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फिल्म प्रमोशन के लिए हत्यारे का हीरो जैसा सम्मान!

Wed, 28 Oct 2015 03:59 PM IST
Updated Wed, 28 Oct 2015 03:59 PM IST
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Randeep Hooda meets reel Charles Sobhraj in the Kathmandu jail

आजकल बॉलीवुड फिल्म निर्माता-निर्देशक-कलाकार अपनी फिल्मों के प्रमोशन के लिए किसी भी हद तक जा रहे हैं। इसका हालिया उदाहरण काठमांडू के जेल में देखने को मिला है। यहां बॉलीवुड अभिनेता रणदीप हुड्डा ने जघन्य अपराधों का पर्याय बन चुके चार्ल्स शोभराज से न केवल मुलाकात की है, बल्कि उनके साथ ऐसे पेश आए जैसे वह कोई असल जिंदगी के हीरो हों।

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द टाइम्स ऑफ इंडिया को दिए गए एक साक्षात्कार में उन्होंने बताया है कि उन्होंने हाल ही में काठमांडू जाकर चार्ल्स शोभराज से मुलाकात की है। यही नहीं यहां उन्होंने चार्ल्स से अपनी फिल्म 'मैं और चार्ल्स' के पोस्टर पर ऑटोग्राफ भी लिया है। यही नहीं रणदीप हूड्डा का कहना है कि "चार्ल्स का इतिहास बेशक अच्छा नहीं था, मगर वो बेगुनाह था। हर अपराधी खुद को बेगुनाह मानता है।"
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गौरतलब है कि 12 कत्लों के इल्जाम में कई दफा जेल जाने और फिर फरार होने की कोशिश करने वाले चार्ल्स शोभराज के बारे में रणदीप जब बोले तो बहुतों को समझ नहीं आया कि ये उनकी निजी राय है या फिर उनके फिल्मी किरदार चार्ल्स की। हालांकि बाद में रणदीप ने स्पष्ट किया कि अभी मैं किरदार में हूं और चार्ल्स, जो मैं बना हूं, बड़ा इनोसेंट है।"
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लेकिन सवाल ये है कि एक अपराधी जिसे न्यायालय ने हत्या व जघन्य अपराध का दोषी मानते हुए सजा दी है, महज अपनी फिल्म के प्रमोशन के लिए इस तरह का बर्ताव करना चाहिए। अगली स्लाइड में पढ़िए, कुख्यात चार्ल्स शोभराज की पूरी कहानी।

जब वह आजाद होता था तो...

Randeep Hooda meets reel Charles Sobhraj in the Kathmandu jail

जब वह आजाद होता था तो पूरी दुनिया की पुलिस उसके पीछे रहती थी और जब वो कैद में है तब भी जेल के बाहर पुलिसवालों की नींद हराम रहती है। जरा सोचिए, कोई शख्स एक साल में लाखों डॉलर कमा ले और उसकी जिंदगी इस संतोष के साथ जेल में बीते कि एक दिन वह जेल से छूटेगा और फिर अपनी पुरानी जिंदगी में वापस लौट आएगा। वह कैसा होगा?

इस शख्स पर बनी फिल्म का ट्रेलर रिलीज होने के बाद ये खबर फिर से चर्चा में आ गई है। जी हां, हम यहां बात कर रहे हैं सीरियल किलर चार्ल्स शोभराज की। जिसे कभी 'बिकनी किलर' कहा गया तो कभी 'सांप' जैसी संज्ञा दी गई। अब इस पर हिन्दी में फिल्म बनी है। शोभराज के किरदार को बॉलीवुड के होनहार अभिनेता रणदीप हुड्डा ने पर्दे पर इसे हूबहू उतारने की कोशिश की है।

शोभराज वैसे तो वियतनामी-भारतीय है पर उसने फ्रांस की नागरिकता ले ली थी। हत्या के जुर्म में उसे उम्रकैद की सजा मिली। उस पर कई हत्याओं के आरोप लगे जिसके लिए उसे फांसी की सजा होनी चाहिए थी लेकिन कई हत्याओं को कथित रूप से अभियोजन पक्ष ने ही छिपा लिया।

चार्ल्स एक चालाक और शातिर अपराधी है। हत्या, लूटपाट, नशीली दवाएं बेचना, आभूषणों की चोरी इत्यादि उसके लिए सामान्य काम है। उसके जोखिम और साजिश से भरपूर जिंदगी को मीडिया में इतनी जगह मिली कि वह मशहूर हो गया।

जेल में भी वह इतने मजे से रहता है कि कोई सुने तो ईर्ष्या हो जाए। जेल में रहने के बावजूद उसके पास टाइपराइटर, टीवी, रेफ्रीजिरेटर, और एक बड़ा पुस्तकालय हुआ करता था। इसके अलावा वह अपने साथी कैदियों को खुश करने के लिए ड्रग्स भी रखता था। फिलहाल चार्ल्स नेपाल के काठमांडू जेल में बंद है। बेशक चार्ल्स को वहां पहली जेल जैसी सुविधाएं मुहिया नहीं कराई गई हैं लेकिन वह फिर भी यदाकदा चर्चा में आता रहता है।

चार्ल्स शोभराज के मानसिक बीमारी के पीछे क्या था?

Randeep Hooda meets reel Charles Sobhraj in the Kathmandu jail

जिस समय भारतीय अदालत से 52 वर्षीय शोभराज को हत्या के जुर्म में कड़ी सजा मिली थी। उसी दौरान उसने दिल्ली के तिहाड़ जेल में रहते हुए अपनी जिंदगी पर बनने वाली हॉलीवुड फिल्म के लिए 15 मिलियन डॉलर यानी आज की मुद्रा दर के हिसाब से 90 करोड़ रूपयों का सौदा किया। और तो और जब वह पेरिस से लौटा था तो उसने मिडिया को अपना इंटरव्यू देने की लिए भी 5000 डॉलर वसूले थे।

अब एक बार फिर शोभराज पर फिल्म बनकर तैयार है। इस बार कहानी हिन्‍दी में है। भारतीय दर्शकों के लिए है। ट्रेलर में इसकी झलक दिख गई है कि फिल्म में शोभराज की असल जिंदगी के कितने करीब जाने की कोशिश की गई है। अब इंतजार 30 अक्टूबर का रहेगा, जब फिल्म रिलीज होगी। लेकिन उससे पहले एक बार चार्ल्स को जान लीजिए, तब आपके फिल्म देखना मजा दोगुना हो जाएगा।

चार्ल्स की मनोदशा को बचपन के दुष्प्रभाव, दिमाग पर चोट लगना, अत्यधिक उदासीन होना या माता-पिता का क्रूर व्यवहार होना से नहीं जोड़ा जा सकता। ये सारी चीजें सीरियल किलरों की पृष्ठभूमि को बयां करती हैं। लेकिन चार्ल्स शोभराज के मानसिक बीमारी के पीछे क्या था?

पत्रकार रोबर्ट हर्ज़ ने लिखा कि मनोवैज्ञानिक बॉब हरे ने अपने शोध के आधार पर बताया कि यह जरुरी नहीं हैं कि जो लोग बुरा बर्ताव करे उन्हें पहले कोई मानसिक आघात हुआ हो। उनका कहना है कि शोभराज लोगों को सेक्स के दौरान आई खिन्नता की वजह से नहीं मारता था। बल्कि वह लोगों को अपने फायदे के लिए मारता था। वह उन लोगों के पासपोर्ट तथा दूसरे पहचान संबंधी कागजों का उपयोग तस्करी तथा कई गैर कानूनी धंधे चलाने में करता था।

वह उन लोगों को ही मरता था जो उसके रास्ते में होते थे

Randeep Hooda meets reel Charles Sobhraj in the Kathmandu jail

वह उन लोगों को ही मरता था जो उसके रास्ते में होते थे या फिर जिसको मारने से उसको फायदा होता था। भारत में उसके मुकदमे के दौरान रिचर्ड नेवेल नाम की एक पत्रकार को चार्ल्स ने बताया कि उसने अपने व्यवसाय के लिए लोगों का कत्ल किया या करवाया।

चार्ल्स शोभराज का बचपन उसके माता–पिता के रहने के बावजूद एक परित्याग किए हुए बच्चे की भांति था। भारतीय पिता और अविवाहित वियतनामी मां के बीच आपसी मतभेद का असर बड़े हो रहे चार्ल्स पर पड़ा।

इसके कारण उसका बचपन उदासियों में बीता। पहले बच्चे के जन्म के बाद ही उसके पिता ने उसकी मां को छोड़ दिया। उसकी मां सोंग का कहना था कि इस अलगाव की वजह कारण उसके पिता ही थे। उसके पिता चार्ल्स के लिए बचपन में ही कुछ करना चाहते थे, पर चार्ल्स दिमाग में यह बैठ गया था कि उसके पिता उसे अपनी ही तरह बनाना चाहते थे।

अंततः चार्ल्स की मां सोंग एक फ्रेंच सैन्य अधिकारी से मिलीं और उन दोनों ने शादी कर ली। लेफ्टिनेंट अल्फोंस डारेव ने सोंग के बच्चे को अपनाया परन्तु उसे अपना नाम देने से इंकार कर दिया।

"मेरे अपराधिक कार्यों को हवा देने वाला एशिया है"

Randeep Hooda meets reel Charles Sobhraj in the Kathmandu jail

चार्ल्स के नए पिता लेफ्टिनेंट अल्फोंस का व्यवहार ठीक था परन्तु उसके और सोंग से पैदा हुए बच्चे यानी उसके सौतेले भाई की वजह से वह अपने ही घर में बाहरी जैसा महसूस करने लगा। आगे चल कर अल्फोंस लड़ाई के दौरान मानसिक तनाव की बीमारी से ग्रसित हो गया, जिससे उसका बचा जीवन अस्पताल में बीता।

शोभराज को पारिवारिक माहौल मिलना मुश्किल था। जिससे वह परिवार से धीरे-धीरे दूर होता जा रहा था, जिसका गहरा प्रभाव उस पर पड़ा। उसकी झूठ बोलने की प्रवित्तियां, बात न मानना, बुरा व्यवहार करना, स्कूल ना जाना, अनुशासन में न रहना...ये सभी उसके अपराधिकता को दर्शाती थी। मार्सिले में रहते हुए चार्ल्स ने कितनी बार अपने माता-पिता को एक करने की कोशिश की, परन्तु ऐसा नहीं हो सका।

पत्रकार नेविल लिखती हैं कि चार्ल्स कहता था कि उसकी जिंदगी फ्रेंच कानून के खिलाफ थी और उसका प्यार वियतनाम के साथ था। वह कहता, "मेरे अपराधिक कार्यों को हवा देने वाला एशिया है।" नेवेल ने लिखा है कि वह जब इस तरह से बोलता था तो मनोवैज्ञानिक तौर से काफी प्रभावित करता था।

इस तरह जेल के अनुकूल बना लेता था

Randeep Hooda meets reel Charles Sobhraj in the Kathmandu jail

चार्ल्स जेल कई बार गया। वह अपने आप को इस तरह जेल के अनुकूल बना लेता था, कि लगता था वहां सब उसके जानने वाले हैं। लेकिन एक घटना वर्ष 1963 की है जब वह पहली बार जेल गया था।

भयानक और खूंखार कैदियों के बीच चार्ल्स वहां के लिए छोटी मछली था। लेकिन चार्ल्स को कराटे का ज्ञान था जिसका वह अपने बचाव के लिए इस्तेमाल करता था। 16वी शताब्दी में बना पोईसी जेल पेरिस शहर से दूर एक एकांत जगह पर था। पहले वह बैरागियों का निवास था लेकिन बाद में फ्रेंच क्रांति के समय उसे जेल में तब्दील कर दिया गया था।

इस कैदखाने की दीवारें इतनी मोटी और ऊंची थीं कि इस दुनिया का बाहरी दुनिया का कोई वास्ता नहीं था। इसमें बने जेल के कमरे इतने संकरे थे कि केवल उसमे सोया जा सकता था। दिन के समय कैदी बाहर निकल कर छोटी-छोटी टोलियों में रहते थे।

चार्ल्स शोभराज की जीवनकथा लिखने वाले लेखक थॉमसन कहते हैं, "जब वह जेल के अन्दर था तो वहां की दुनिया देखकर उसकी रूह कांप उठी। शोभराज जेल में चुपचाप ही रहता था। उसे जो भी मांगना होता था वह इशारे से मांगा करता था। वहां के जेलर उसे किताब पढ़ने के लिए कहते थे, पर वह नहीं पढ़ता था।"

'उसे सजा देने से पहले एक बार मनोचिकित्सक की सलाह जरूर लें'

Randeep Hooda meets reel Charles Sobhraj in the Kathmandu jail

वहां फेलिक्स नाम का एक अमीर आदमी उससे टकराया। उसको लोगों की मदद करना अच्छा लगता था वह हर हफ्ते जेल में आता था, और वहां लोगों की समस्याएं सुनता था। जहां तक संभव होता था उनकी मदद करता था। चार्ल्स यह देखकर बड़ा प्रभावित हुआ, और उसे अपना आदर्श बना लिया तथा उसे अपने रक्षक के रूप में मानने लगा।

फेलिक्स ने चार्ल्स और उसके पिता के बीच सामंजस्य बिठाने की कोशिश भी की। साथ में चार्ल्स और उसकी मां को भी मिलाया। यह कुछ हद तक सफल भी रहा। इस तरह फेलिक्स ने चार्ल्स का मानसिक संतुलन बनाए रखने और उसे एक सही रास्ते पर लाने की कोशिश की।

इस दौरान उसे कुछ दिन बाद पैरोल पर रिहा कर दिया गया लेकिन वह अपने घातक व्यवहार के कारण दुबारा 8 महीने के लिए जेल आ गया। शोभराज के सजा के समय फिलिक्स ने जज को पत्र लिख कर उसके अच्छे व्यवहार के बारे में बताया था तथा यह भी कहा था कि उसे सजा देने से पहले एक बार मनोचिकित्सक की सलाह जरूर लें।

'सेंटाल एक खूबसूरत पारसी लड़की थी'

Randeep Hooda meets reel Charles Sobhraj in the Kathmandu jail

सेंटाल एक खूबसूरत पारसी लड़की थी, जो अपने माता- पिता के साथ रहती थी। एक पार्टी के दौरान वह चार्ल्स से मिली। उसके बाद वह जल्द ही चार्ल्स के करीब आ गई।

दरअसल, चार्ल्स की शारीरिक बनावट ऐसी थी कि ऐसा संभव ही नहीं था कि कोई भी लड़की उसके आकर्षण से मुक्त रह सके और उस पर फिदा न हो जाए। और फिर उसके पास अपनी बहादुरी के किस्से भी थे।

चार्ल्स ने सेंटाल को बताया कि वह साइगॉन के एक धनी परिवार से है। उसके बोलने का अंदाज बिलकुल किवियों की तरह था। इस तरह उसने सेंटाल को शादी के लिए तैयार कर लिया, लेकिन इसके बावजूद सेंटाल के माता-पिता को वह शादी के लिए नहीं मना सका।

सेंटाल के माता-पिता फ्रेंच कैथोलिक प्रथा को माननेवालों में से थे। उन्हें चार्ल्स से शादी इसलिए मंजूर नहीं थी, क्योंकि चार्ल्स के पिता कैथोलिक समुदाय से नहीं थे। सेंटाल कहती थी, "मुझे फर्क नहीं पड़ता की वह अमीर है या नहीं।

उसके बाद आठ महीने के जेल के दौरान वह हमेशा उसके साथ रहती थी। वह अपने दोस्तों तथा साथ काम करने वाले लोगों को ये बताती थी, कि उसे सेना में भर्ती करने के लिए बुलाया गया था।

सम्पर्क में आने वाले लोगों को भी वह लूटता रहा

Randeep Hooda meets reel Charles Sobhraj in the Kathmandu jail

धीरे-धीरे समय बीतने के साथ-साथ उसने अपने घोटालों से काफी धन एकत्र कर लिया। इसके बाद सेंटाल के माता-पिता थोड़े सन्तुष्ट हो गए और चार्ल्स से उसकी शादी करा दी।

कुछ दिनों बाद सेंटाल को महसूस हुआ कि वह गर्भवती हो चुकी है तो उसी समय चार्ल्स ने यूरोप छोड़ने का निर्णय लिया। वह यहां ओरिएंट क्षेत्र का काम संभलता था। जहां से वह पूरे फ्रांस में नकली चेक के जरिए धोखाधड़ी का काम करता था।

चार्ल्स एक बार फिर फेलिक्स से मिला और उसकी कार एक-दो दिन के लिए उधार मांगी। इसके बाद उसने अपना कमाया हुआ पूरा धन उस कार में भरा और पूर्वी यूरोप के रास्ते देश छोड़ दिया।

इस बीच उसके सम्पर्क में आने वाले लोगों को भी वह लूटता रहा। अंततः फेलिक्स से मांगी हुई कार के साथ इस्तांबुल जा पहुंचा। और अंत में वह भारत आ गया, जहां सेंटाल ने चार्ल्स के बच्चे को जन्म दिया। इस बीच पेरिस में अधिकारियों की एक टीम चार्ल्स और उसकी पत्नी के बारे में पूछताछ के लिए चार्ल्स के दोस्तों से मिल रही थी।

उसने चोरी की गई कारों की दलाली करनी शुरू कर दी

Randeep Hooda meets reel Charles Sobhraj in the Kathmandu jail

भारत में आने के बाद वह एक 'फ्रेंच सोसाइटी' से जुड़ गया। चार्ल्स एक ऐसा व्यक्ति था, जो आसानी से किसी भी साथ मेलजोल बना लेता था। उसने यहां के अमीर लोगों में अपनी पहचान बना ली।

सेंटाल तो एक सुन्दर और आकर्षक दिखने वाली महिला थी ही। उसके साथ एक प्यारा बच्चा भी था। इसके कारण लोगों ने उनका चाय और पार्टी देकर स्वागत किया।

सेंटाल अपनी शादी के बाद भी चार्ल्स के काम के बारे में बिलकुल नहीं जानती थी। वह चार्ल्स से उसके काम के बारें में पूछती थी, पर वह स्पष्टता से कुछ नहीं बताता था। इस प्रकार वह कई महीने बीतने के बाद भी अपना काम करता रहा। पुलिस को इस बात की खबर तक नहीं थी।

1970 के दौरान उसने चोरी की गई कारों की दलाली करनी शुरू कर दी। वह अमेरिकन, यरोपियन, फ्रेंचमैन तथा रईस भारतीयों (जो विदेशी कारों के रखने के शौकीन थे) को बेचता था। वह पाकिस्तान तथा ईरान से कारों की चोरी करता और भारत में बॉर्डर के रास्ते लाता था।

भारत के बॉर्डर पर तैनात कुछ सुरक्षा कर्मी भी चार्ल्स की मदद करते थे। उसके बदले में चार्ल्स उन्हें पैसे भी देता था। वह भारत में इसकी नीलामी करता था।

'चार्ल्स उसे काफी आभूषण लाकर देता था'

Randeep Hooda meets reel Charles Sobhraj in the Kathmandu jail

चार्ल्स का यह धंधा काफी अच्छा चल रहा था। इस बीच वह घर से दूर रहता था तो उसे सेंटाल की याद भी सताती थी। चार्ल्स उसे काफी आभूषण लाकर देता था। इसी बीच चार्ल्स को एक लत लग गई वह थी। जुए की।

एक दिन वह सब कुछ हार गया। यहां तक की उसने जो आभूषण सेंटाल को दिए थे, वो भी हार गया और पैसे भी उधार हो गए। अचानक उसे एक फ्रेंचमैन मिला, जिसने उसे एक गहने की दुकान से चोरी का आइडिया बताया।

उसने दिल्ली के होटल अशोका के ऊपर की छत तोड़ कर चोरी की। उसने मालिक के कनपटी पर बंदूक रख कर तिजोरी से सारे पैसे और आभूषणों को बैग में भरा और चंपत हो गया।

वह दिल्ली हवाई अड्डे पर मुंबई जाने की लिए पहुंचा, लेकिन वहां कस्टम अधिकारियों की जांच के दौरान उन्हें कुछ संदिग्ध लगा। इसलिए उन्होंने बैग से भरा लूट का सारा माल जब्त कर लिया। चार्ल्स पकड़े जाने के डर से भाग निकला।

वह दुबारा अपने कार की चोरी के धंधे में लग गया, लेकिन कुछ समय बाद ही पकड़ा गया। उसे दिल्ली के तिहाड़ जेल भेज दिया गया। उसने नाटक करके जेल से भागने की साजिश की, लेकिन वह कामयाब नहीं हो पाया।

उसकी पत्नी ने भी उसका साथ दिया

Randeep Hooda meets reel Charles Sobhraj in the Kathmandu jail
उसने अल्सर के बहाने हॉस्पिटल में भर्ती होने की साजिश रची। इसमें उसकी पत्नी ने भी उसका साथ दिया, पर वह दुबारा अपनी पत्नी के साथ पकड़ा गया। इस बार दोनों को जेल जाना पड़ा, लेकिन सेंटाल को जमानत मिल गई।

कुछ दिन बाद उसने जमानत के लिए साइगॉन में रह रहे अपने पिता से पैसे मांगे और अपनी जमानत करवाई। इसके बाद वह भारत से भाग निकला। भारत से भागने के बाद चार्ल्स का नया ठिकाना बना काबुल यानी अफगानिस्तान।

वह यहां हिप्पियों को बड़े आराम से ठगता और लूटता था। खासकर उनको जो नशीली दवाएं खरीदने के लिए यूरोपियन देशों से आते थे। उसकी जिंदगी बड़े आराम से कट रही थी, लेकिन उसे जल्द ही काबुल से निकलने की इच्छा हुई। इसी बीच उसे काबुल पुलिस ने गिरफ्तार कर लिया। उसने फिर जेल से भागने का षडयंत्र रचा।

वह नहीं चाहती थी कि वह दुबारा चार्ल्स से मिले

Randeep Hooda meets reel Charles Sobhraj in the Kathmandu jail

चार्ल्स ने एक सिरिंज खरीदी और उससे अपना खून निकला और पी गया। वह ऐसा दिख रहा था जैसे अल्सर हुआ हो। उसे हास्पिटल ले जाया गया, जहां से वह ईरान भाग गया।

अगले साल उसने यूरोप के चक्कर काटे पर उसने ज्यादा समय कहीं नहीं बिताया। शायद उसे पकड़ने का डर सता रहा था। चार्ल्स के पास करीब 10 पासपोर्ट थे, जिसमें से कुछ चुराए और कुछ ख़रीदे हुए थे।

वह अपना पासपोर्ट बदलता और फिर उसी नाम से वह जाना जाता। उसने बाद में पुलिस को जानकारी दी कि 1972-1973 के दौरान उसने कराची, रोम, तेहरान, काबुल, युगोस्लाविया, बुल्गारिया, और कोपेहेगन की यात्राएं कीं।

इधर काबुल में अपने परिवार को छोड़कर भागने के बाद वह समझ चुका था कि इस शादी का अंत हो चुका है। बेचारी सेंटाल जान चुकी थी कि अंतराष्ट्रीय अपराध पुलिस संगठन के पास उसके पति के साथ उस पर भी अपराधिक गतिविधियों से संबंधित मामला दर्ज हो चुका है।

वह नहीं चाहती थी कि वह दुबारा चार्ल्स से मिले। वह कुछ समय बाद वह पेरिस चली गई। अंतराष्ट्रीय अपराधी के तौर पर कुख्यात होने के बाद चार्ल्स को छिपने के लिए कुछ ही देश बचे थे।

चार्ल्स मैरी एंड्री के संपर्क में आया जो उसकी प्रेमिका बनी

Randeep Hooda meets reel Charles Sobhraj in the Kathmandu jail

इस प्रकार इस्तांबुल में वह अपने छोटे भाई एंड्र्यू से मिला, जहां वह चार्ल्स के साथ घोटालों में सक्रिय हो गया। क्योंकि चार्ल्स अंतराष्ट्रीय अपराधी हो चुका था, इसलिए उनसे अपने भाई को राजी कर लिया था कि वह फ्रांस कभी नहीं जाएगा, बल्कि वह पूर्व के देशों में जाएगा जहां उसे कोई पहचान न पाए।

फिलहाल वह तुर्की गया, जहां उसने कुछ छोटी-मोटी लूटपाट की और वहां से फरार हो कर ग्रीस चला गया। वहां एथेंस में उसने कुछ अच्छे नागरिकों को अपना शिकार बनाया।

उसी दौरान वह छोटे-मोटे आभूषणों की चोरी में गिरफ्तार कर लिए गया। चार्ल्स ने खुद को एंड्र्यू बताया और जेल से कुछ हफ़्तों बाद छूट गया। जब तक पुलिस को इस बात की जानकारी हुई वह देश से निकल चुका था।

इधर एंड्र्यू को पुलिस गाड़ी से भागने से जुर्म में ग्रीस पुलिस ने उस पर और चार्ज लगा दिया और इस तरह वहां की अदालत ने उसे 18 वर्ष की सजा सुनाई। इस बीच थाइलैंड में चार्ल्स मैरी एंड्री के संपर्क में आया जो उसकी प्रेमिका बनी।

1970 के दशक में उसने विदेशी पर्यटकों को अपना निशाना बनाना शुरू किया

Randeep Hooda meets reel Charles Sobhraj in the Kathmandu jail
1970 के दशक में उसने विदेशी पर्यटकों को अपना निशाना बनाना शुरू किया। वह उनका मित्र बनकर उनके लिए नशीली दवाइयां देता, फिर उनकी हत्या कर देता था।

विदेशी महिलाएं उसका मुख्य शिकार बनतीं थी। 1972-1976 के बीच उसने 24 लोगों की हत्या की थी। 1986 में चार्ल्स अपने साथियों के साथ तिहाड़ जेल से भागने में कामयाब रहा। वर्ष 2003 में नेपाल जाने के बाद उसे 1975 में हुए दो हिप्पियों के हत्या के आरोप में आजीवन कारावास की सजा दी गई।

नेपाल में सजा काटने के दौरान 2008 में चार्ल्स ने बहुत ही छोटी आयु की एक नेपाली लड़की निहिता बिस्वास के साथ जेल में ही शादी कर ली। निहिता और उसके परिजन चार्ल्स साथ उसके संबंध को अपनी रजामंदी दे चुके हैं।

एक कुख्यात अपराधी होने के बावजूद चार्ल्स को जो लोकप्रियता हासिल हुई वह अपने आप में बहुत बड़ी है। अपराधों और हत्याओं जैसी वारदातों को अंजाम देते हुए चार्ल्स ने जिन तकनीकों और रणनीति का प्रयोग किया वह अपने आप में हैरानी पैदा करने वाली भी है।
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