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रागगीरी संग बच्चों के ख्वाव के तिनकों का आसमान

Wed, 23 Sep 2015 08:06 PM IST
टीम डिजिटल/अमर उजाला, दिल्ली
टीम डिजिटल/अमर उजाला, दिल्ली Updated Wed, 23 Sep 2015 08:06 PM IST
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Raaggiri with orphan

समाज के वंचित तबके तक संगीत पहुंचाने वाली संस्था रागगीरी ने आज नोएडा के बालकुटीर में कार्यक्रम का आयोजन किया। इस मौके पर छोटे छोटे बच्चों को जीवन में संगीत के महत्व के बारे में बताया गया। कार्यक्रम के दौरान छोटे छोटे बच्चों ने गाना भी गाया।

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इतनी सी हंसी, इतनी सी खुशी, इतना सा टुकड़ा चांद का, ख्वाव के तिनकों से चलो बनाएं आसमान गाते वक्त छोटे छोटे बच्चे के चेहरे पर जमकर खुशी थी।

रागगीरी ट्रस्ट संगीत के हीलिंग टच को समझने और समझाने वाली संस्था है। जो समाज के वंचित तबके को संगीत से जोड़ती है। रागगीरी इससे पहले भी वृद्धाश्रमों, कैंसर पीड़ितों और नेत्रहीन बच्चों के साथ इस तरह के कार्यक्रम का आयोजन करती रही है।
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raggiri
















कार्यक्रम के दौरान छोटे छोटे बच्चों को ये समझाया गया कि संगीत समाज सुधार की प्रक्रिया में विनाश से बचकर सृजन के रास्ते पर चलना सिखाता है। जिसका महत्व पूरी दुनिया को धीरे धीरे समझ आ रहा है।
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रागगीरी की संस्थापक सदस्य पल्लवी सिंह ने बच्चों को बताया कि संगीत तन-मन को निर्मल कर देता है। संगीत आज हमारे समाज की बुनियादी जरूरत है। उन्होंने बच्चों के बीच खाने पीने की चीजें भी बांटी।


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बालकुटीर संस्था की शुरुआत 1989 में अंजीना जी ने की थी। कर्नाटक के बेल्लारी से नोएडा आई अंजीना ने 1989 के बाद से अपना पूरा जीवन बेसहारा बच्चों की देखभाल में बीता दिया है। इसके लिए उन्हें तमाम मंचों पर सम्मानित भी किया गया है। बालकुटीर रजिस्टर्ड संस्था साईकृपा की देखरेख में चलता है।

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