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ट्रक के पीछे देखे थे 'कजरारे, कजरारे' के बोल: गुलजार

Mon, 21 Mar 2016 07:28 PM IST
टीम डिजिटल/अमर उजाला, दिल्ली
टीम डिजिटल/अमर उजाला, दिल्ली Updated Mon, 21 Mar 2016 07:28 PM IST
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Gulzar talks on the new bollywood songs
gulzar
बीते पांच दशकों से हिंदी सिनेमा के लिए एक से बढ़कर एक शानदार गीत लिखने वाले गीतकार गुलजार ने कई राज खोले हैं। स्प्रिंग फीवर नाम के एक आयोजन में उन्होंने बताया कि जिंदगी में छोटी-छोटी बातों से गीत लिखने की प्रेरणा मिलती है। वह जिंदगी में बिखरी छोटी-छोटी खुशियों को ही अपने गीतों का आधार बनाते हैं। उन्होंने बताया कि बंटी और बबली के गीत “कजरारे, कजरारे” के शुरुआती बोल उन्होंने ट्रक के पीछे लिखे देखे थे। इसी से उन्हें पूरा गीत बनाने की प्रेरणा मिली।
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गुलजार ने कहा कि संगीत कोई रेडिमेड फूड नहीं है। अगर कोई संगीत के क्षेत्र में मुकाम बनाना चाहता है तो इसके लिए समय तो चाहिए ही। आदमी में जुनून होना चाहिए। उसे सफलता के लिए कड़ी मेहनत तो करनी ही होगी। उन्होंने कहा कि उन्हें यह देख कर अच्छा लगता है कि नौजवान उनकी शायरी में दिलचस्पी रखते हैं।
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उल्लेखनीय है कि गुलजार को 2002 में साहित्य अकादमी पुरस्कार से सम्मानित किया गया। उन्हें 2004 में पद्मभूषण सम्मान से नवाजा गया। 2014 में उन्हें “जय हो” गीत के लिए ऑस्कर और ग्रैमी अवार्ड दिया गया। 2014 में उन्होंने प्रतिष्ठित दादा साहब फालके पुरस्कार प्राप्त किया। 
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