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Lakeerein Review: आशुतोष राणा की मेहनत पर फिर फिरा पानी, बिदिता बाग फिल्म की कमजोर कड़ी

Sat, 04 Nov 2023 06:12 PM IST
मोहम्मद फायक अंसारी अमर उजाला ब्यूरो, मुंबई
अमर उजाला ब्यूरो, मुंबई Published by: मोहम्मद फायक अंसारी Updated Sat, 04 Nov 2023 06:12 PM IST
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Lakeerein Movie Review in Hindi Ashutosh Rana Bidita Bag gaurav chopra tia bajpayee mukesh Bhatt Rajesh Jais
लकीरें - फोटो : अमर उजाला ब्यूरो, मुंबई
Movie Review
लकीरें
कलाकार
आशुतोष राणा , बिदिता बाग , गौरव चोपड़ा , टिया बाजपेयी , मुकेश भट्ट , राजेश जैस , अदिति दीक्षित , अमन वर्मा और व अन्य
लेखक
दिलीप शुक्ला , दुर्गेश पाठक और सूर्या सक्सेना
निर्देशक
दुर्गेश पाठक
निर्माता
नवल के टंडन , कविता पाठक और दिनेश कुमार
रिलीज
03 नवम्बर 2023
रेटिंग
2/5

समाज में स्त्री को देवी का दर्जा दिया जाता है,लेकिन यह सिर्फ मान्यताओं में। घर की स्त्री के प्रति लोगों का नजरिया बहुत अलग है। वह घरेलू हिंसा का शिकार होती हैं, प्रताड़ित होती है। और, सबसे बड़ा सवाल यह है कि क्या शादी रेप करने का एक लाइसेंस है? यह सवाल बहुत ही असाधारण और कठिन बहुत है क्योंकि इस सवाल का जवाब ना तो समाज के पास है और ना ही हमारे कानून व्यवस्था में ऐसा कोई प्रावधान है कि शादी के बाद पत्नी की इच्छा के विरुद्ध उनके साथ शारीरिक संबंध बनाना गुनाह है। फिल्म 'लकीरें' इसी संवेदनशील मुद्दे पर आधारित है।

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लकीरें - फोटो : अमर उजाला ब्यूरो, मुंबई

फिल्म की कहानी लखनऊ की रहने वाली काव्या अग्निहोत्री की है जो शादी के बाद अपने पति प्रोफेसर विवेक अग्निहोत्री  पर बलात्कार का मुकदमा दायर करती है और न्याय की मांग करती है। अदालत में काव्या की तरफ से गीता विश्वास और विवेक अग्निहोत्री की तरह से दुधारी सिंह केस लड़ते हैं। पूरी फिल्म की कहानी इन्ही चार किरदार के आस पास घूमती है। काव्या रेप पीड़िता की तरह वकील दुधारी सिंह के सवालो में उलझ कर रह जाती है। सवाल यही पैदा होता है कि पति के साथ  बनाया गया सबंध भले ही जबरन हो वह बलात्कार कैसे हो सकता है। यहां अहम सवाल यह है कि काव्या जिस फरियाद को लेकर अदालत आई है, उस पर सजा देने का कोई प्रावधान कानून में नहीं है।

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लकीरें - फोटो : अमर उजाला ब्यूरो, मुंबई

इस फिल्म के माध्यम से यह बताने की कोशिश की गई है कि शादी के बाद पति का अपनी पत्नी पर पूरा अधिकार होता है। जिसके चलते 18 साल से अधिक उम्र वाली विवाहित महिला को बलात्कार की श्रेणी से अलग किया गया है। इसलिए कानून के प्रावधान में वैवाहिक बलात्कार को मंजूरी नहीं दी गई है। क्योंकि इससे हमारे समाज और गृहस्थ जीवन में गलत प्रभाव पड़ सकता है और  हमारी मान्यताएं और संस्कृति, दोनो को ठेस पहुंच सकता है। ऐसी  स्थिति में काव्या की सोच और उनके जीवन में क्या प्रभाव पड़ता है, इस बात को फिल्म के निर्देशक दुर्गेश पाठक ने बहुत ही मार्मिक तरीके से पेश किया है।

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लकीरें - फोटो : अमर उजाला ब्यूरो, मुंबई

भले ही विवाहित महिला को बलात्कार की श्रेणी से अलग रखा गया है। लेकिन अगर उसे प्रताड़ित किया गया है, घरेलू हिंसा का शिकार हुई है तो कानून में पति को सजा देने का प्रावधान है। फिर भी अक्सर देखा गया है कि जब भी कोई महिला अपनी फरियाद लेकर अदालत में लेकर आती है तो फरियाद तमाशा बनकर रह जाता है। और, इन तमाशों के बीच फरियाद कहीं गुम हो जाता है, दम तोड देती है। दुर्गेश पाठक, सूर्या सक्सेना की लिखी कहानी की पटकथा और संवाद  'दामिनी' और 'दबंग' जैसी कई हिट फिल्मों के संवाद लेखक  दिलीप शुक्ला ने  लिखे है। कोर्ट रूम के डायलॉग अच्छा बहुत अच्छे हैं, एकदम से 'दामिनी' वाली शैली में।  फिल्म का विषय ऐसा है, जिस पर चर्चा करना बहुत आवश्यक है। कहीं ना कहीं यह फिल्म  वैवाहिक बलात्कार को अपराध के रूप में मान्यता देने की वकालत करती नजर आती है।
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लकीरें - फोटो : अमर उजाला, मुंबई

इस फिल्म में काव्या की भूमिका टिया बाजपेयी  और प्रोफेसर विवेक अग्निहोत्री  की भूमिका गौरव चोपड़ा ने निभाई है। दोनों ने अपनी अपनी भूमिका के साथ न्याय करने की कोशिश तो की  है लेकिन असरदार नहीं रहे। फिल्म के दो महत्वपूर्ण किरदार वकीलों के है। वकील दुधारी सिंह की भूमिका में आशुतोष राणा की जबरदस्त अदाकारी देखने को मिली हैं। शुद्ध हिंदी में उनके संवाद का उच्चारण अच्छा खासा प्रभावित करते हैं। राजेश जैस, अदिति दीक्षित, कासिम, अमन वर्मा, मीनाक्षी आर्या, सहर्ष शुक्ला का अभिनय औसत रहा है। फिल्म के क्लाइमेक्स में मुकेश एस भट्ट का किरदार ऐसा टर्न लेता है कि दुधारी सिंह का वकालत करियर खत्म हो जाता है। बिदिता बाग अरसे बाद किसी फ़ल्म में दिखीं लेकिन फिल्म की कमजोर कड़ी वही हैं। किसी नामचीन अभिनेत्री का उनकी जगह होना फिल्म को मजबूती दे सकता था। नरेन गेडिया की सिनेमैटोग्राफी, हरकीरत सिंह लाल, सुंदर पथुरी का संकलन,  विपिन पटवा का बैकग्राउंड स्कोर भी औसत ही है।

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