फ्री ई-पेपर
पर्सनलाइज़्ड फ़ीड
पर्सनलाइज़्ड नोटिफ़िकेशन
चलते-फिरते ख़बरें
लॉयल्टी रिवॉर्ड्स
डाउनलोड करें

सब्सक्राइब करें
Hindi News ›   Entertainment ›   Celebs Interviews ›   Qawwali singer and composer Aziz Naza Son Mujtaba Aziz Naza talks about His career struggle and futur plans

'दुनिया के कोने-कोने तक कव्वाली पहुंचाना चाहता हूं', अजीज नाज़ा के बेटे मुज्तबा ने जताई ख्वाहिश

Thu, 20 Nov 2025 07:30 AM IST
ज्योति राघव एंटरटेनमेंट डेस्क, अमर उजाला
एंटरटेनमेंट डेस्क, अमर उजाला Published by: ज्योति राघव Updated Thu, 20 Nov 2025 07:30 AM IST
सार

Mujtaba Aziz Naza Exclusive Interview: कव्वाली को दिलचस्प अंदाज में पेश करने वाले अजीज़ नाज़ा साहब अब इस दुनिया में नहीं हैं। मगर, उनकी विरासत को उनके बेटे मुज्तबा अज़ीज़ नाज़ा बखूबी आगे बढ़ा रहे हैं। हाल ही में वे अमर उजाला के दफ्तर आए। यहां उनसे शानदार और यादगार गुफ्तगू हुई। पढ़िए कुछ रोचक अंश:

विज्ञापन
Qawwali singer and composer Aziz Naza Son Mujtaba Aziz Naza talks about His career struggle and futur plans
मुज्तबा अज़ीज़ नाज़ा - फोटो : अमर उजाला

विस्तार

'झूम बराबर झूम शराबी', 'देख तमाशा लकड़ी का' और 'चढ़ता सूरज धीरे-धीरे', जैसी कव्वालियों को अमर करने वाले दिवंगत कव्वाल, सिंगर और कंपोजर अजीज़ नाज़ा साहब के बेटे मुज्तबा पिता की राह पर चलकर उनका नाम चमका रहे हैं। उनके भाई मुनीर इसमें उनका साथ देते हैं। हालांकि, मुज्तबा अज़ीज़ नाज़ा के लिए यह सफर आसान नहीं रहा। मगर, उन्हें धुन ऐसी चढ़ी कि हर चुनौती का सामना करते हुए वे अपनी मंजिल पर आगे बढ़ते गए। अपनी यादों की गुल्लक से हाल ही में मुज्तबा ने कई यादगार बातें साझा कीं...

विज्ञापन


'उनके कैसेट्स सुनकर सीखा..आज मुझे सुनकर लोगों को उनकी याद आती है', बेटे ने सुनाए अज़ीज़ नाज़ा से जुड़े किस्से

विज्ञापन

Qawwali singer and composer Aziz Naza Son Mujtaba Aziz Naza talks about His career struggle and futur plans
अज़ीज़ नाज़ा-मुज्तबा अज़ीज़ नाज़ा - फोटो : इंस्टाग्राम

पिताजी का नाम था आपके साथ, उनके कॉन्टेक्ट, दुनिया कई किस्से सुनाती है। फिर मुंबई में संघर्ष से क्यों गुजरना पड़ा?
दस से बारह साल का अरसा बीत चुका था डैडी को गुजरे। वो तो थे नहीं, सिर्फ उनका नाम ही था। उनका होना और सिर्फ नाम होने में काफी फर्क होता है। मगर, यह है कि उनका नाम तो था ही। मगर, कई बार उनका नाम होना मेरे लिए और मुश्किल पैदा कर देता था। कभी-कभी झिझक भी होती थी कि मैं अजीज़ नाज़ा का बेटा हूं। मुझे वहां पर इंतजार करना है। मगर, सारी चीजों को सहकर और नजरअंदाज करके आगे बढ़ गए। इन चीजों का सामना करना भी पड़ता है'।

Qawwali singer and composer Aziz Naza Son Mujtaba Aziz Naza talks about His career struggle and futur plans
मुज्तबा अज़ीज़ नाज़ा - फोटो : इंस्टाग्राम

कव्वाली का इतिहास काफी पुराना है। अमीर खुसरो ने इसकी शुरुआत की। कव्वाली काफी लंबे वक्त तक सूफियाना रही। फिर इश्कियाना हुई। नई पीढ़ी को कव्वाली से जोड़ने में कुछ कमी रह गई शायद?
'हां कह सकते हैं ऐसा। इसकी वजह भी यही रही है कि लोगों को नया कंटेंट नहीं मिल पा रहा है। पुरानी चीजों को लोग कितना सुनेंगे। अमीर खुसरों की तरफ से इसकी शुरुआत हुई थी। पारसी, फिर उर्दू का इस्तेमाल हुआ। पहले भगवान और खुदा की शान और इबादत का जरिया था। फिर गुरू और भक्त के बीच में मुरीदी के रूप में शामिल रही। फिर धीरे-धीरे इसका दायरा खुल गया। आशिकाना कव्वाली बनने लगीं। एक जमाने में तो कव्वाली से फिल्म चल जाती थीं। बिना कव्वाली के फिल्म अधूरी मानी जाती थी। अब यह फिल्मों से दूर इसलिए भी है कि लोगों ने इसे समझना कम कर दिया। आज भी कोई कव्वाली आती है तो फेमस होती है। जैसे 'बजरंगी भाईजान' में 'भर दो झोली' काफी पसंद की गई। आज भी कव्वाली आती है तो लोग सुनते हैं। लेकिन, इसमें मेहनत लगती है। आज भी कव्वाली का कंटेंट इतना रिच है और लुभाने वाला है कि इससे इनकार नहीं कि कव्वाली का आज भी बहुत महत्व है। लोग दिलचस्पी भी लेते हैं। कव्वाली ही सूफी म्यूजिक है'।

विज्ञापन

Qawwali singer and composer Aziz Naza Son Mujtaba Aziz Naza talks about His career struggle and futur plans
मुज्तबा अज़ीज़ नाज़ा - फोटो : इंस्टाग्राम

अजीज साहब का इंतकाल तो 1992 में हो गया था। बीच में ऐसी अफवाह सी चली कि इंतकाल हो गया और जब वे गए तो उनकी जेब में सिर्फ एक रूपया था?
कमाल की बात है कि अफवाह फैलती भी आग की तरह है। मुझे दुनियाभर से कॉल आए। मुझे लोग सहानुभूति दे रहे थे। बहुत सारे लोगों को पता ही नहीं था कि अजीज साहब हैं ही नहीं अब। फिर मैंने कहा कि यह सब फेक है। मैंने सोशल मीडिया पर भी रिएक्ट किया था। यह तो सच्चाई है कि जो आया है, उसे जाना ही है। इंसान खाली हाथ जाता है। अभी धर्मेंद्र जी के मामले में गैर-जिम्मेदाराना रवैया देखने को मिला। उमर उजाला ने कोई ऐसी खबर नहीं चलाई। यह जमाने से इसी तरह जिम्मेदारी से काम करता है। जिन लोगों ने धर्मेंद्र के निधन की खबर दिखाई, यह बहुत गैर-जिम्मेदाराना बात है।

Qawwali singer and composer Aziz Naza Son Mujtaba Aziz Naza talks about His career struggle and futur plans
मुज्तबा अज़ीज़ नाज़ा - फोटो : इंस्टाग्राम

आप कव्वाली का और अपना भविष्य कैसे देखते हैं? क्या आपको अपनी एक अलग पहचान बनाने की ख्वाहिश होती है?
बिल्कुल ख्वाहिश होती है। मैं कव्वाली सूफी म्यूजिक को बहुत आगे देखना चाहता हूं। दुनिया के कोने-कोने में देखना चाहता हूं। जेन-जी को बताना चाहता हूं। नए तरीके से लाना चाहता हूं कि वह इसे सुनें। मैं कव्वाली को बहुत बड़ी जगह पर देखना चाहता हूं'।

पूरा इंटरव्यू यहां देखें

विज्ञापन
विज्ञापन
विज्ञापन
विज्ञापन
विज्ञापन

एड फ्री अनुभव के लिए अमर उजाला प्रीमियम सब्सक्राइब करें

Next Article

AU ऐप में पढ़ें

Followed