क्या ऑस्कर अवार्ड में हो रहा गोरे-काले का खेल?
खबरें लगातार पढ़ने के लिए अमर उजाला एप डाउनलोड करें
या
वेबसाइट पर पढ़ना जारी रखने के लिए वीडियो विज्ञापन देखें
अगर आपके पास प्रीमियम मेंबरशिप है तो
87वें एकेडमी अवार्ड के नामांकनों की घोषणा हो चुकी है लेकिन इस बार अकैडमी अवॉर्ड नॉमिनेशन में रंगभेद की आशंका जताई जा रही है।
इन खबरों ने ऑस्कर अवार्ड को विवादों में ला दिया है। आलम ये है कि माइक्रोब्लॉगिंग साइट ट्विटर पर बधाइयों के संदेश कम, रंगभेद से संबंधित बयानबाजियां ज्यादा ट्रेंड कर रही हैं। 2011 के बाद ये पहला मौका है, जबकि सभी वर्गों के पुरस्कार गोरे अदाकारों के पक्ष में गए हैं।
गोरे-काले को लेकर चल रही खबरों में फिल्म निर्माता और चर्चित एंकर ओप्रा विन्फ्रे की फिल्म 'सेलमा' को कोई भी नामांकन नहीं मिलने पर अकैडमी की ज्यादा आलोचना हो रही है। इस फिल्म में मार्टिन लूथर किंग को पर्दे पर अपनी बेहतरीन अदाकारी डेविड ओयेलोवो ने जीवंत कर दिया है।
ऐक्टिंग कैटिगरी के अलावा अकैडमी ने महिलाओं के साथ भी इंसाफ नहीं किया। अनब्रोकेन की निर्देशक ऐंजलिना जोली, गॉन गर्ल की गिलियन फ्लिन और सेलमा की एवा डु वेर्ने को अंतरराष्ट्रीय स्तर पर सराहे जाने के बावजूद ऑस्कर में नॉमिनेशन नहीं मिला।
गलत नाम के उच्चारण पर भी विवाद
इस बार ऑस्कर अवार्ड के साथ रंगभेद के साथ एक और विवाद जुड़ गया है। नामांकनों की घोषणा के समय गलत नाम बोलने पर अकैडमी प्रेजिडेंट शेरिल बून आइजैक्स भी ट्विटर पर मजाक की पात्र बन गई हैं।
बेहतरीन सिनेमटॉग्राफी के लिए फिल्म मिस्टर टर्नर के डिक पोप की जगह डिक पूप नाम बोल दिया। हालांकि उन्होंने तुरंत ही अपनी गलती सुधार ली लेकिन तब तक ये नाम इंटरनेट पर वायरल हो चुका था। डिक पोप ने बाद में मजाकिया प्रतिक्रिया देते हुए कहा कि इसी बहाने मेरा नाम तो ऑस्कर से जुड़ ही गया।