21 Months of Hell पर विजयकृष्णन का बयान, 'सेंसर बोर्ड ने मुझे किसी भी तरह का संशोधन नहीं सुझाया'
सनल कुमार शशिधरन की फिल्म एस दुर्गा की रिलीज को लेकर चल रहे विवाद के बीच एक और फिल्म विवादों की भेट चढ़ती नजर आ रही है। नया विवाद मलयालम डॉक्यूमेंट्री '21 मन्थ्स ऑफ हैल' को लेकर है जिसे हाल ही में केरल, सीबीएफसी ने बैन कर दिया है।
आपको बता दें कि फिल्म 1975 में इंदिरा गांधी सरकार द्वारा लगाये गए आपातकाल पर आधारित है। ANI से बात करते हुए फिल्म के डायरेक्टर यादू विजयकृष्णन ने बताया सेंसर बोर्ड ने मेरी फिल्म को पूरी तरह से अस्वीकार कर दिया, यहां तक कि उन्होंने किसी भी तरह के संशोधन का सुझाव भी नहीं दिया, सिर्फ इसे खारिज कर दिया गया।
विजयकृष्णन ने आगे बताया सेंसर बोर्ड ने कहा है कि वे एक संशोधन समिति के लिए मुंबई मुख्यालय को रिपोर्ट भेजेंगे। उन्होंने कहा कि बीजेपी पर फिल्म में हस्तक्षेप करने का आरोप हैं जबकि ऐसा कुछ नहीं है।
सेंसर बोर्ड के अधिकांश सदस्य वामपंथी और कांग्रेस के हैं।
उन्होंने कहा, मेरी फिल्म में लोकतंत्र बहाल करने में आरएसएस और जनसंघ के योगदान का जिक्र है और सेंसर बोर्ड के अधिकांश सदस्य वामपंथी और कांग्रेस के हैं। शायद इसी वजह से मेरी फिल्म को बैन कर दिया गया है।
रिपोर्ट्स की मानें तो केरल सीबीएफसी ने इस फिल्म को बैन करने के पीछे 5 कारण बताए हैं। सीबीएफसी का कहना है कि फिल्म में बहुत ज्यादा हिंसा हैं। इसके अलावा फिल्म में महात्मा गांधी के प्रति अनादर दिखता है। इतना ही नहीं फिल्म में राष्ट्रीय ध्वज का अनादर, इंदिरा गांधी के चित्रण के संबंधित मुद्दों के आधार पर फिल्म को बैन किया गया है।
यहां देखें फिल्म का ट्रेलर