100 Years of Rafi: रफी का गाना सुनकर रो पड़ते थे ये गायक, छह महीने तक यह देखकर परेशान रहा चायवाला
Mohammed Rafi: मोहम्मद रफी की 100वीं जयंती पर आज हम आपको एक दिलचस्प घटना के बारे में बताने जा रहे हैं, जिसे एसपी बालासुब्रमण्यम ने साझा किया था। इस बारे में वह कई कार्यक्रम में बता चुके हैं।
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24 दिसंबर 2024 यानी आज मोहम्मद रफी की 100वीं जयंती है। वह एक ऐसे गायक थे, जिनकी आवाज ने भारतीय सिनेमा और संगीत जगत को अनगिनत हिट गाने दिए। रफी साहब की आवाज का जादू आज भी लोगों के दिलों में गूंजता है। कई गीतकार, संगीतकार और गायक उन्हें भगवान की तरह पूजते हैं।
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उनकी आवाज की ताकत का एहसास मशहूर गायक एसपी बालासुब्रमण्यम के एक अनुभव से भी होता है, जिसने रफी साहब की आवाज और उनके गानों के प्रभाव को बेहद खूबसूरती से व्यक्त किया। दिल छून लेने वाली इस घटना को खुद बालासुब्रमण्यम ने साझा किया था। एसपी बालासुब्रमण्यम ने एक कार्यक्रम में रफी साहब से जुड़ा दिलचस्प किस्सा बताते हुए कहा था कि जब वह इंजीनियरिंग कॉलेज में पढ़ाई कर रहे थे और गायन में अपना करियर शुरू भी नहीं किया था, तब वह रोज साइकिल से कॉलेज जाते थे। रास्ते में एक चाय की दुकान थी, जहां पुराने गाने रेडियो पर बजते थे। इस दौरान हफ्ते में कम से कम तीन दिन रफी साहब का एक खास गाना बजता था। हालांकि, उस वक्त बालासुब्रमण्यम को यह नहीं पता था कि यह गाना किस फिल्म का है और न ही यह कि यह गाना रफी साहब ने गाया है।
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गाने को सुनकर वह साइकिल रोककर खड़े हो जाते और उसे सुनते वक्त उनकी आंखों से आंसू निकल जाते। यह सिलसिला छह महीने तक चलता रहा। एक दिन, चायवाले ने उनसे पूछा, "तुम हर रोज यह गाना सुनने आते हो और हर बार रोते हो। ऐसा क्यों?" इस सवाल का जवाब देते हुए बालासुब्रमण्यम ने कहा, "मुझे नहीं पता कि मैं ऐसा क्यों करता हूं।" यह गाना था फिल्म कश्मीर की कली का मशहूर गीत 'दीवाना हुआ बादल'।
कुछ समय बाद एसपी बालासुब्रमण्यम अपनी कार से उसी रास्ते से गुजर रहे थे। तभी चायवाले की दुकान के पास से गुजरते हुए रुककर उन्होंने उस दुकानदार से कहा, "मैं वही हूं, जो रोज साइकिल से आता था और गाना सुनकर रोता था। अब मुझे पता चला है कि मैं क्यों रोता था।" उन्होंने आगे कहा, "मैं इंसानों को गाते हुए सुनता था, लेकिन जब रफी साहब गाते थे तो मुझे लगता था कि मैं भगवान को गाते हुए सुन रहा हूं।"
एसपी बालासुब्रमण्यम से जुड़ी यह घटना यह बताती है कि रफी साहब की आवाज में वह दिव्यता और भावनात्मक गहराई थी, जो सिर्फ संगीत को नहीं, बल्कि आत्मा को भी छू जाती थी। रफी साहब का संगीत आज भी लोगों के दिलों में जीवित है। उनका संगीत एक विरासत है, जो हमेशा भारतीय सिनेमा के इतिहास में अमर रहेगा।