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'जादू' से ऐसे बने जावेद अख्तर: खाने को पैसे नहीं से लेकर अमिताभ से ज्यादा फीस तक
Thu, 17 Jan 2019 08:06 AM IST
विजय जैन
सुनीता कपूर
सुनीता कपूर
Published by: विजय जैन
Updated Thu, 17 Jan 2019 08:06 AM IST
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javed akhtar
- फोटो : social media
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हिंदी सिनेमा के बेहतरीन शायर और गीतकार जावेद अख्तर आज 73 साल के हो गए हैं। 17 जनवरी 1945 को ग्वालियर में जन्में जावेद को उनके चाहने वाले जादू के नाम से पुकारते हैं। दरअसल, उनके पिता मशहूर शायर जान निसार अख्तर की कविता 'लम्हा-लम्हा किसी जादू का फसाना होगा', बहुत प्रसिद्ध हुई। बस जब जावेद का जन्म हुआ तो उनके पिता ने उनको जादू के नाम से पुकारना शुरू कर दिया। बाद में जादू से मिलता-जुलता उनका नाम रखा गया जावेद अख्तर।
padmavati javed akhtar
उनकी मां सफिया अख्तर उर्दू लेखिका और शिक्षिका थीं। जब जावेद अख्तर छोटे थे तो उनके पिता ने दूसरी शादी कर ली और भोपाल में आ गए। यहीं पर ही जावेद ने कॉलेज की पढ़ाई की और जिंदगी के नए सबक सीखे। जावेद अख्तर 4 अक्तूबर 1964 को मुंबई आए थे। उस वक्त उनके पास न खाने तक के पैसे नहीं थे। उन्होंने कई रातें सड़कों पर खुले आसमान के नीचे सोकर बिताईं। बाद में कमाल अमरोही के स्टूडियो में उन्हें ठिकाना मिला।
Javed Akhtar
सलीम खान के साथ जावेद अख्तर की पहली मुलाकात 'सरहदी लुटेरा' फिल्म की शूटिंग के दौरान हुई थीं। इस फिल्म में सलीम खान हीरो थे और जावेद क्लैपर बॉय। सलीम खान और जावेद अख्तर को सलीम-जावेद बनाने का श्रेय डायरेक्टर एसएम सागर को जाता है। एक बार उन्हें राइटर नहीं मिला था और उन्होंने पहली बार इन दोनों को मौका दिया। सलीम स्टोरी आइडिया देते थे और जावेद डायलॉग लिखने में मदद करते थे। जावेद अख्तर उर्दू में ही स्क्रिप्ट लिखते थे, जिसका बाद में हिंदी ट्रांसलेशन किया जाता है।
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Javed Akhtar
70 के दशक में स्क्रिप्ट राइटर्स का नाम फिल्मों के पोस्टर पर नहीं दिया जाता था, लेकिन सलीम-जावेद ने बॉलीवुड में उन बुलंदियों को छू लिया था कि उन्हें कोई न नहीं कह सका और फिर तो पोस्टरों पर राइटर्स का भी नाम लिखा जाने लगा। सलीम-जावेद की जोड़ी ने मिलकर 1971-1982 तक करीबन 24 फिल्मों में साथ काम किया, जिनमें सीता और गीता, शोले, हठी मेरा साथी, यादों की बारात, दीवार जैसी फिल्मे शामिल हैं। उनकी 24 फिल्मों में से करीबन 20 फिल्में बॉक्स-ऑफिस पर ब्लाक-बस्टर हिट साबित हुई थीं।1987 में प्रदर्शित फिल्म मिस्टर इंडिया के बाद सलीम-जावेद की सुपरहिट जोड़ी अलग हो गई।
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Javed Akhtar
इसके बाद भी जावेद अख्तर ने फिल्मों के लिए संवाद लिखने का काम जारी रखा। जावेद को उनके गीतों के लिए आठ बार फिल्म फेयर पुरस्कार मिला। 1999 में साहित्य के जगत में जावेद अख्तर के बहुमूल्य योगदान को देखते हुए उन्हें पदमश्री से नवाजा गया। 2007 में जावेद अख्तर को पदम भूषण सम्मान से सम्मानित किया गया। जावेद अख्तर की पहली पत्नी हनी ईरानी थीं, जिनके साथ उनकी पहली मुलाकात 'सीता और गीता' के सेट पर हुई थी।
हनी और जावेद का जन्मदिन एक ही दिन पड़ता है। जावेद अख्तर नास्तिक हैं। उन्होंने अपने बच्चों- जोया और फरहान को भी परवरिश ऐसे की है। जावेद अख्तर शुरुआती दिनों में कैफी आजमी के सहायक थे। बाद में उन्हीं की बेटी शबाना आजमी के साथ उन्होंने दूसरी शादी की।
हनी और जावेद का जन्मदिन एक ही दिन पड़ता है। जावेद अख्तर नास्तिक हैं। उन्होंने अपने बच्चों- जोया और फरहान को भी परवरिश ऐसे की है। जावेद अख्तर शुरुआती दिनों में कैफी आजमी के सहायक थे। बाद में उन्हीं की बेटी शबाना आजमी के साथ उन्होंने दूसरी शादी की।