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जावेद अख्तर: तीन तलाक मामले और वंदे मातरम् विवाद पर गीतकार के बड़े बयान, कहा- 'यह शर्म की बात है...'

Mon, 05 Oct 2026 10:27 PM IST
संदेश मेहरा एंटरटेनमेंट डेस्क, अमर उजाला
एंटरटेनमेंट डेस्क, अमर उजाला Published by: संदेश मेहरा Updated Mon, 05 Oct 2026 10:27 PM IST
सार

Javed Akhtar: दिग्गज स्क्रीनराइटर और गीतकार जावेद अख्तर अपने बेबाक बयानों के लिए जाने जाते हैं। अब उन्होंने तीन तलाक मामले और वंदे मातरम् पर चल रहे विवाद पर अपने विचार रखे हैं। जानिए उन्होंने क्या कहा। 

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Javed Akhtar On Triple Talaq And Vande Mataram Row Its A Shame Says I Will Say Vande Mataram 100 Times
जावेद अख्तर - फोटो : सोशल मीडिया

विस्तार

हाल ही में जावेद अख्तर ने अल्पसंख्यकों के मुद्दों पर बोलने वाले 'सेक्युलर बुद्धिजीवियों' और मुस्लिम समुदाय के नेताओं पर सवाल उठाए हैं। साथ ही उन्होंने चल रहे 'वंदे मातरम्' विवाद को लेकर अपनी बात साफ कर दी है। 
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तीन तलाक मामले पर क्या बोले जावेद? 
इंडियन एक्सप्रेस हिंदी को दिए एक इंटरव्यू में जावेद अख्तर ने मुस्लिम पर्सनल लॉ और तीन तलाक को लेकर बात की। उन्होंने कहा, 'मुस्लिम पर्सनल लॉ 1937 में आया था। हमें 1947 में आजादी मिली। तो आपने इसमें कोई बदलाव क्यों नहीं किया? तीन तलाक पर रोक लगाने के लिए आपको बीजेपी की जरूरत क्यों पड़ी? यह शर्म की बात है। यह कैसा सेक्युलरिज्म है?'
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जावेद अख्तर से जब पूछा गया कि उनकी आलोचना को उनकी नास्तिक सोच के बावजूद बहुसंख्यक वर्ग के नैरेटिव को बढ़ावा देने के तौर पर देखा जाता है, तो उन्होंने कहा, 'यह दुख की बात है कि मुस्लिम समुदाय का एक बहुत छोटा हिस्सा ही समुदाय के भीतर मौजूद सामाजिक समस्याओं और कमियों के खिलाफ आवाज उठाता है। पहले अपना घर ठीक करें, फिर हमें दूसरों की आलोचना करने का हक मिलता है।'
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Javed Akhtar On Triple Talaq And Vande Mataram Row Its A Shame Says I Will Say Vande Mataram 100 Times
जावेद अख्तर - फोटो : इंस्टाग्राम@jaduakhtar
पहली जिम्मेदारी अपने समुदाय की कमियों को सामने लाना है
जावेद अख्तर ने आगे कहा, 'मैं नास्तिक हूं। लेकिन सच यह है कि मेरा जन्म एक मुस्लिम परिवार में हुआ है। इसलिए मेरा सबसे पहला अधिकार और जिम्मेदारी है कि मैं पहले अपने समुदाय की समस्याओं को ठीक करने की कोशिश करूं, उसके बाद किसी और पर उंगली उठाऊं।'

राजनीतिक और सामाजिक मुद्दों पर बात करते हुए जावेद अख्तर ने हिंदू और मुस्लिम समुदायों के बीच सक्रियता की तुलना भी की। उन्होंने कहा कि भारत में कई हिंदू फासीवाद और सांप्रदायिकता के खिलाफ खुलकर आवाज उठाते हैं, लेकिन बहुत कम मुस्लिम लोग अपने समुदाय के भीतर मौजूद कट्टर सोच के खिलाफ बोलते हैं।

उन्होंने कहा कि कोई व्यक्ति हमेशा खुद को पीड़ित बताकर नहीं रह सकता। उनके मुताबिक, उनकी पहली जिम्मेदारी अपने समुदाय की कमियों को सामने लाना है। उन्होंने यह भी कहा कि जब जरूरत होगी, वह दूसरों के बारे में भी बोलेंगे, जैसा कि वह पहले भी करते रहे हैं।

Javed Akhtar On Triple Talaq And Vande Mataram Row Its A Shame Says I Will Say Vande Mataram 100 Times
जावेद अख्तर - फोटो : सोशल मीडिया
वंदे मातरम् विवाद पर भी दिया बयान 
राष्ट्रगीत विवाद मामले पर जावेद अख्तर ने कहा कि उन्हें 'वंदे मातरम्' कहने या गाने में कोई परेशानी नहीं है, लेकिन वह इसमें धार्मिक भावनाओं वाले छंदों को उन पर थोपे जाने के पक्ष में नहीं हैं। खुद को नास्तिक बताने वाले जावेद अख्तर ने कहा कि वह 'वंदे मातरम्' सौ बार खुशी से कह सकते हैं, बशर्ते बात देश की हो, धर्म की नहीं।

जावेद अख्तर ने कहा कि उन्हें 'वंदे मातरम्' कहने से अपने धर्म को लेकर कोई खतरा महसूस नहीं होता। उन्होंने बताया कि वह खुद अपने कई गानों में 'वंदे मातरम्' का इस्तेमाल कर चुके हैं और इस गीत के अपने वर्जन भी लिख चुके हैं। हालांकि, उनकी आपत्ति उन छंदों को गाने के लिए कहे जाने पर है, जिनमें उन्हें धार्मिक भाव नजर आता है।

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जावेद अख्तर (फाइल) - फोटो : पीटीआई
जावेद को इस बात से है आपत्ति 
उन्होंने कहा, 'अब तक मुझे कोई परेशानी नहीं है।' लेकिन जब इस गीत में धर्म की बात आती है, तो उन्हें आपत्ति होती है। उन्होंने कहा, 'एक नास्तिक होने के नाते, मुझसे ऐसे छंद गाने के लिए कहा जा रहा है, जिनमें धार्मिकता है। मुझे नास्तिक होने का अधिकार है।'

जावेद अख्तर के लिए देशभक्ति और धर्म दो अलग-अलग चीजें हैं। उन्होंने कहा कि उन्हें 'भारत माता की जय' कहने में भी कोई परेशानी नहीं है और जब वह ऐसा कहते हैं, तो पूरे दिल से कहते हैं। उन्होंने कहा, 'मुझे अपने देश से प्यार है। मैं वंदे मातरम् सौ बार कहूंगा।'

उन्होंने कहा, 'भारत है मेरी मां।' जावेद अख्तर के मुताबिक, परेशानी तब शुरू होती है, जब इस भावना के साथ किसी और का धर्म भी जोड़ दिया जाता है। उन्होंने कहा, 'मगर तुम अपना धर्म मुझे दे रहे हो। वो तो मुझे किसी का भी नहीं चाहिए, तुम्हारा क्या लूंगा। आप नेशन की बात कीजिए, हम आपके साथ हैं। अब साथ में धर्म के छंद लगा रहे हैं, वो स्वीकार्य नहीं है मुझे।'

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