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इंटरव्यू: 'दायरा' की कहानी सुनकर क्या बोलीं करीना? मेघना गुलजार ने खोले राज; बताया क्या है सबसे बड़ी कमाई
सार
Meghna Gulzar Interview: निर्देशक मेघना गुलजार की फिल्में सिर्फ कहानियां नहीं कहतीं, सवाल भी छोड़ जाती हैं। अब वह ‘दायरा’ लेकर आ रही हैं, जिसमें करीना कपूर और पृथ्वीराज सुकुमारन नजर आएंगे। एक इंटव्यू में मेघना ने फिल्म से जुड़ी कई बातें साझा कीं।
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मेघना गुलजार
- फोटो : अमर उजाला
विस्तार
अमर उजाला से बातचीत में मेघना गुलजार ने फिल्म की कहानी और कानून-व्यवस्था जैसे गंभीर मुद्दे पर बात की। उन्होंने करीना कपूर और पृथ्वीराज सुकुमारन की फिल्म के लिए हामी से लेकर बॉक्स ऑफिस को लेकर भी अपनी सोच साझा की। पढ़िए पूरी बातचीत:
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दायरा
- फोटो : सोशल मीडिया
‘दायरा’ की कहानी का विचार आपके मन में कैसे आया?
'मेरे हिसाब से दायरा ऐसी चीज है, जो आपको बांध भी सकता है और आजाद भी कर सकता है। यह इस बात पर निर्भर करता है कि आप उस दायरे को किस तरह देखते हैं और उसे किस तरह जीते हैं। जहां तक फिल्म की बात है, तो यह मुख्य रूप से कानून-व्यवस्था की कहानी है।
इसमें पुलिस के दो अधिकारी हैं, जो अपने दायरे भी निभाते हैं और कानून के दायरे में भी रहते हैं। कई बार वही कानून उन्हें बांधता है और कई बार आगे बढ़ने का रास्ता भी दिखाता है। यही इस फिल्म की कहानी है।
बाकी, इस कहानी का विचार मेरे पास कोविड के दौरान आया था। 2020 में जंगली पिक्चर्स ने मुझसे संपर्क किया और मुझे यह कहानी बनाने के लिए चुना। उस वक्त यह करीब 45 पन्नों की थी। मुझे पता था कि इसके बाद मैं ‘सैम बहादुर’ बनाने वाली हूं। लेकिन यह भी यकीन था कि ‘सैम बहादुर’ के बाद जब मैं इस पर काम शुरू करूंगी, तब तक यह विषय पुराना नहीं होगा।'
'मेरे हिसाब से दायरा ऐसी चीज है, जो आपको बांध भी सकता है और आजाद भी कर सकता है। यह इस बात पर निर्भर करता है कि आप उस दायरे को किस तरह देखते हैं और उसे किस तरह जीते हैं। जहां तक फिल्म की बात है, तो यह मुख्य रूप से कानून-व्यवस्था की कहानी है।
इसमें पुलिस के दो अधिकारी हैं, जो अपने दायरे भी निभाते हैं और कानून के दायरे में भी रहते हैं। कई बार वही कानून उन्हें बांधता है और कई बार आगे बढ़ने का रास्ता भी दिखाता है। यही इस फिल्म की कहानी है।
बाकी, इस कहानी का विचार मेरे पास कोविड के दौरान आया था। 2020 में जंगली पिक्चर्स ने मुझसे संपर्क किया और मुझे यह कहानी बनाने के लिए चुना। उस वक्त यह करीब 45 पन्नों की थी। मुझे पता था कि इसके बाद मैं ‘सैम बहादुर’ बनाने वाली हूं। लेकिन यह भी यकीन था कि ‘सैम बहादुर’ के बाद जब मैं इस पर काम शुरू करूंगी, तब तक यह विषय पुराना नहीं होगा।'
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फिल्म दायरा
- फोटो : इंस्टाग्राम
फिल्म के लिए करीना और पृथ्वीराज की प्रतिक्रिया कैसी थी?
'दोनों की प्रतिक्रिया इतनी तुरंत थी कि कई बार मुझे खुद यकीन नहीं हुआ। मुझे पता था कि पृथ्वीराज उस वक्त तीन फिल्मों में काम कर रहे थे। उन्होंने कहा, ‘मुझे नहीं पता कि मैं वक्त कैसे निकालूंगा, कब करूंगा, कैसे करूंगा, लेकिन मैं करूंगा जरूर।’ और ये फैसला उन्होंने तकरीबन एक घंटे के अंदर ले लिया था।
वहीं करीना की बात करूं तो मैंने उन्हें बस एक मैसेज किया कि मैं आपके साथ काम करना चाहती हूं। उन्होंने कहा, ‘मैं भी करना चाहती हूं।’ करीना का ऐसा कहना ही मैं अपनी कमाई समझती हूं। मैंने उनसे पूछा कि क्या मैं आपसे मिल सकती हूं, इस फिल्म के बारे में बात करनी थी। उनका जवाब आया, ‘मैं वैसे भी आपके साथ फिल्म कर रही हूं। फिर भी हम मिल सकते हैं।’ बस यहीं से हमारी जर्नी शुरू हो गई।'
'दोनों की प्रतिक्रिया इतनी तुरंत थी कि कई बार मुझे खुद यकीन नहीं हुआ। मुझे पता था कि पृथ्वीराज उस वक्त तीन फिल्मों में काम कर रहे थे। उन्होंने कहा, ‘मुझे नहीं पता कि मैं वक्त कैसे निकालूंगा, कब करूंगा, कैसे करूंगा, लेकिन मैं करूंगा जरूर।’ और ये फैसला उन्होंने तकरीबन एक घंटे के अंदर ले लिया था।
वहीं करीना की बात करूं तो मैंने उन्हें बस एक मैसेज किया कि मैं आपके साथ काम करना चाहती हूं। उन्होंने कहा, ‘मैं भी करना चाहती हूं।’ करीना का ऐसा कहना ही मैं अपनी कमाई समझती हूं। मैंने उनसे पूछा कि क्या मैं आपसे मिल सकती हूं, इस फिल्म के बारे में बात करनी थी। उनका जवाब आया, ‘मैं वैसे भी आपके साथ फिल्म कर रही हूं। फिर भी हम मिल सकते हैं।’ बस यहीं से हमारी जर्नी शुरू हो गई।'
फिल्म 'दायरा'
- फोटो : इंस्टाग्राम@kareenakapoorkhan
यह वास्तविक घटना से जुड़ी कहानी है। ऐसे विषयों को लेकर आपकी क्या जिम्मेदारी होती है?
'मेरा मानना है कि आप किसी वास्तविक घटना या सामाजिक मुद्दे पर फिल्म बना रहे हैं, तो उसे जिम्मेदारी से पेश करना बहुत जरूरी है। सबसे पहले आपकी नीयत साफ होनी चाहिए कि आप यह कहानी क्यों कहना चाहते हैं?
मेरे लिए फिल्म और उसके किरदारों की गरिमा हमेशा जरूरी रही है। किरदार असली हों या काल्पनिक, उनकी गरिमा बनी रहनी चाहिए। यह जिम्मेदारी पूरी फिल्म बनाने के दौरान रहती है और जहां तक ऐसे विषयों की बात है, तो ये मुझे खुद ढूंढ लेते हैं। मुझे इन्हें तलाशने नहीं जाना पड़ता।
शायद इसलिए क्योंकि इनमें मुश्किल हालात से लड़ने और आगे बढ़ने की ताकत होती है। ये हमारी आज की जिंदगी और हाल के इतिहास से जुड़ी होती हैं, इसलिए मुझे इनकी कहानियां पसंद आती हैं।'
'मेरा मानना है कि आप किसी वास्तविक घटना या सामाजिक मुद्दे पर फिल्म बना रहे हैं, तो उसे जिम्मेदारी से पेश करना बहुत जरूरी है। सबसे पहले आपकी नीयत साफ होनी चाहिए कि आप यह कहानी क्यों कहना चाहते हैं?
मेरे लिए फिल्म और उसके किरदारों की गरिमा हमेशा जरूरी रही है। किरदार असली हों या काल्पनिक, उनकी गरिमा बनी रहनी चाहिए। यह जिम्मेदारी पूरी फिल्म बनाने के दौरान रहती है और जहां तक ऐसे विषयों की बात है, तो ये मुझे खुद ढूंढ लेते हैं। मुझे इन्हें तलाशने नहीं जाना पड़ता।
शायद इसलिए क्योंकि इनमें मुश्किल हालात से लड़ने और आगे बढ़ने की ताकत होती है। ये हमारी आज की जिंदगी और हाल के इतिहास से जुड़ी होती हैं, इसलिए मुझे इनकी कहानियां पसंद आती हैं।'
दायरा
- फोटो : इंस्टाग्राम
फिल्म बनाते वक्त बॉक्स ऑफिस कलेक्शन आपको प्रभावित करता है?
'नहीं। मैं इस चीज को अपने ऊपर हावी होने नहीं देती कि अगर मैं इस तरह शूट करूंगी, ऐसा करूंगी, तो मेरी फिल्म इतने करोड़ कमाएगी। मुझे नहीं लगता कि हममें से किसी भी फिल्ममेकर के पास ऐसा कोई फॉर्मूला है कि यह करने से फिल्म हिट होगी या सुपरहिट होगी।
वरना किसी भी फिल्म की ओपनिंग छोटी नहीं होती, किसी फिल्म का बॉक्स ऑफिस खराब नहीं होता। इसलिए बेहतर यही है कि आप अपनी फिल्म और अपनी कहानी के प्रति वफादार रहें और बाकी सब दर्शकों पर छोड़ दें।'
'नहीं। मैं इस चीज को अपने ऊपर हावी होने नहीं देती कि अगर मैं इस तरह शूट करूंगी, ऐसा करूंगी, तो मेरी फिल्म इतने करोड़ कमाएगी। मुझे नहीं लगता कि हममें से किसी भी फिल्ममेकर के पास ऐसा कोई फॉर्मूला है कि यह करने से फिल्म हिट होगी या सुपरहिट होगी।
वरना किसी भी फिल्म की ओपनिंग छोटी नहीं होती, किसी फिल्म का बॉक्स ऑफिस खराब नहीं होता। इसलिए बेहतर यही है कि आप अपनी फिल्म और अपनी कहानी के प्रति वफादार रहें और बाकी सब दर्शकों पर छोड़ दें।'