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ISRO के इस वैज्ञानिक पर लगा था जासूसी का आरोप, अब आर माधवन की फिल्म में दिखाई जाएगी पूरी कहानी

Wed, 31 Oct 2018 02:09 PM IST
एंटरटेनमेंट डेस्क, अमर उजाला
एंटरटेनमेंट डेस्क, अमर उजाला Updated Wed, 31 Oct 2018 02:09 PM IST
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ROCKETRY  r madhavan film teaser out story based on ISRO Scientist Nambi Narayanan
ROCKETRY - फोटो : screengrab from rocketry teaser

एक्टर आर माधवन इसरो के पूर्व वैज्ञानिक एस. नंबी नारायणन पर बन रही फिल्म  'रॉकेट्री: द नंबी इफेक्ट' लेकर आ रहे हैं। कुछ मिनट पहले ही फिल्म का टीजर और पहला पोस्टर रिलीज किया गया है। आर माधवन की यह फिल्म हिंदी, अंग्रेजी, तमिल, तेलगु और मलयालम में बन रही है। इस फिल्म का निर्देशन अनंत महादेवन और एक्टर आर. माधवन ने किया है।

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टीजर की शुरुआत में रॉकेट लॉन्च होते हुए दिखाया गया है। इसी के साथ आंकड़ों के जरिए ये बताया गया है कि कैसे मंगल मिशन को पूरा करने में अमेरिका की स्पेस संगठन नासा को 19 बार प्रयास करना पड़ा। रूस ने यह मिशन 16 प्रयासों के बाद पूरा किया जबकि भारत ने इन दोनों देशों से आधी कीमत में पहली बार में ही यह मिशन पूरा कर लिया था। टीजर देखने के बाद यकीनन आपको अपने देश पर गर्व होगा।

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ROCKETRY  r madhavan film teaser out story based on ISRO Scientist Nambi Narayanan
एस. नंबी नारायणन - फोटो : file photo
फिल्म की कहानी एक ऐसे वैज्ञानिक की है जिसे जासूस घोषित कर दिया गया। 24 साल वो इसके खिलाफ लड़ता रहा और उसे इंसाफ मिलने में दो दशक से ज्यादा का समय लग गया। आर माधवन की इस फिल्म में आपको वो सब देखने को मिलेगा जो नंबी नारायणन की जिंदगी में घटा है।

इन पर बन रही है फिल्म
एस. नंबी नारायणन भारतीय अंतरिक्ष अनुसंधान संगठन (इसरो) के एक वरिष्ठ अधिकारी के रूप में क्रायोजेनिक्स डिपार्टमेंट में इंचार्ज थे। नंबी 1970 के समय से लिक्विड फ्यूल वाले इंजनों के क्षेत्र में काम कर रहे थे जो आगे चलकर भारत को बहुत फायदा पहुंचाते। लेकिन 1994 में नंबी को जासूसी के झूठे आरोप में गिरफ्तार कर लिया गया था। नंबी और उनके साथियों पर पाकिस्तान को इसरो रॉकेट इंजन की सीक्रेट जानकारी और अन्य जानकारी दूसरे देशों को देने के आरोप थे। इंटेलिजेंस ब्यूरो के अधिकारियों ने नारायणन से पूछताछ शुरू की। हालांकि नारायणन ने आरोपों का खंडन किया और इसे गलत बताया। 

सुप्रीम कोर्ट ने केरल सरकार द्वारा इस मामले की फिर से जांच के आदेश को खारिज कर दिया और कोर्ट ने 1998 में उन्हें दोषों से बरी कर दिया। अदालत ने कहा कि नंबी नारायण को गिरफ्तार किया जाना गैरजरूरी था, उन्हें मानसिक रूप से प्रताड़ित किया गया। 14 सितंबर 2018 को चीफ जस्टिस दीपक मिश्रा की अगुवाई वाली पीठ ने सुप्रीम कोर्ट ने उत्पीड़न का शिकार हुए इसरो वैज्ञानिक नारायणन को 50 लाख रुपये का मुआवजा देने का आदेश दिया। कोर्ट ने इस मामले में एक जूडिशल जांच का भी आदेश दिया।


बता दें सिबी मैथ्यू वो अफसर हैं, जिन्होंने इस जासूसी कांड की जांच की थी। CBI ने भी अपनी रिपोर्ट में नंबी की गिरफ्तारी के लिए इन्हीं अफसरों को जिम्मेदार ठहराया था।

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