन
विज्ञापन

एड फ्री अनुभव के लिए अमर उजाला प्रीमियम सब्सक्राइब करें

Next Article

AU ऐप में पढ़ें

Followed