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Mohammed Rafi: जब गाते-गाते रो पड़े थे 'शहंशाह-ए-तरन्नुम', आज ही के दिन मोहम्मद रफी ने दुनिया को कहा था अलविदा

Wed, 31 Jul 2024 08:43 AM IST
सुवेश शुक्ला एंटरटेनमेंट डेस्क, अमर उजाला
एंटरटेनमेंट डेस्क, अमर उजाला Published by: सुवेश शुक्ला Updated Wed, 31 Jul 2024 08:43 AM IST
सार

आज 'शहंशाह-ए-तरन्नुम' के नाम से मशहूर मोहम्मद रफी की पुण्यतिथि है। इस अवसर पर हम आज उनकी जिंदगी से जुड़े कुछ किस्से जानेंगे….
 

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Mohammed Rafi death anniversary special singer got emotion during singing know life story
मोहम्मद रफी - फोटो : अमर उजाला

विस्तार

'शहंशाह-ए-तरन्नुम' के नाम से मशहूर मोहम्मद रफी की आवाज आज से 44 साल पहले भले ही खामोश हो गई हो, पर उनके गीत आज भी हमारे बीच मौजूद हैं। मोहम्मद रफी ने अपनी आवाज का जादू इस कदर चलाया कि वह लोगों के दिलों में सदा के लिए बस गए। कहते हैं कि मोहम्मद रफी ने गाने की शुरुआत एक फकीर की नकल करते हुए की थी। उन्होंने अपने जीवन में हर तरह के और हर मिजाज के गाने गाए। उनकी आवाज दिल में यूं उतरती थी कि लोग अपनी सुध खो बैठते थे। आइए आज रफी साहब की पुण्यतिथि के मौके पर उनके जीवन से जुड़ी कुछ बातों को जानते हैं। 
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Mohammed Rafi death anniversary special singer got emotion during singing know life story
मोहम्मद रफी - फोटो : एक्स @FilmHistoryPic
छोटी उम्र में ही शुरू किया गाना
रफी साहब ने महज 13 साल की उम्र में अपनी पहली प्रस्तुति दी थी। अपने शानदार और सुनहरे करियर में उन्होंने 26 हजार से ज्यादा गाने गाए थें। मोहम्मद रफी को पहली बार के एल सहगल ने लाहौर में एक कॉन्सर्ट के दौरान गाना गाने की अनुमति दी थी। 1948 में उन्होंने राजेंद्र कृष्णन का लिखा हुआ गीत ’सुनो सुनो ऐ दुनिया वालों बापू की ये अमर कहानी’ गाया था। यह गीत लोगों को बहुत पसंद आया था। कहते हैं कि तत्कालीन प्रधानमंत्री जवाहरलाल नेहरू ने खुश होकर उन्हें अपने घर पर ही गाना गाने के लिए बुला लिया था।
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Mohammed Rafi death anniversary special singer got emotion during singing know life story
मोहम्मद रफी - फोटो : एक्स @FilmHistoryPic
ये गीत गाते हुए रो पड़े थे रफी साहब
रफी साहब ने अपने करियर कई तरह के गानों को अपनी आवाज दी। उन्होंने जब दर्द भरे गाने गाए तो लोगों की आंखें भर आई। ऐसा ही एक सुपरहिट गाना उन्होंने गाया जिसे गाते हुए वो खुद रो पड़े थे। जी, हम बात कर रहे हैं ‘नीलकमल’ फिल्म के गीत 'बाबुल की दुआएं लेती जा' की। यह ऐसा गाना है, जिसे गाते हुए खुद रफी साहब ही रो दिए थे। ऐसा इसलिए हुआ था क्योंकि एक दिन पहली ही उनकी बेटी की सगाई हुई थी और दो दिन बाद शादी थी। इस गाने को गाते हुए वह अपनी बेटी को याद कर भावुक हो उठे थे। इस गाने के लिए मोहम्मद रफी को नेशनल अवॉर्ड भी मिला था।

 
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Mohammed Rafi death anniversary special singer got emotion during singing know life story
मोहम्मद रफी - फोटो : एक्स
बारिश होने के बावजूद भी जनाजे में हजारों की भीड़
यूं तो किशोर कुमार खुद एक बहुत ही उम्दा और शानदार गायक थे, लेकिन रफी साहब उनकी फिल्मों में गाना गाते थे। दरअसल, फिल्मी पर्दे पर मोहम्मद रफी उनकी आवाज के लिए सबसे सही माने जाते थे। रफी साहब ने उनके लिए 11 गाने गाए थें। मोहम्मद रफी ने 'लैला मजनू' और 'जुगनू' जैसी फिल्मों में अभिनय भी की थी। कहा जाता है जब उनका निधन हुआ तो जोरदार बारिश हो रही थी, बावजूद इसके उनकी अंतिम विदाई में करीब 10 हजार लोग शामिल हुए थे।
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