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Manoj Bajpayee: कभी तिग्मांशु धूलिया के साथ चॉल में रहते थे मनोज बाजपेयी, बोले- यहां तो एक साथ 10 लोग...

Sun, 26 Feb 2023 08:05 PM IST
प्रियंका नेगी एंटरटेनमेंट डेस्क, अमर उजाला
एंटरटेनमेंट डेस्क, अमर उजाला Published by: प्रियंका नेगी Updated Sun, 26 Feb 2023 08:05 PM IST
सार

सुपरस्टार मनोज बाजपेयी ने स्ट्रगलिंग एक्टर के रूप में पुराने दिनों को याद किया, जब वह बॉलीवुड में काम करने वाले 10 लोगों के साथ एक चॉल में रहते थे। उन्होंने कहा कि तिग्मांशु धूलिया और विजय कृष्ण आचार्य उस समय उनके रूममेट्स थे।

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Manoj Bajpayee returned to his chawl 6 months later saw 10 people were also living there
मनोज बाजपेयी, तिग्मांशु धुलिया - फोटो : सोशल मीडिया

विस्तार

बॉलीवुड एक्टर मनोज बाजपेयी मूल रूप से बिहार के रहने वाले वह अपना करियर बनाने दिल्ली से मुंबई आए थे। उन्होंने कभी किसी बड़े संस्थान में एक्टिंग की ट्रेनिंग नहीं ली। हां बस उन्हें दिल्ली में थिएटर करने का कई साल का अनुभव था। हालांकि, 90 के दशक में जब वह मुंबई आए तो उन्हें 'सत्या (1998)' के साथ ब्रेक पाने से पहले कुछ समय इंतजार करना पड़ा। मनोज ने मीडिया से बातचीत के दौरान पुराने दिनों को याद किया। 
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बात उन दिनों की है, जब अभिनेता मनोज बाजपेयी दिल्ली से कुछ दोस्तों के साथ मुंबई आए थे। इनमें से कुछ एक्टर थे और कुछ लेखक या निर्देशक थे। उन्होंने 'द्रोहकाल (1994)' और 'बैंडिट क्वीन (1994)' जैसी फिल्मों में छोटे-छोटे रोल किए थे। तब तिग्मांशु धूलिया शेखर कपूर की फिल्म के कास्टिंग डायरेक्टर थे। वहीं, मनोज ने अभिनय जारी रखने के लिए 'कलाकार', 'इम्तिहान' और 'स्वाभिमान' जैसे कई अनेक टेलीविजन सीरियल में काम किया।
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Manoj Bajpayee returned to his chawl 6 months later saw 10 people were also living there
मनोज बाजपेयी - फोटो : अमर उजाला ब्यूरो, मुंबई
मीडिया से इंटरव्यू के दौरान में मनोज ने अपने संघर्ष के दिनों को याद करते हुए बताया कि वह उस समय कैसे निराश महसूस करते थे। उन्होंने बताया, 'एक निराशा थी कि जब आप काम जानते हैं, लेकिन आपको मौका नहीं मिल रहा था। यह बहुत अच्छा था कि सभी दोस्त अक्सर मिलते थे। एक साथ बैठते थे, पढ़ते थे और प्रैक्टिस करते थे। मैं पूरे दिन बिजी रहता था। मैं दो लोगों के साथ चॉल में रहता था। जब मैं छह महीने बाद वापस आया तो मैंने देखा कि कम से कम 10 लोग वहां सो रहे थे। तिग्मांशु धूलिया उनमें से एक थे। विजय कृष्ण आचार्य, जिन्होंने 'धूम' बनाई थी, अपना अधिकांश समय वहीं बताते थे।'
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बता दें कि राम गोपाल वर्मा की 'सत्या' के साथ 'भीकू म्हात्रे' के रूप में मनोज ने करियर की शुरुआत की। उन्होंने बेस्ट सपोर्टिंग रोल एक्टर के लिए राष्ट्रीय फिल्म पुरस्कार के साथ-साथ बेस्ट एक्टर के लिए फिल्मफेयर क्रिटिक्स अवॉर्ड भी जीता। मनोज और तिग्मांशु ने 2012 में अनुराग कश्यप की 'गैंग्स ऑफ वासेपुर' फिल्म में फिर साथ काम किया। मनोज फिल्म 'चक्रव्यूह (2012)', 'स्पेशल 26 (2013)', 'अलीगढ़ (2016)' में काम कर चुके हैं।

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