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हमें सेंसर पर भरोसा करना चाहिएः आशा पारेख
रवि बुले/अमर उजाला,मुंबई
Updated Sat, 07 Dec 2013 08:34 AM IST
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आशा पारेख सिर्फ बीते जमाने की कामयाब अभिनेत्री ही नहीं हैं। वह सामाजिक कार्यकर्ता भी हैं। उम्र के सत्तर से ज्यादा बसंत देख चुकीं आशा पारेख अब भी सक्रिय हैं। वह सेंसर बोर्ड की सदस्य रह चुकी हैं। उनसे बातचीत के कुछ अंश...
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आपका फिल्मी कैरियर पांच दशक से ज्यादा लंबा रहा है। मुड़ कर देखती हैं तो कैसा लगता है?
जितना जीवन गुजरा है बहुत सुहाना रहा है। मैं जो काम कर सकती थी वह मैंने किया। मुझे बदले में लोगों का बहुत प्यार मिला। सब सोचती हूं तो बहुत अच्छा लगता है।
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आप फिल्म निर्माण-वितरण-निर्दशन में भी रही हैं। समाजसेवा के कामों से भी जुड़ी हैं। क्या लगता है कि कुछ बाकी रह गया?
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यह तो हमेशा लगता है कि कुछ करने को छूट गया है। ऐसी कई बाते हैं जिन्हें सोचकर लगता है कि कर लिया होता तो अच्छा रहता। जैसे मैं कोई बड़ा बिजनेस करना चाहती थी, वह नहीं हो सका।
कई फिल्में ऐसी रह गईं, जो अच्छी थीं मगर बन न सकीं। कई फिल्में जिन्हें इंकार कर दिया, मगर बाद में लगा कि इनमें काम करना चाहिए था।
जमाना बदल चुका है। पुराने दिनों के किन मित्रों से आप संपर्क में हैं?
मेरे कई पुराने मित्र हैं, जिनसे मैं आज भी मिलती हूं। संपर्क में रहती हूं। सायरा बानो, वहीदा रहमान, हेलन, साधना, नंदा... हम सब समय-समय पर मिलते हैं। साथ में आज की फिल्में देखते हैं। उन पर बातें करते हैं।
आज के समय की कौन सी फिल्में आपको अच्छी लगीं? किन ऐक्टरों को आप पसंद करती हैं?
मुझे विद्या बालन पसंद हैं। उनकी ‘कहानी’ बहुत अच्छी लगी। दीपिका पादुकोण अच्छा काम कर रही हैं। उनकी ‘कॉकटेल’ और ‘राम-लीला’ मुझे अच्छी लगी। मैं संजय लीला भंसाली की भी बड़ी फैन हूं।
आप सेंसर बोर्ड की अध्यक्ष रही हैं। कई लोग आज सेंसर को जरूरी नहीं मानते। आप क्या सोचती हैं?
जब इंटरनेट पर पूरी दुनिया और सब कुछ खुला है तो ऐसे में सेंसर पर सवाल उठने स्वाभाविक हैं। सेंसर बोर्ड तो होना चाहिए, लेकिन उसे उदार होकर सोचने की जरूरत है।
हमें भी सेंसर की श्रेष्ठता और समझ पर विश्वास करना चाहिए। यह गलत है कि किसी फिल्म को सेंसर पास कर दे, फिर उस पर यहां-वहां मुकदमे होते रहें। यह बंद होना चाहिए।
आपका कैरियर निर्विवाद रहा है, लेकिन गोवा इंटरनेशनल फिल्म फेस्टिवल (2009) में दिलीप कुमार साहब के संदर्भ में आपकी तरफ से बात आई कि मैं जिन लोगों को पसंद नहीं करती उनके साथ मैंने काम नहीं किया। कितना सच है यह?
यह पूरी तरह से गलत है। यह मेरी कम-नसीबी है कि मैं दिलीप कुमार साहब के साथ कोई फिल्म नहीं कर सकी। एक फिल्म शुरू भी हुई थी, मगर वह किन्हीं कारणों से पूरी नहीं पाई।
जब यह विवाद हुआ था तो मुझे सायरा बानो को फोन करके कहना पड़ा था कि मैंने ऐसा कुछ नहीं कहा। मैं दिलीप साहब का बहुत सम्मान करती हूं। उन्होंने भी हंस कर यह बात टाल दी थी।