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पाक में 'बजरंगी भाईजान' देखने वालों में असली चांद नवाब

Mon, 03 Aug 2015 03:14 PM IST
Updated Mon, 03 Aug 2015 03:14 PM IST
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Salman khan's Bajrangi Bhaijaan fever in Pakistan

भारत का पता नहीं लेकिन पाकिस्तान में हर वो शख्स जो घरेलू चखचख, लाइन ऑफ कंट्रोल पर होने वाली टकटक, राजनीति की पकपक और मीडिया की बकबक से परेशान है, कुछ देर के लिए सही मगर दिमाग ठंडा रखने के लिए और कुछ नहीं तो इन दिनों 'बजरंगी भाईजान' देखने के लिए सिनेमा हॉल में घुस जाता है।

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अंदाजा लगाएं कि कराची प्रेस क्लब में ये पहली भारतीय फिल्म थी, जो दिखाई गई और देखने वालों में असली चाँद नवाब भी थे। सिनेमा हॉल में फिल्म के सारे शो हाउसफुल चल रहे हैं।
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सिनेमा जाओ तो तीसरा हफ्ता शुरू होने के बावजूद टिकट बाबू कहता है, कि कहो तो पांच दिन बाद का दे दूं। लिहाजा हम सात दोस्तों को शनिवार रात के शो की टिकट मिली और रात एक बजे भी हाल खचाखच भरा हुआ था।

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'खुद तो बना नहीं सकते, दूसरे बनाते हैं तो कीड़े निकालते हो'

Salman khan's Bajrangi Bhaijaan fever in Pakistan

फिल्म देखने के बाद हममें से एक ने पंडित बनने की कोशिश की, 'अरे यार इन हिन्दुस्तानियों को कुछ पता ही नहीं... भला बताओ समझौता एक्सप्रेस के डिब्बों पर तो ताला लगाया जाता है, ताकि कोई यात्री नीचे न उतर सके फिर मुन्नी ट्रेन से नीचे कैसे उतर गई।'

हम सबने उसे घूरते हुए कहा कि चुप, खुद तो बना नहीं सकते, दूसरे बनाते हैं तो कीड़े निकालते हो। दिल्ली हो या इस्लामाबाद, सब ढिंढोरा पीटते हैं कि 'पिपल टू पिपल कान्टैक्ट' होना चाहिए, वीजा आसान होना चाहिए, जितने लोग आपस में मिलेंगे उतनी ही गलतफहमिया कम होंगी।

मगर जिनके पास इंटरनेट की सुविधा नहीं, उन करोड़ों लोगों को ना तो पुस्तक, अखबार और ना न्यूज चैनल यहां देखने को मिलता है, वहां पर पीपल टू पील कॉन्टैक्ट का जरिया सिर्फ फिल्म ही रह जाती है।

'इस फिल्म में उम्मीद है, जो लोगों को खींच रही है'

Salman khan's Bajrangi Bhaijaan fever in Pakistan

शायर जॉन एलिया ने कहा है, 'एक ही हादसा तो है और वो ये कि आज तक बात कही नहीं गई, बात सुनी नहीं गई।' कल्पना से फूटेगी असलियत 'बजरंगी भाईजान' की कहानी आज के दिन में तो एक कल्पना ही लगती है लेकिन कल्पना ही तो वो बीज है, जिससे असलियत फूटती है।

इसीलिए तो दोनों तरफ की जनता तीसरे हफ्ते सिनेमा हॉल की ओर उमड़ रही है। कोई आशा, उम्मीद तो है जो पब्लिक को यूं खींच रही है। शायर फैज अहमद फैज ने कहा है, 'बला से हम ने देखा तो और देखेंगे, फरोगे-गुलशनो-सौते-हजार का मौसम'

पहले आमिर खान की पीके और अब बजरंगी भाईजान। थैक्यू कबीर खान, सलमान खान, नवाजुद्दीन सिद्दीकी और प्यारी सी मुन्नी हर्षाली मल्होत्रा। मेरी दुआ है कि ये टीम अपनी अगली टीम अपनी असली लोकेशन पर शूट कर सकें... अस्सलाम वलेकुम, जय बजरंग बली।

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