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शेखर सुमन का खुलासा, शशि कपूर के व्यक्तित्व को जानना है तो 'उत्सव' देख लीजिए

Sat, 09 Dec 2017 11:50 AM IST
टीम डिजिटल/ अमर उजाला
टीम डिजिटल/ अमर उजाला Updated Sat, 09 Dec 2017 11:50 AM IST
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Shekhar Suman disclosed, if you want to know the personality of Shashi Kapoor then see film Utsav

निर्माता शशि कपूर की सबसे चर्चित फिल्मों में थी, 'उत्सव'। इस फिल्म से शेखर सुमन ने इंडस्ट्री में कदम रखा। भाई-भतीजावाद की बहस के इस दौर में जाने कैसे बिना जान-पहचान के शेखर सुमन को 'उत्सव' मिली। इससे शशि कपूर के व्यक्तित्व का भी पता चलता है। शशि कपूर और 'उत्सव' मिलने की कहानी शेखर सुमन ने बयां की अमर उजाला के पाठकों के लिए...

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मैं 21 वर्ष की आयु में दिल्ली से मुंबई आया। आने से पहले दिल्ली में पुराने जमाने की एक्ट्रेस शम्मी आंटी की फिल्म 'पिघलता आसमान' में छोटा-सा रोल किया था। इसमें शशि कपूर, राखी, रति अग्निहोत्री थे। मैं दिल्ली में रैपेटरीज में काम करता था,  छह सौ रुपये महीना पर। शूटिंग पर शम्मी आंटी से कहा था कि मुंबई आऊंगा, तो मिलूंगा। मदद करेंगी? उनका फोन नंबर ले लिया।
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दो-तीन साल बाद पहुंचा, तो उनके घर बांद्रा में जाकर मिला। उन्होंने कहा क्या कर रहे हो? मैंने कहा कुछ नहीं। अगले दिन उन्होंने मुझे फिल्म के सेट पर बुलवाया। वहां शशि जी शूटिंग कर रहे थे। उनके अकेले के सीन थे। 'पिघलता आसमान' अब भी बन रही थी। 
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मिनटों में मिला ऑफर
शम्मी आंटी ने उनसे मिलवाया कि ये शेखर सुमन है। दिल्ली से आया है। शशि जी अकेले बोर हो रहे थे। उन्होंने बात शुरू कर दी, ‘क्या करते हो, कहां से हो?’ मैंने बताया एक्टिंग करता हूं, फिल्मों में काम करना चाहता हूं। बातों के बीच वह दो दफे शॉट देकर आए। तीसरी दफा आकर बैठे और बोले, ‘मैं फिल्म बना रहा हूं।’ मेरे रोंगटे खड़े हो गए। उन्होंने कहा, ‘उत्सव' उसमें रेखा हीरोइन है।

पहली बार अमिताभ बच्चन विलेन का रोल कर रहे हैं। शम्मी कपूर, ओम पुरी, पद्मिनी कोल्हापुरी, रति अग्निहोत्री, कमल हासन भी हैं। (बाद में कुछ कारणों से फिल्म की स्टार कास्ट बदल गई) दो वर्जन में बन रही है, हिंदी-अंग्रेजी।’ मैंने सोचा अब बचा क्या, छोटा-मोटा रोल होगा? वह बोले, ‘फिल्म में नायक की जगह खाली है... करोगे रोल?’ मैं हैरान रह गया। पता नहीं क्या-क्या बोलने लगा और अंत में कहा, आप मजाक कर रहे हैं? उन्होंने कहा, ‘क्या शशि कपूर मजाक करेगा? ये मेरी सबसे महंगी फिल्म है। एक से डेढ़ करोड़ की’

Shekhar Suman disclosed, if you want to know the personality of Shashi Kapoor then see film Utsav

गिरीश, चारुदत्त आया है
शशि जी ने डायरेक्टर गिरीश कर्नाड का फोन नंबर दिया। मैंने उनसे बात की। उन्होंने विले पार्ले में घर बुलाया। दरवाजा उनकी पत्नी सरस्वती ने खोला और आवाज लगाई, ‘गिरीश, तुम्हारा चारुदत्त आया है।’ मैंने बाद में उनसे पूछा था कि आपने ऐसे कैसे कहा, तो वह बोलीं, ‘मुझे लगा कि साक्षात चारूदत्त खड़ा है। मुंह से निकल गया।’

गिरीश से बातें हुईं, तो उन्होंने कहा कि स्क्रीन टेस्ट देना पड़ेगा। उन्होंने आर. के. स्टूडियो में आने की डेट दी। वहां पहुंचा, तो देखी युवाओं की भारी भीड़। मैं थोड़ा मायूस हुआ। सबके ऑडिशन हुए, तो अंत में गिरीश ने आकर कहा कि आप लोग घर जा सकते हैं... सिवाय शेखर सुमन के।

कहानी में ट्विस्ट
15-20 दिन हुए, कोई जवाब नहीं आया। टेंशन से मुझे बुखार आ गया। एक दिन एक्टर के. के. रैना घर आए। मैं बहन के पास रहता था। उन्होंने कहा कि यार तुम उत्सव के नायक बन गए हो। मैंने कहा, तुम्हें कैसे मालूम? मुझे तो खबर नहीं है। वह बोले कि मैंने गिरीश को श्याम बेनेगल से कहते सुना।

लेकिन शशि जी या गिरीश के पास से मुझे कोई खबर नहीं आई। उन दिनों सुधीर मिश्रा के बड़े भाई सुधांशु मिश्रा पूना इंस्टीट्यूट में डिप्लोमा फिल्म बना रहे थे। उसमें एक्टिंग का बुलावा आया। शशि जी के दोनों बेटे करण और कुणाल कपूर चारुदत्त का रोल करना चाहते थे। पूना में भी ऐक्टर्स के बीच उत्सव की चर्चा हो रही थी। तभी किसी ने कहा कि आखिर शशि जी ने बेटे करण को चारुदत्त का रोल दे दिया है। मेरा खून सफेद हो गया। 

Shekhar Suman disclosed, if you want to know the personality of Shashi Kapoor then see film Utsav

थोड़ी-सी कठिनाई
दो-तीन दिन बाद मैं पृथ्वी थियेटर गया। अनुपम खेर और हम कुछ दोस्त वहां चाय पीते थे। थियेटर के सामने शशि जी का ऑफिस था, तो मैं वहां झांकने लगा। देखा, शशि जी पौधों को पानी दे रहे हैं। मुझे देखा और बोले, ‘अरे! इधर आओ, इधर आओ।’ मैं गया। बोले, ‘फिल्म करनी है कि नहीं? अरे! जाओ, तुम्हें चुन लिया गया है। गिरीश के पास पेपर हैं। साइन करो।’

आप सोचिए 21 साल के लड़के को बिना किसी जान-पहचान, सिफारिश के 'उत्सव' जैसी फिल्म मिली! मैं पटना गया, मां-बाबूजी का आशीर्वाद लेने और तब अचानक गिरीश के फोन ने बिजली गिराई... अभी थोड़ी-सी कठिनाई है। रेखा...!!

वह आईं, देखा और चल दीं
गिरीश ने कहा कि अभी रेखा की हां बाकी है। मैंने कहा कि ऐसा क्यों? उन्होंने कहा कि फिल्म में बहुत सारे प्रणय दृश्य हैं... वह देखना चाहती हैं कि कौन है नया लड़का! गिरीश बोले, ‘बस प्वॉइंट वन परसेंट ही चांस है कि वह ना कहें।’ मैंने कहा कि पर चांस तो है? बहरहाल, लौट कर आया, तो कई दिन मुझे पृथ्वी थिएटर में बिठाया जाता। रेखा जी आने वाली हैं, देखेंगी।

हर गाड़ी की आहट पर मैं देखता कि कहीं ये वो तो नहीं। खैर, एक दिन रेखा आईं। एंबेसेडर से उतरीं। मैं राम-राम करके खड़ा हुआ। उन्हें हैलो कहा, उन्होंने हैलो कहा और सीधे अंदर। पल भर में शशि जी के ऑफिस में। अंदर उन्होंने कहा होगा लड़का पसंद है, क्योंकि बाद में मिठाइयां बंटी। मैं नतमस्तक हूं शशि जी का कि आज मैं जो कुछ भी हूं, उसका सारा श्रेय उन्हें ही जाता है। 

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