Kadar Khan: बेहद गरीबी में गुजरा था कादर खान का बचपन, हफ्ते में सिर्फ तीन दिन खाया करते थे खाना
कादर खान इंडस्ट्री के एक दिग्गज अभिनेता थे। लेकिन उनका बचपन बहुत गरीबी में बीता था।
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बॉलीवुड इंडस्ट्री के इतिहास में ऐसे कई अभिनेता रहे हैं, जिन्होंने हर किस्म के रोल में अपनी अदायगी से लोगों का दिल जीता है। इन्हीं कलाकारों में से एक कादर खान हैं। कादर खान हिंदी सिनेमा के एक ऐसे दिग्गज कलाकार हैं, जो शानदार कॉमेडियन और लिखने की कला में भी महारथी थे। कादर खान ने अपनी अदाकारी से लोगों के दिलों-दिमाग में कुछ इस तरह से जगह बनाई थी कि आज भी लोगों की जुबान पर उनका नाम आ ही जाता है। कादर खान की अदाकारी के जलवे तो सभी ने देखें हैं, लेकिन ऑन स्क्रीन कमाल दिखाने वाले इस अभिनेता ने बिहाइंड द कैमरा भी अपनी बेहतरीन राइटिंग से सभी के दिल में अपनी खास जगह बनाई थी। इंडस्ट्री में एक लंबा सफर तय करने वाले कादर खान की आज पुण्यतिथि है और इस खास मौके पर हम आपको उनके जीवन से जुड़ी कुछ खास बातों को बताने जा रहे हैं...
दो रुपये मांगने 10 किलोमीटर दूर जाते थे कादर खान
अफगानिस्तान के काबुल में जन्में कादर खान का परिवार मुंबई की एक बस्ती में आकर बस गया था। मुंबई की इस बस्ती में आए दिन खून-खराबा और मारपीट होती रहती था। कादर खान के पिता को यह सब पसंद नहीं था, जिस कारण कादर का बचपन मां-बाप की लड़ाइयां और तलाक देखते हुए बीता। कादर के माता और पिता का तलाक हो गया था, जिसके बाद उनके उनकी मां की दूसरी शादी करा दी गई थी। लेकिन मां की दूसरी शादी होने के बाद भी कादर के घर के हालात सुधरे नहीं और गरीबी भी कम नहीं हुई। अभिनेता के घर के हालात बद से बदतर होते जा रहे थे। आलम यह था कि न तो राशन होता और न ही कमाई का कोई जरिया, जिसकी वजह से उनके सौतेले पिता 10 किलोमीटर दूर पहले पिता के पास कुल दो रुपये मांगने भेजते थे।
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भीख मांगकर करते थे गुजारा
जहां महज दो रुपये के लिए कादर खान 10 किलोमीटर का लंबा सफर तय किया करते थे, वहीं इसके साथ ही वह मस्जिद में जाकर भीख भी मांगते थे पर इतना सब करने के बाद भी परिवार का गुजारा सही ढंग से नहीं हो पाता था। आलम यह था कि कादर का पूरा परिवार सप्ताह में तीन दिन खाता था और बाकी तीन दिन बिना खाए ही गुजारा करता था। कादर को ये सारी चीजें बहुत परेशान करती थीं। बचपन से ही कादर खान को नकल करने की आदत थी। वह कब्रिस्तान में जाकर दो कब्रों के बीच बैठ खुद से बातें करते हुए फिल्मी डायालॅग्स बोलते थे। वहीं एक शख्स दीवार की आड़ में खड़े होकर उनको देखता था। वह शख्स और कोई नहीं बल्कि अशरफ खान। अशरफ उस समय अपने एक स्टेज ड्रामा के लिए आठ साल के लड़के की तलाश में थे। उन्होंने कादर को नाटक में काम दे दिया और यहीं से कादर खान की किस्मत बदल गई।
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इंडस्ट्री में तय किया लंबा सफर
बचपन में पढ़ाई करने के साथ-साथ ही कादर खान थिएटर से जुड़ गए थे। ड्रामा करने के साथ उन्होंने अपनी पढ़ाई जारी रखी। कादर पढ़ाई में बेहद होशियार थे। उन्होंने मुंबई के इस्माइल युसुफ कॉलेज से ग्रेजुएशन किया। इसके बाद उन्होंने सिविल इंजीनियरिंग में पोस्ट ग्रेजुएशन किया। कादर मुंबई के एक इंजीनियरिंग कॉलेज में लेक्चरर भी थे। इन दिनों में कादर खान का एक ड्रामा ताश के पत्ते बहुत फेमस हुआ था। थिएटर में काम करते-करते कादर खान ने बॉलीवुड में कदम रखा और फिर कभी पीछे मुड़कर नहीं देखा। एक्टर ने 300 से भी ज्यादा फिल्मों में काम किया। इंडस्ट्री में कादर खान ने एक लंबा सफर तय करके अपने ऐसी पहचान बनाई जिसे मिटा पाना बहुत मुश्किल है। 81 साल की उम्र में कादर खान ने कनाडा के अस्पताल में दम तोड़ दिया था। 31 दिसंबर 2018 को उनका निधन हुआ था। वह अपने बेटे के पास रहते थे। अभिनेता को आज भी उनकी मजबूत अदायगी के लिए याद किया जाता है।
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