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Bad Boys Ride Or Die Review: 55 का हीरो, 59 का साइड हीरो, फुलटू धमाल मूवी ने दी फ्रेंचाइजी को नई संजीवनी

Fri, 07 Jun 2024 08:02 AM IST
Pankaj Shukla पंकज शुक्ल
Updated Fri, 07 Jun 2024 08:02 AM IST
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Bad Boys Ride Or Die movie Review by Pankaj Shukla Will Smith Martin Lawrence Adil Bilall Jerry Bruckheimer
'बैड बॉयज-राइड ऑर डाइ' रिव्यू - फोटो : अमर उजाला ब्यूरो, मुंबई
Movie Review
बैड बॉयज-राइड ऑर डाइ
कलाकार
विल स्मिथ, मार्टिन लॉरेंस, वनेसा हजेंस, पाओला नुनेंज, एरिक डेन, जैकव सिपियो, मेलैन लिबरड, जॉन सैले आदि
लेखक
क्रिस ब्रेमनर, विल बिआल
निर्देशक
आदिल अल अरबी, बिलाल फलाह
निर्माता
जेरी ब्रकहीमर, विल स्मिथ, चाड ओमन आदि
रिलीज
7 जून 2024
रेटिंग
3.5/5

पहले सिर्फ संदर्भ के लिए ये बात समझने की कोशिश करते हैं। साल 1995 की शुरुआत में हिंदी सिनेमा के दो सुपरसितारों शाहरुख खान और सलमान खान की एक साथ बनी फिल्म ‘करण अर्जुन’ रिलीज हुई। उसी साल की गर्मियों में आई हॉलीवुड फिल्म ‘बैड बॉयज’। अब इधर, शाहरुख और सलमान की साथ में प्रस्तावित एक्शन फिल्म ‘टाइगर वर्सेज पठान’ तमाम चर्चाओं के बीच ‘टाइगर 3’ के आशानुकूल कारोबार न कर पाने के चलते ठंडे बस्ते में है और उधर, फिल्म ‘बैड बॉयज’ के दोनों हीरो विल स्मिथ और मार्टिन लॉरेंस की इस फ्रेंचाइजी की चौथी फिल्म ‘बैड बॉयज-राइड ऑर डाइ’ सिनेमाघरों में एक्शन के ढोल बजा रही है। एक्शन फ्रेंचाइजी फिल्मों ‘डाइ हार्ड’, ‘एक्सपेंडेबल्स’ की पिछली फिल्में देखने के बाद तमाम दर्शकों को यही लगने लगा था कि ये फ्रेंचाइजी अब बंद कर देनी चाहिए। ‘बैड बॉयज’ की पिछली फिल्म भी थकी हुई फिल्म ही लगी थी, लेकिन आदिल और बिलाल की जोड़ी ने इस बार कमाल किया है।

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Bad Boys Ride Or Die movie Review by Pankaj Shukla Will Smith Martin Lawrence Adil Bilall Jerry Bruckheimer
'बैड बॉयज-राइड ऑर डाइ' रिव्यू - फोटो : अमर उजाला ब्यूरो, मुंबई

हर उम्रदराज एक्शन हीरो का सबक
फिल्म ‘बैड बॉयज-राइड ऑर डाइ’ उन सारे सितारों को जरूर देखनी चाहिए जो अपने जीवन के 50 या उससे अधिक साल जी चुके हैं और अब भी एक्शन सिनेमा करने की ख्वाहिश रखते हैं। बढ़ती उम्र के चढ़ते करिश्मे को परदे पर जीने का ये फिल्म एक सबक सा है। इस बार भी कहानी उन्हीं दोनों शैतान पुलिसकर्मियों की है जो सुनते सबकी हैं और करते अपने मन की है। फिल्म की कहानी शुरू ही इनकी नाकाबिले बर्दाश्त हरकतों से होती है। दोनों के हर मुसीबत में शांत रहने का नमूना पेश किया जाता है। और, उधर खबर ये आती है कि इन दोनों पर जरूरत से ज्यादा भरोसा करने वाला इनका बॉस जो अब दुनिया में नहीं है, उसकी अपराधियों से मिलीभगत के सबूत मिले हैं। कहानी के पिछले सिरे कुछ नए तरीके से जुड़ते हैं तो कुछ पुराने तरीकों की गुत्थियां यहां नए सिरे से खुलनी भी शुरू होती हैं। इस पूरी साजिश का पता लगाने निकले बैड बॉयज अपनी उम्र से भी जूझते हैं। एक को दिल का दौरा पड़ता है और उसे ‘कैवल्य’ ज्ञान की प्राप्ति होती है। दूसरे को जब दिल का दौरा पड़ता है तो उसका साथी उसे थप्पड़ पर थप्पड़ रसीद कर वापस होश में लाता है, और शायद किरदार के मोह से बाहर भी।

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Bad Boys Ride Or Die movie Review by Pankaj Shukla Will Smith Martin Lawrence Adil Bilall Jerry Bruckheimer
'बैड बॉयज-राइड ऑर डाइ' रिव्यू - फोटो : अमर उजाला ब्यूरो, मुंबई

फिर मिले चार यार, इस बार कहानी गुलजार
विल स्मिथ और मार्टिन लॉरेंस की केमिस्ट्री इस फ्रेंचाइजी की पिछली फिल्म में पटरी से उतरती दिखाई दी थी। आदिल और बिलाल को पहली बार तब एक बड़ी जिम्मेदारी मिली थी और दोनों ने सारा गुड़ गोबर कर दिया था। लेकिन इस बार दोनों निर्देशकों और दोनों सितारों ने पिछली गलतियों से सबक सीखे हैं। फिल्म ‘बैड बॉयज-राइड ऑर डाइ’ में माइक की शादी में बेस्ट बॉय बने मार्कस को दिल का दौरा पड़ता है और जब वह दूसरे लोक में जाकर अपने बॉस कैप्टन कोनार्ड हावर्ड से मिलता है तो यह दृश्य कहानी में नए बीज बोता है। मार्कस की आत्मा दोबारा अपने शरीर में लौटती है तो उसे लगता है कि वह अब हाल फिलहाल में मरने वाला नहीं। अस्पताल की छत पर जाकर वह खड़ा हो जाता है, तेज रफ्तार ट्रैफिक के बीच वह उल्टी दिशा में चलते हुए सड़क पार कर जाता है। उसे खुद पर गुमान है। लेकिन, जब माइक अपनी पत्नी को दबोचे विलेन पर पिस्तौल तानता है और मार्कस को समझ आता है कि गोली उसको पार कर पीछे जाने वाली है, तो एकदम से उसका ‘कैवल्य’ धराशायी भी हो जाता है।

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'बैड बॉयज-राइड ऑर डाइ' रिव्यू - फोटो : अमर उजाला ब्यूरो, मुंबई

नए जमाने की कहानी के नए से किस्से
फिल्म ‘बैड बॉयज-राइड ऑर डाइ’ में ऐसे तमाम दृश्य चुन चुनकर गढ़े गए हैं जो इस फिल्म को मानवीय अहसासों के बिल्कुल करीब बनाए रखते हैं। हिंदी फिल्मों में इन दिनों खूब हिट हो रहा बाप-बेटे के रिश्तों का फार्मूला भी यहां बेहतरीन तरीके से इस्तेमाल किया गया है। कैप्टन हॉवर्ड की हत्या के जुर्म में सजा काट रहे अपने बेटे को माइक बाहर इसलिए लाता है ताकि वह बैड बॉयज के मिशन में मददगार हो सके लेकिन हॉवर्ड की बेटी किसी भी कीमत पर उसकी जान लेने पर आमादा है। माइक और मार्कस के परिवार भी कहानी के इमोशनल खाके में इंद्रधनुषी रंग भरने में मदद करते हैं। दुश्मनों का हमला होने पर मार्कस के दामाद के फौजी होने का अनुभव जिस तरह फिल्म में इस्तेमाल किया गया है, वह काबिले तारीफ है। इसी तरह सुनसान मनोरंजन पार्क में मटरगश्ती करने वाला विशालकाय मगरमच्छ भी क्लाइमेक्स में एक्शन को नीरस होने से बचाता है।

Bad Boys Ride Or Die movie Review by Pankaj Shukla Will Smith Martin Lawrence Adil Bilall Jerry Bruckheimer
'बैड बॉयज-राइड ऑर डाइ' रिव्यू - फोटो : अमर उजाला ब्यूरो, मुंबई

वीकएंड की मस्ती वाली फिल्म
55 साल के हो चुके विल स्मिथ और 59 साल के हो चुके मार्टिन लॉरेंस ने फिल्म ‘बैड बॉयज-राइड ऑर डाइ’ में पहले अपने उम्रदराज होने की बात मानी है। और, फिर पुराने किरदारों को नए तेवर के साथ पेश करने का नया फॉर्मूला सेट किया है। उम्र के साथ आने वाली दिक्कतों को कहानी का बहुत चतुराई से हिस्सा बनाया गया है और इसी के चलते ये फिल्म दर्शकों से सीधा रिश्ता भी बना पाती है। दोनों की नोकझोंक यहां भी जारी है और भरपूर मात्रा में जारी है। इस साल की गर्मियों में हॉलीवुड की तमाम फिल्मों का हाल भी हिंदी फिल्मों जैसा ही रहा है। ‘फ्यूरियो’ और ‘द फाल गाय’ के बॉक्स ऑफिस तक दर्शकों को न खींच पाने की वजह से अब फिल्म ‘बैड बॉयज-राइड ऑर डाइ’ पर हिट होने का दबाव कहीं ज्यादा है।

Bad Boys Ride Or Die movie Review by Pankaj Shukla Will Smith Martin Lawrence Adil Bilall Jerry Bruckheimer
'बैड बॉयज-राइड ऑर डाइ' रिव्यू - फोटो : अमर उजाला ब्यूरो, मुंबई

आदिल-बिलाल ने जीत लिया मैदान
फिल्म ‘बैड बॉयज-राइड ऑर डाइ’ अपनी कहानी, पटकथा, संवादों के चलते हॉलीवुड सिनेमा के शौकीन दर्शक वर्ग को खूब लुभाती है। आदिल-बिलाल अपने निर्देशन से फिल्म को रफ्तार में दौड़ाते हैं। फिल्म की सिनेमैटोग्राफी और संपादन एक कॉमिक एक्शन थ्रिलर के हिसाब से बिल्कुल चुस्त है। फिल्म का म्यूजिक हालांकि उतना दुरुस्त नहीं है। लेकिन, माइकल बे, खाबे लेम और लियोनल मेस्सी जैसी मशहूर शख्सियतों के स्पेशल अपीयरेंस फिल्म देखते समय दर्शकों के चेहरों पर मुस्कान लाते रहते हैं और यही इस फिल्म का हासिल भी है कि फिल्म जब खत्म होती है तो सब मुस्कुराते नजर आते हैं।

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