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मुकेश: एक आवाज़, जिसने समझाए ज़िंदगी के मायने

Thu, 03 May 2018 09:06 AM IST
Updated Thu, 03 May 2018 09:06 AM IST
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legendary playback singer mukesh and his lifetime achievement
गायक मुकेश
कभी-कभी मेरे दिल में ख़्याल आता है, 
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के जैसे तुझको बनाया गया है मेरे लिए


यह महज़ ख़्याल ही नहीं, बल्कि मोहब्बत की एक इबारत है, जो जवां दिलों में ख़्वाहिश बनकर आज भी सांसे ले रही है और इस गीत को मुकेश साहब ने अपनी जादुई आवाज़ से अमर बना दिया। अब कभी-कभी नहीं, बल्कि प्यार में डूबे हर शख़्स के दिल में यह ख़्याल हमेशा के लिए मकाम कर गया है। मुकेश साहब की रूहानी आवाज़ हमारे कानों से जुदा होने को आज भी तैयार नहीं होती। उनके गीतों में मिठास ऐसी कि जितना भी सुनो, जी नहीं भरता। कहते हैं बॉलीवुड में सभी गायकों का गाना गाने का एक ख़ास अंदाज़ होता था और गाने के मूड के हिसाब से गायक का चुनाव होता था, लेकिन मुकेश साहब के साथ इस तरह का कोई बंधन नहीं रहा। प्रेमिका की प्रशंसा हो या प्यार का इज़हार, मोहब्बत का ग़म हो या ज़िंदगी के मायने, हर हालात को मुकेश साहब की दिलकश आवाज़ ने ज़िंदा कर दिया।

 

प्रेम की प्रशंसा

legendary playback singer mukesh and his lifetime achievement
मनोज कुमार और माला सिन्हा
प्रेम की प्रशंसा की बात करें तो उनका यह गाना सुनिए, 

चांद सी महबूबा हो मेरी कब ऐसा मैंने सोचा था
हां तुम बिल्कुल वैसी हो, जैसा मैंने सोचा था


महबूबा की तारीफ़ समेटे हुए यह गाना मोहब्बत करने वालों के लिए मिसाल बना हुआ है। यह गीत जवां दिल की तमन्नाएं समेटे हुए है और इस गाने के हर लफ़्ज़ को मुकेश साहब ने अपनी आवाज़ से करिश्माई बना दिया। बात जब प्यार के इज़हार की हुई तो मुकेश साहब का एक अलग अंदाज़ सामने आया। 

 
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फूल तुम्हें भेजा है ख़त में

legendary playback singer mukesh and his lifetime achievement
सरस्वती चंद्र का दृश्य
सरस्वती चंद्र का यह गीत

फूल तुम्हें भेजा है ख़त में, फूल नहीं मेरा दिल है, 
प्रियतम मेरे ख़त में लिखना, क्या ये तुम्हारे क़ाबिल है 


या फिर राजकपूर और नरगिस पर फ़िल्माया गया फ़िल्म श्री 420 का गाना 

प्यार हुआ इक़रार हुआ है प्यार से फिर क्यों डरता है दिल
कहता है दिल रस्ता मुश्किल, मालूम नहीं है कहां मंज़िल 


जितने ही मासूम और प्यार में डूबे इन गीतों के शब्द हैं, उतनी ही मख़मली आवाज़ में मुकेश साहब ने प्यार के इज़हार को हरदिल अज़ीज़ बना दिया।
 
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बिछड़े प्रेमियों के ग़मों में शरीक़

legendary playback singer mukesh and his lifetime achievement
फ़िल्म संगम का दृश्य
बात यहीं नहीं रुकती, मोहब्बत में जुदाई के अहसास को शिद्दत से बयां करने वाले उनके नग़में अभी भी बिछड़े प्रेमियों के ग़मों में शरीक़ हैं।   

दोस्त-दोस्त न रहा, प्यार-प्यार न रहा
ज़िंदगी हमें तेरा, ऐतबार न रहा


हो या

ये मेरा दीवानापन है 
या मोहब्बत का सुरूर 
तू न पहचाने तो है ये 
तेरी नज़रों का कुसूर


इन गीतों में मुकेश साहब ने जो दर्द उतारा है, वो किसी भी टूटे दिल की आह को महसूस करने के लिए मजबूर कर देता है। दर्द भरे नग़मों के लिए ख़ास तौर पर संगीतकारों की पहली पसंद मुकेश साहब हुआ करते थे। उनके गाए हुए 'जाने कहां गये वो दिन', 'ओ जाने वाले हो सके तो लौट के आना', 'चांदी की दीवार न तोड़ी, प्यार भरा दिल तोड़ दिया', 'भूली हुई यादों मुझे इतना न सताओ, अब चैन से रहने दो, मेरे पास न आओ' जैसे गीत से दर्द है कि जाता नहीं।

 

मुकेश साहब के गाने ज़िंदगी से भरपूर

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गायक मुकेश
मुकेश साहब के गाने ज़िंदगी को भरपूर जीने के लिए प्रेरित करते हैं। 

'इक दिन बिक जाएगा, माटी के मोल, जग में रह जाएंगे प्यारे तेरे बोल', 'इक प्यार का नग़मा है, मौजों की रवानी है, ज़िंदगी और कुछ भी नहीं, तेरी मेरी कहानी है', 'ओ जाने वाले हो सके तो लौट के आना', 'ओह रे ताल मिले नदी के जल में, नदी मिले सागर में', 'किसी की मुस्कुराहटों पे हो निसार', 'दुनिया बनाने वाले क्या तेरे मन में समायी',  'सजन रे झूठ मत बोलो, ख़ुदा के पास जाना है' जैसे गीत जीवन की सच्चाई और जीने के जज़्बे को बड़ी सरलता से समझाते हैं।

मुकेश साहब का जन्म 22 जुलाई को दिल्ली में हुआ था। बचपन से ही उनके दिल में अभिनेता बनने की ख़्वाहिश पल रही थी, लेकिन आवाज़ की दुनिया में उनका सितारा पहले से रही बनकर तैयार था, लेकिन इंतज़ार था तो बस उसके चमकने का। 10 भाई बहनों में मुकेश छठे नंबर पर थे। दरअसल मुकेश साहब की बहन संगीत की शिक्षा लेती थीं और उन्हीं को सुनकर मुकेश भी संगीत सीखने लगे। एक दिन उन्हें उनके दूर के चाचा मोतीलाल ने अपनी बहन की शादी में गाते सुना और इस हीरे को तराशने का काम यहीं से शुरू हो गया। इसके बाद मोतीलाल उन्हें मुंबई ले आए, जहां पंडित जगन्नाथ प्रसाद ने मुकेश साहब को तराशना शुरू कर दिया। अब इस नगीने के चमकने की शुरुआत हो चुकी थी। 

 

जब मशहूर गायक के.एल. सहगल हो गए भ्रमित

legendary playback singer mukesh and his lifetime achievement
गायक मुकेश
1945 में आई फ़िल्म पहली नज़र में मुकेश ने 'दिल जलता है तो जलने दे' गाना गाया। लोगों को लगा कि यह के.एल. सहगल हैं। इस गाने से सहगल साहब भी भ्रमित हो गए और ये गाना सुनकर कहा, "ताज्जुब है, मुझे याद नहीं आ रहा कि मैंने ये गाना कब गाया।" 

मुकेश ने अपने करियर में डेढ़ हज़ार से भी कम गाने गाए। लेकिन ऐसा लगता है मानो हर गाना हिट था। नौशाद के साथ उनकी जुगलबंदी बेहद उम्दा थी। उस दौर में मुकेश की आवाज़ में सबसे ज़्यादा गीत दिलीप कुमार पर फ़िल्माए गये। 50 के दशक में इन्हें एक नयी पहचान मिली, जब इन्हें राजकपूर की आवाज़ कहा जाने लगा। कई साक्षात्कार में ख़ुद राज कपूर ने अपने दोस्त मुकेश के बारे में कहा है कि मैं तो बस शरीर हूं मेरी आत्मा तो मुकेश है। मुकेश साहब को मनोज कुमार की आवाज़ भी माना जाता रहा।

1976 में अमेरिका में मुकेश साहब एक कॉन्सर्ट में हिस्सा लेने गए थे। 27 अगस्त का वो दिन था जब उन्हें सीने में तेज़ दर्द हुआ और उन्हें अस्पताल ले जाया गया, जहां यह जादुई आवाज़ हमेशा-हमेशा के लिए ख़ामोश हो गई और एक संदेश दे गई... कुछ पाकर खोना है, कुछ खोकर पाना है, जीवन का मतलब तो आना और जाना है...

गायक मुकेश की जिंदगी पर कुछ अल्फाज़...

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