Martand temple: उपेक्षा के चलते खंडहर बना विश्व प्रसिद्ध मार्तंड मंदिर, विवेक अग्निहोत्री ने बताया इसे सांस्कृतिक नरसंहार
बीते दिनों रिलीज हुई विवेक अग्निहोत्री की फिल्म द कश्मीर फाइल्स ने अपनी रिलीज के साथ ही नई रिकॉर्ड कायम करे। इस फिल्म ने 90 के दशक में कश्मीर में हुए नरसंहार और कश्मीरी पंडितों के पलायन की कहानी को दुनिया के सामने लाकर रख दिया।
खबरें लगातार पढ़ने के लिए अमर उजाला एप डाउनलोड करें
या
वेबसाइट पर पढ़ना जारी रखने के लिए वीडियो विज्ञापन देखें
अगर आपके पास प्रीमियम मेंबरशिप है तो
विस्तार
बीते दिनों रिलीज हुई विवेक अग्निहोत्री की फिल्म द कश्मीर फाइल्स ने अपनी रिलीज के साथ ही नई रिकॉर्ड कायम किए। इस फिल्म ने 90 के दशक में कश्मीर में हुए नरसंहार और कश्मीरी पंडितों के पलायन की कहानी को दुनिया के सामने लाकर रख दिया। फिल्म देख लोग तरह- तरह की प्रतिक्रिया देते नजर आ रहे हैं। इसी बीच फिल्म के निर्देशक विवेक अग्निहोत्री लगातार कश्मीर और इससे जुड़े मुद्दों पर अपनी राय देते दिखाई दे रहे हैं।
इसी क्रम में हाल ही में विवेक ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म ट्विटर पर कश्मीर की संस्कृति से जुड़ा एक पोस्ट शेयर किया है। शेयर किए गए इस पोस्ट में विवेक ने कश्मीर स्थित मार्तंड मंदिर का जिक्र किया है। निर्देशक ने अपने पोस्ट में लिखा, मार्तंड मंदिर, कश्मीर। आतंकवाद से पहले और आतंकवाद के बाद। क्या इस धरती पर कोई इस सांस्कृतिक नरसंहार को नकार सकता है? विवेक अग्निहोत्री के इस ट्वीट के सामने आते ही अब कश्मीर का यह मंदिर चर्चा में आ गया है। तो आइए जानते हैं इस मंदिर और इसके इतिहास के बारे में।
भारत के दो विश्व प्रसिद्ध सूर्य मंदिर हैं, जिनमें कोणार्क और मार्तंड शामिल है। कोणार्क मंदिर के बारे में लगभग सभी लोग जानते हैं। लेकिन कश्मीर के श्रीनगर से 60 किलोमीटर दूर दक्षिण कश्मीर के अनंतनाग में स्थित मार्तंड सूर्य मंदिर के बारे में लोगों को ज्यादा जानकारी नहीं है। कला का बेहतरीन नमूना, स्तंभों में ग्रीक संरचना, वास्तुकला को झलकाते इस मंदिर में चीनी, रोमन, ग्रीक और भारतीय शैली की झलक अनूठी झलक भी देखने को मिलती है।
कहा जाता है कि भगवान सूर्य की उपासना के लिए यह मंदिर कर्कोटा वंश के राजा ललितादित्य मुक्तापीड ने बनवाया था। इस मंदिर परिसर में 84 खंभे हैं। मंदिर के सरोवर की खूबसूरती तो देखते ही बनती है। बेहद खूबसूरत नजारों के बीच बने इस मंदिर के पूर्वी क्षेत्र में मुख्य प्रवेश द्वार है। वहीं, इसके चारों तरफ मौजूद विशाल पर्वत पर्यटकों का मन मोह लेते हैं।
एक तरफ जहां देशभर में प्राचीन कलाओं और धरोहरों को संजोया जा रहा है तो वहीं दूसरी तरफ उपेक्षा का शिकार हुआ यह मंदिर खंडहर में तब्दील हो गया। खंडहर हो चुके मंदिर के अवशेषों में आज भी कई विशाल खंभे हैं, जो किसी किले का एहसास दिलाते हैं। मंदिर की दीवारों पर कई देवी देवताओं की मूर्तियां बनी हुई हैं। हालांकि, खंडहर में तब्दील होने के बावजूद अभी भी बड़ी संख्या में श्रद्धालु यहां पहुंचते हैं। इस मंदिर की वास्तुकला को देख लोग आज भी हैरान रह जाते हैं।